केंद्र से अनुदान बंद होने के बाद ऐलनाबाद-रानियां क्षेत्र में प्रभावित हुए कार्य
अब नई प्रदेशस्तरीय योजना शुरू होने का इंतजार
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में गिरते भूजल स्तर को रोकने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई अटल भूजल योजना छह माह से बंद पड़ी है। केंद्र सरकार की ओर से योजना के लिए अनुदान बंद किए जाने के बाद ऐलनाबाद और रानियां क्षेत्र के 78 चयनित गांवों में भूजल संरक्षण से जुड़े कार्यों की रफ्तार धीमी हो गई है।
योजना के तहत गोशालाओं, विद्यालयों और ग्राम पंचायत स्तर पर पानी बचाने तथा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां करवाई जा रही थीं। अब प्रदेश सरकार की ओर से नई प्रदेशस्तरीय योजना शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इसके लागू होने के बाद इन गांवों में जल संरक्षण के कार्यों को फिर से गति मिलने की उम्मीद है।
अटल भूजल योजना के तहत जिले में ऐलनाबाद और रानियां क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई थी। दोनों क्षेत्रों के 78 गांवों का चयन कर वहां भूजल की स्थिति सुधारने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई थी। योजना का उद्देश्य केवल भूजल का दोहन कम करना ही नहीं बल्कि बारिश के पानी का संरक्षण कर उसे जमीन के अंदर पहुंचाना और ग्रामीणों को पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करना भी था।
योजना के अंतर्गत गांवों में जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न कार्य करवाए जा रहे थे। ग्राम पंचायतों को भी इन गतिविधियों में भागीदार बनाया गया था। इसके साथ ही विद्यालयों और गोशालाओं में पानी की बचत, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण से जुड़े कार्यों पर जोर दिया गया।
पोहड़का, मम्मड़खेड़ा सहित कई गांवों में चल रहे काम
योजना बंद होने के बावजूद कई गांवों में पहले से शुरू किए गए कार्य पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं लेकिन उनकी गति काफी धीमी हो गई है। पोहड़का, मम्मड़खेड़ा, नथोर सहित कई गांवों में भूजल संरक्षण से जुड़े कार्य चल रहे हैं। पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं मिलने के कारण नए कार्य शुरू करने और पुराने कार्यों को तेजी से पूरा करने में परेशानी आ रही है। अटल भूजल योजना के माध्यम से ग्रामीणों को पानी के महत्व और भूजल के लगातार गिरते स्तर के प्रति जागरूक किया जा रहा था। किसानों को सिंचाई में पानी की बचत करने वाली तकनीकों को अपनाने, फसल विविधीकरण तथा जरूरत के अनुसार पानी का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
कृषि पर सबसे अधिक असर की आशंका
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल का सबसे अधिक इस्तेमाल कृषि कार्यों के लिए होता है। लगातार भूजल दोहन के कारण कई क्षेत्रों में जलस्तर नीचे जा रहा है। ऐसे में भूजल संरक्षण के कार्यों की रफ्तार धीमी होने से किसानों के सामने भविष्य में सिंचाई के पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, भूजल को बचाने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। बारिश के पानी को संरक्षित करना, खेतों में पानी की खपत कम करना, सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को बढ़ावा देना और कम पानी वाली फसलों की ओर किसानों को प्रेरित करना भी जरूरी है। ग्राम पंचायत स्तर पर जल संरक्षण की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने से भूजल स्तर में सुधार लाया जा सकता है।
प्रदेश की नई योजना से बढ़ेगी उम्मीद
कार्यक्रम में अटल भूजल टीम के पारुल कुमार ने बताया कि अटल भूजल योजना का अनुदान बंद होने के बाद अब प्रदेश सरकार अपने स्तर पर भूजल संरक्षण के लिए नई योजना शुरू करने की तैयारी कर रही है। नई योजना के तहत अब प्रदेश सरकार से विशेष फंड जारी किया जाएगा और भूजल संरक्षण और बरसाती पानी को नियोजित करने का काम किया जाएगा। मौजूदा समय में 78 गांवों में सिरसा के अंदर योजना का कार्य चल रहा है। एक या दो गांवों में काम पूरा हुआ है।
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क्रम जिला चयनित खंड ग्राम पंचायतें
1 यमुनानगर जगाधरी मुस्तफाबाद, रादौर, साढौरा -251
2 करनाल करनाल 41
3 पानीपत बापौली समालखा- 55
4 कैथल गुहला, राजौंद 82
5 कुरुक्षेत्र लाडवा, पिहोवा, शाहाबाद 189
6 सिरसा रानियां, ऐलनाबाद 78
7 फतेहाबाद टोहाना 49
8 गुरुग्राम फर्रुखनगर, पटौदी, सोहना, गुरुग्राम 163
9 फरीदाबाद फरीदाबाद, बल्लभगढ़ 71
10 रेवाड़ी खोल 40
11 पलवल पलवल, हसनपुर, हथीन, होडल 185
12 भिवानी बहल, कैरू, लोहारू, तोशाम 155
13 चरखी दादरी बाढ़ड़ा 49
14 महेंद्रगढ़ नांगल चौधरी, नारनौल, कनीना, अटेली, महेंद्रगढ़ 261
कुल 14 जिले चयनित खंड 1669 ग्राम पंचायतें