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नहरी पानी चोरी के विरोध में 12 गांवों के किसानों का बवाल

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 नहरी पानी की चोरी के विरोध में सात अगस्त से सिंचाई विभाग के कार्यालय में धरने पर बैठे किसानों का सुनवाई नहीं होने के कारण गुस्सा सोमवार को फूट पड़ा। ने फिर से मोर्चा खोल दिया है। 12 गांवों के किसानों ने सोमवार को चोरी पर रोक लगाने व अवैध मोघे बंद करवाने की मांग को लेकर सिंचाई विभाग में धरना देकर नारेबाजी की। इसके बाद किसानों ने सिंचाई मंत्री का पुतला फूंका और जमकर रोष व्यक्त कर कार्यालय के गेट पर ताला जड़ दिया।
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किसानों ने ऐलान किया कि जब तक विभाग कार्रवाई नहीं करेगा तब वे संघर्ष करते रहेंगे। बाद में सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता केआर सिहाग किसानों के बीच में पहुंचे और अवैध ढंग से चल रहे मोघों की जांच कराने और नहरी पानी चोरी करने वालों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने ताला तो खोल दिया लेकिन धरना जारी रखने की बात कही।

इसके बाद किसान धरनास्थल पर जाकर बैठ गए। दो घंटे तालाबंदी के कारण न तो कोई बाहर आ सका और न ही किसानों ने किसी को अंदर घुसने दिया। गौरतलब है कि पिछले दो माह से किसानों ने पानी चोरी करने वालों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है लेकिन आश्वासन के बावजूद अधिकारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। पानी चोरी के कारण टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे फसलें सूख रही हैं।
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इन गांवों के किसान हुए लामबंद
सोमवार को सिंचाई विभाग के कार्यालय में गांव धौलपालिया, मौजू की ढाणी, कासी का बास, तलवाड़ा, ढाणी बच्चन सिंह, ठोबरिया, मिर्जापुर, निमला, प्रताप नगर, अमृतसर कलां आदि गांवाें के किसान लखविंद्र सिंह, सुभाष चंद्र, सुरेंद्र कुमार, कुलदीप सिंह, महेंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, गुरदेव सिंह, अवतार सिंह विभाग के खिलाफ लामबंद हुए। किसानों ने आरोप लगाया कि भाखड़ा नहर का पानी रोड़ी हेड से 193 क्यूसेक छोड़ा जाता है पर उन तक 75 क्यूसेक पानी ही पहुंचता है। रास्ते में 43 अवैध मोघे लगे हुए हैं।

 विभाग को कई बार शिकायत की है पर सुनवाई ही नहीं होती। जब तक कार्रवाई नहीं होगी वे धरना जारी रखेंगे। उनके गांवों में फसलों के साथ-साथ पेयजल की भी किल्लत बनी हुई है। अधिकारियों का उनकी समस्या से कोई सरोकार नहीं है। इस मामले में उन्होंने सिंचाई मंत्री का पुतला फूंका है और प्रदर्शन किया ताकि अधिकरियों की नींद खुल जाए।

अधिकारियों पर लगाया मिलीभगत का आरोप
सात अगस्त से धरने और भूख हड़ताल पर बैठे किसानों के पक्ष में आसपास के गांवाें के किसान भी आने लगे हैं। उन्होंने भाखड़ा जल सेवाएं परिमंडल कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना दे दिया है। सोमवार को किसानों ने सिंचाई विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन करते करते गेट तक पहुंच गए। इसी दौरान किसानों ने गेट पर ताला जड़ दिया। दो घंटे तक तालाबंदी रही।

किसानों ने बताया कि सभी अवैध मोघों की लिस्ट उन्होंने कई बार विभाग को दी है पर विभाग के अधिकारी मोघे बंद नहीं कर रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की इस मामले में मिलीभगत है। समस्या का समाधान यहां नहीं हुआ तो वे विभाग के प्रदेश मुख्यालय के समक्ष धरने पर बैठेंगे। अवैध मोघों के अलावा ट्यूब लगाकर भी पानी चोरी किया जा रहा है पर विभाग के अधिकारी और कर्मचारी चोरी रोकने के लिए कदम नहीं उठा रहे।

नहीं देंगे पानी चोरी की इजाजत
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता केआर सिहाग ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। किसी को भी पानी चोरी की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया है कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई होगी।

 बारिश की कमी के कारण जिलेभर में नहरी पानी की चोरी का सिलसिला दो माह से जारी है। विभाग ने जिले को चार जोनों में बांटकर टीमें गठित की हैं ताकि पानी की चोरी पर रोक लगाई जा सके। पिछले दो माह से आए दिन किसानों द्वारा पानी चोरी को लेकर विभाग को शिकायतें की जा रही है। गत दिनों चौपटा क्षेत्र में पानी चोरी रोकने गए किसानों के साथ हाथापाई भी हुई थी। इस समस्या को लेकर किसानों रोड जाम तक भी किए हैं।    
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