हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने आज हरियाणा की नई शिक्षा नीति के भगवाकरण, दलितों के साथ बढ़ती हिंसक घटनाओं, रबी फसलों के समर्थन मूल्य, पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी व स्वच्छता आदि मामलों को लेकर भाजपा सरकार की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को पार्टी लाइन से हटकर प्रदेश हित में चलने की नसीहत दी।
शनिवार को यहां जारी बयान में डॉ. अशोक तंवर ने कहा है कि मुख्यमंत्री एक संवैधानिक पद है और इस पद पर बैठा व्यक्ति किसी एक दल का नहीं बल्कि प्रदेश की समस्त जनता के हितों का रक्षक है। समाचार पत्रों में प्रकाशित संघ के एक विचारक की ओर से शिक्षा का भगवाकरण को लेकर किए दावे का जिक्र करते हुए तंवर ने कहा कि कांग्रेस शिक्षा के सांप्रदायिकरण के प्रयास का पुरजोर विरोध करेगी।
एक तरफ शिक्षा मंत्री दावा करते है कि उन्होंने शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए राज्य के लाखों लोगों से सुझाव लिए वहीं समाचार पत्रों में संघ का एक व्यक्ति बयान देता है वह शिक्षा का भगवाकरण करेगा। संघ का एजेंडा रहा कि देश में सामाजिक असमानता व नफरत को बढ़ाया जाए।
उन्होंने भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं से भी इनके बहकावे में आने की बजाए यह भी जानना चाहिए कि भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में शामिल वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली की पढ़ाई संघ संचालित स्कूलों की बजाए मिशनरी स्कूलों में हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के मंत्रियों के परिवार के बच्चों की शिक्षा-दीक्षा किन संस्थानों में हो रही है।
दलितों पर बढे़ अत्याचार
तंवर ने जींद जिले के कलौदा में जमीनी विवाद को लेकर दलित महिला की हत्या के मामले में राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था के लिए प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया। भाजपा की सरकार बनने के बाद हरियाणा में जातिगत व धार्मिक तनाव के मामले बढ़े हैं।
भाजपा के बयानवीर नेता सामाजिक ताने-बाने को विकृत करने के लिए आग में घी डालने का काम कर रहे है, जिनके दीर्घकालिक परिणाम बेहद भयंकर होंगे। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार आ रहे दलित उत्पीड़न के मामलों पर चिंता जताते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आपसी तनाव से सामाजिक कटुता पैदा हो रही है।
समर्थन मूल्य में वृद्धि बेहद कम
उन्होंने कहा कि पिछले रबी सीजन की फसल बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से बर्बाद हुई, खरीफ में कपास की फसल सफेद मक्खी और धान की फसल का भाव नहीं मिलने से किसान की हालत चिंताजनक बनी हुई है। एक क्विंटल गेहूं की कीमत में महज 75 रुपये की बढ़ोतरी किसान के लिए बेहद कम है।
भाजपा सरकारों की किसानों के प्रति यही प्रवृति रही तो किसान को लागत पर कम मुनाफा और जमाखोरों को प्रोत्साहन मिलेगा। दाल की आसमान छूती कीमतें जमाखोरी का ही दुष्परिणाम है। भाजपा सरकार को किसान के हालात देखते हुए केंद्र सरकार के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की मांग करनी चाहिए या फिर उसे कम से कम पांच सौ रुपये क्विंटल बोनस देना चाहिए।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों का झांसा देने वाली पार्टी पेट्रोल-डीजल पर सर्विस टैक्स बढ़ाने व स्वच्छता सैस के नाम पर जानबूझकर महंगाई थोप रही है। कांग्रेस प्रदेश के लोगों के हित में भाजपा के इन जनविरोधी कृत्यों का पुरजोर विरोध करेगी।