सिरसा। 73 लाख के सर्विस टैक्स गबन मामले में जवाब देने मंगलवार को तत्कालीन ईओ व सेवानिवृत्त लेखाकार नप कार्यालय सिरसा पहुंचे। हालांकि वे इस जांच में शामिल होने के लिए आए थे, परंतु इसी बीच जब ठेकेदारों को उनके आने का पता चला तो उन्होंने कार्यालय में आकर हंगामा कर दिया।
ठेकेदार का आरोप है कि तत्कालीन ईओ व सेवानिवृत्त लेखाकार ने उसके 25 लाख रुपये के बिल अदा करने के बदले में सात लाख रुपये का कमीशन लिया, बिल फिर भी पास नहीं किया। साथ ही एक ट्रैक्टर और पानी का टैंकर भी ले गए। हालांकि मामला बढ़ता देखकर कुछ अन्य ठेकेदारों ने लेखा अधिकारी सुरेंद्र अरोड़ा ने ठेकेदार को समझाया। जिसके बाद वह शांत हुआ। सर्विस टैक्स गबन मामले में नप द्वारा एक एसडीएम, अलग अलग समय के चार ईओ, दो पूर्व नगर परिषद प्रधान व सेवानिवृत्त कैशियर को नोटिस जारी करके जवाब तलब किया गया था।
ठेकेदार विजय झूंथरा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन ईओ ने 2015 में रोहतक में पूर्व मुख्यमंत्री की रैली के लिए मैदान बनाने के लिए उसका स्वराज ट्रैक्टर और पानी का टैंकर मंगवाया था। आज तक उसने ट्रैक्टर और पानी का टैंकर नहीं लौटाया। साथ ही उसके 25 लाख रुपये के बिल पास करने की एवज में सात लाख रुपये कमीशन भी ले लिया। परंतु बिल पास नहीं किए और उन्हें खुर्द बुर्द कर दिया। ये बिल नप कार्यालय के रिकॉर्ड से गायब है। दोनों ने मिलीभगत करके ये काम किया। लेखा अधिकारी सुरेंद्र अरोड़ा ने ठेकेदार विजय झूंथरा से कहा कि वे दूसरे कमरे जाएं, क्योंकि दोनों अधिकारी किसी जांच में शामिल होने के लिए आए है। इसके बाद दूसरे ठेकेदार विजय झूंथरा को एक अन्य कमरे में ले गए। लेखा अधिकारी ने उन्हें समझाया कि वे इस समय कार्यालय में हंगामा न करें, अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वे अपना मामला खुद सुलझाएं।
ये था पूरा मामला
नगर परिषद में 2012 से 2017 तक सर्विस टैक्स की चोरी हुई थी। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब 2018 में तत्कालीन ईओ वीरेंद्र सहारण के पास माल और सेवाकर आ. सूचना महानिदेशालय गुरग्राम से नोटिस पहुंचा। नोटिस आने के बाद जब रिकॉर्ड खंगाला गया तो पता चला कि नप के खाते से पैसा जा रहा है, परंतु यह पैसा माल और सेवाकर आ. सूचना महानिदेशालय के पास नहीं जा रहा। इसके बाद जांच में 2012 से लेकर 2017 तक की जांच की गई। मामले में एक एसडीएम, रिटायर्ड लेेखाकार, पांच ईओ, दो नगर परिषद प्रधान को नोटिस जारी किए गए थे। इस मामले में अब तक 55 लाख रुपये की रिकवरी हो चुकी है। गबन में प्रमुख भूमिका एक एडवोकेट की थी, जो कि नप के अधिकारियों से मिलीभगत करके पैसे ले जाता और बाद में सर्विस टैक्स की जाली रसीद जमा करवा देता।
गबन मामले की जांच चल रही है, जिस पर वे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते। ठेकेदार ने जो आरोप लगाए, वह उसका निजी मामला है।
-सुरेंद्र अरोड़ा, लेखा अधिकारी, सिरसा नगर परिषद
एकांउट ऑफिसर के कार्यालय में ठेकेदार रोष जताते हुए।- फोटो : Sirsa