संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। शिक्षा विभाग में एक अजीब मामला सामने आया है। जिला स्तर के अधिकारियों ने मुख्यालय से अनुमति लिए बिना निजी फाउंडेशन से अनुबंध कर लिया। शिक्षकों का प्रशिक्षण भी पूरा कर लिया गया। अब जब मुख्यालय में बैठे अधिकारियों को सूचना मिली तो इस संज्ञान लिया गया। इसके बाद उच्च अधिकारियों ने आदेश दिए और कहा कि बिना अनुमति कोई भी अनुबंध न किया जाए। इसके बाद निजी फाउंडेशन के साथ करार रद्द कर दिया।
शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए जिला प्रशासन ने निजी फाउंडेशन के साथ अनुबंध करने का फैसला लिया। इसके तहत शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि विद्यार्थियों का शिक्षा का स्तर सुधारा जा सके। ऐसे में जिला प्रशासन ने प्रथम फाउंडेशन के साथ अनुबंध किया। एमओयू करके शिक्षकों की ट्रेनिंग भी शुरू करवा दी। इस दौरान खामी ये रह गई कि अनुबंध की लिखित अनुमति शिक्षा विभाग के मुख्यालय से नहीं ली गई थी। एमओयू साइन की बात जब निदेशालय स्तर पर पहुंची तो उन्होंने जिला प्रशासन से इसके बारे में बातचीत की। इसके बाद 17 अप्रैल को प्रथम एजुकेशन के साथ चल रहे कार्य पर रोक लगा दी। 18 अप्रैल को इसी संबंध में स्कूल शिक्षा निदेशालय ने प्रदेशभर में पत्र जारी कर अपने स्तर पर एमओयू साइन करने पर रोक लगा।
प्रशिक्षण हो चुका था पूरा, 15 दिन का अभ्यास रहा था बाकी
जिला प्रशासन की ओर से एमओयू साइन होने के बाद इस पर कार्य भी शुरू हो गया था। जिले के सभी ब्लॉकों के 72 शिक्षकों को प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण भी पूरा हो चुका था। 17 अप्रैल को प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षकों ने 15 दिन का वर्किंग डे अभ्यास शुरू करना था। उससे पहले इस पर रोक लगा दी गई है। बता दें कि जिले में चौथी कक्षा में 12877 व पांचवीं कक्षा में 13723 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इनका हिंदी, गणित व अंग्रेजी का लर्निंग लेवल काफी कमजोर है। इसे बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन बेहतरीन कार्य कर रहा था, लेकिन वह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है।
निदेशालय ने पत्र में दिया यह तर्क
निदेशालय ने पत्र में बताया है कि प्रधानाचार्यों, अध्यापक संगठनों ने संज्ञान में लाया गया है कि बहुत से सीएसआर, एनजीओ, फाउंडेशन पार्टनर विद्यालयों में अपनी परियोजनाएं लेकर आते हैं। एससीईआरटी, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद एवं निदेशालय के समन्वय के बिना इसे विद्यालयों में करवाते हैं। विभाग का तर्क है कि उनका अपना अलग पाठ्यक्रम, सामग्री, अध्यापक प्रशिक्षण तथा एलओ होते हैं। पत्र में भी यह भी कहा गया है कि कार्यक्रमों का समन्वय विभाग के पाठ्यक्रम, दैनिक टाइम टेबल तथा मासिक टेस्ट आदि से भी नहीं होता और ऐसे अध्यापक प्रशिक्षणों में स्कूल के शैक्षणिक घंटे खराब होते हैं। इसलिए विद्यालय स्तर पर ऐसी कोई भी योजना जो पठन-पाठन, शिक्षण, परीक्षा से जुड़ी हो, जिसमें अध्यापक प्रशिक्षण आदि शामिल हो, उसे निदेशालय की स्वीकृति के बिना न करवाया जाए। एनजीओ, सीएसआर, फाउंडेशन ढांचागत सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए स्वतंत्र है और इसके विभाग इनका पूरा सहयोग करेगा।
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के साथ हुए एमओयू को निरस्त कर दिया गया है। योजना के तहत चल रहे कार्य पर भी रोक लगा दी गई है।-आत्म प्रकाश मेहरा, जिला शिक्षा अधिकारी, सिरसा।