संवाद न्यूज एजेंसी
ओढां। सरकार द्वारा अनाज मंडियों में खरीद, बिक्री व उठान के अलावा किसानों के भुगतान को लेकर तमाम दावे किए गए थे, लेकिन धरातल पर इन दावों की स्थिति कुछ और है। न ही तो उठान हो रहा और न ही भुगतान। स्थिति ये है कि पहले तो किसान बिक्री को लेकर कई-कई दिन तक मंडियों की धूल फांकते रहे और जब फसल बिक गई तो पैसों के लिए फसल बिक्री की पर्चियां लेकर चक्कर काट रहे हैं। कर्मचारी किसानों को आगे से आगे टरका रहे हैं।
परेशान किसान कभी सरकार को, तो कभी खरीद एजेंसियों को कोसता नजर आ रहा है। ओढां अनाज मंडी में उठान बेहद ही धीमा चल रहा है। यहां पर हैफेड ने करीब 2 लाख बैग गेहूं की खरीद की है, जिसमें से सिर्फ 50 हजार बैग ही उठ पाए हैं। करीब 50 हजार बैग सरसों काफी दिनों से उठान में मंडी में पडी है। समय पर उठान न होने के चलते बैग फट चुके हैं, तो वहीं बैग को नीचे से दीमक भी चट कर रही है। मंडी के शेड के नीचे सरसों की बोरियों के बड़े-बड़े ढेर लगे होने के चलते किसानों को गेहूं उतारने तक की जगह नहीं बची है। मंडी व साथ लगते किसान विश्राम गृह में गेहूं व सरसों के ढेर लगने के चलते वहां जरा सी भी जगह नहीं बची है।
वहीं दूसरी ओर किसान भुगतान के लिए चक्कर काटने को मजबूर हैं। गांव नुहियांवाली के किसान जगदीश सहारण, दलीप कुमार व कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने करीब 10 दिनों पूर्व सरसों बेची थी। जिसके बाद उन्हें पर्ची तो बनाकर दे दी गई, लेकिन उनके पैसों का भुगतान अभी तक नहीं हुआ। भुगतान के लिए वे कभी कालांवाली तो कभी ओढां में बैठे कर्मचारियों के चक्कर काट रहे हैं। पूछे जाने पर कर्मचारी उन्हें यह कहकर टरका देते हैं कि मंडी से अभी तक उनकी सरसों भी गोदाम में नहीं गई। किसान जगदीश सहारण ने बताया कि उसे पैसों की बेहद आवश्यकता है, लेकिन उसे अपनी ही फसल के दाम लेने के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
डाले के नाम लेबर द्वारा अवैध वसूली, ट्रांसपोर्टर ने डीएम को भेजी शिकायत
बैग से भरे ट्रक जब खाली होने के लिए गोदामों में जाते हैं, तो वहां पर लेबर की मनमानी देखने को मिल रही है। लेबर ट्रक चालकों से डाले के नाम पर प्रति ट्रक 800 से एक हजार रुपये तक की वसूल कर रही है। ट्रक चालकों ने बताया कि लेबर की इतनी मनमानी है कि कई बार तो आधा ट्रक में बीच में छोड़ देते हैं। लेबर की ओर से प्रति बैग 1 रुपया डाले के रूप में वसूला जा रहा है। वहीं मजदूरों ने कहा कि ये वसूली नहीं डाला खोलने का रिवाज है। बाद में उन्होंने इसे इनाम का नाम देकर आगे कुछ भी बोलने से कन्नी काट ली। इस मामले को लेकर ओढां मंडी के ट्रांसपोर्टर सुनील कुमार ने हैफेड के डीएम को शिकायत भेजी है। उसने शिकायत में कहा कि उसके पास रत्ताखेड़ा खरीद केंद्र व ओढां मंडी का टेंडर है। उसने कहा कि लेबर द्वारा डाले के नाम पर 1 रुपये 25 पैसे प्रति बैग नाजायज रूप से वसूले जा रहे हैं। इसी के चलते गाड़ियां खाली नहीं हो रही और मंडियों में उठान धीमा है।
वर्जन
मंडी में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था व आगे गोदाम में लेबर कम होने की वजह से उठान कार्य काफी धीमा है। हमने ट्रांसपोर्टर को कई बार व्यवस्था सुधारने के लिए कह दिया है। डाले के नाम पर पैसे के लेनदेन में हमारा कोई रोल नहीं है। - राजकुमार, परचेजर (हैफेड)।
वर्जन
ट्रक खाली करने में लेबर हमसे 4 रुपये प्रति बैग के हिसाब से लेती है। जो डाले का खर्चा है, वह लेबर अपने स्तर पर लेती है, हमारा इसमें कोई रोल नहीं। लेबर में बचना तो दूर हमारी जेब में से खर्चा लगता है। - जगसीर सिंह, लेबर ठेकेदार (कालांवाली)।
जिले में 6.19 लाख एमटी गेहूं की खरीद, 577 करोड़ रुपये का किया भुगतान
जिले की अनाज मंडियों में अब तक 6 लाख 19 हजार 456 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। उठान का कार्य भी जारी है। उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने बताया कि दो लाख 90 हजार मीट्रिक टन (लगभग 49 प्रतिशत) से अधिक गेहूं का मंडियों से उठान हो चुका है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा एक लाख 25 हजार 985 मीट्रिक टन, हैफेड द्वारा चार लाख 201 मीट्रिक टन तथा हरियाणा वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन द्वारा 93 हजार 270 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई है। अब तक किसानों को उनकी फसल के 596 करोड़ में से 577 करोड़ रुपये की राशि उनके खातों में भेजी जा चुकी है। उन्होंने बताया कि जिले की मंडियों में बारदाने की कोई समस्या नहीं है, यदि कोई समस्या सामने आती है तो उसका तत्परता से समाधान किया जा रहा है।