गोरीवाला। मकान तोड़ने के विरोध व मुआवजे की मांग को लेकर धरने पर बैठे मजदूर घम्मू की मंगलवार को मौत हो गई। भारतमाला राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान गांव सकताखेड़ा के मजदूर का कंपनी कर्मचारियों ने मकान तोड़ दिया था। इसके बाद मजदूर घम्मू सिंह व उसका परिवार बीते 13 दिनों से मुआवजे के लिए धरने पर बैठा था।
घम्मू की मौत से रोषित परिवार के सदस्यों, मजदूरों व किसानों ने उसके शव का अंतिम संस्कार न करने की चेतावनी देकर आंदोलन तेज कर दिया है। अंदोलनकारियों ने नौ गांवों का 100 फीसदी मुआवजा जारी करने की मांग रखी गई है। प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार किसानों से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया।
चार वर्ष पहले राजमार्ग के लिए डबवाली क्षेत्र के नौ गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। संबंधित कंपनी ने अभी तक अधिग्रहण की गई जमीन का 100 फीसदी मुआवजा जारी नहीं किया गया है। इसको लेकर इलाके के लोग तहसीलदार, उप मंडल अधिकारी, जिला उपायुक्त के माध्यम से सरकार को अनेक पत्र भी दे चुके हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता राकेश फगोडिया, संजय मिढ्ढा ने बताया कि सकताखेड़ा निवासी मजदूर घम्मू सिंह का 100 फीसदी मकान राजमार्ग में अधिग्रहण हुआ है। कंपनी के लोग गत दिनों जबरन मकान तोड़ने के लिए पहुंचे थे। मजदूर घम्मू ने जब अपना मकान बचाने का प्रयास किया तो कंपनी के लोगों ने हाथापाई करते हुए मजदूर को जमीन पर गिरा दिया और जबरन दीवार, शौचालय, स्नानघर तोड़ दिए। मजदूर पहले से ही अस्वस्थ चल रहा था और जमीन पर गिरने के बाद मंगलवार सुबह तक बेसुध चारपाई पर पड़ा था। इसके चलते उसकी मौत हो गई। उन्होंने कहा कि घम्मू सिंह ने नागरिक अस्पताल में पुलिस को बयान भी दिया था कि संबंधित वीआरसी कंपनी व एनएचएआई के लोगों ने जबरन उसका घर तोड़ा व उसके साथ हाथापाई की है। लिखित शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सूचना मिलने के बाद तहसीलदार भुवनेश कुमार नायब तहसीलदार ओमवीर दोपहर करीब 2 बजे मौके पर पहुंचे थे। जब किसान व मजदूरों ने मांगों के बारे में बात की गई तो तहसीलदार ने कहा कि हम तो श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे हैं।
मजदूर का इलाज करवाने संबंधित भी उठा चुके हैं मांग
किसानों ने कहा कि कुछ दिन पहले भी अधिकारी अनिश्चितकालीन धरना स्थल पर पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने मजदूर घम्मू का इलाज करवाने संबंधित मांग भी रखी थी। अधिकारियों ने उनकी एक भी मांग नहीं सुनी। ऐसे में किसान प्रतिनिधियों ने दो दिन पहले भी खून से पत्र लिखा था। उस पत्र में पुरजोर मांग की थी कि पीड़ित मजदूर के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रबंध किया जाए फिर भी प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया था। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि यह साधारण मौत नहीं जबकि एनएचएआई और वीआरसी कंपनी द्वारा की गई हत्या है। संबंधित वीआरसी कंपनी मुआवजा जारी होने से पहले ग्रामीणों के जबरन मकान तोड़ने का कार्य कर रही है। मजदूर घम्मू सिंह के तीन लड़के व पांच लड़कियां है। जोकि शादीशुदा हैं। मजदूर के बच्चों सहित पूरे परिवार ने कहा है कि जब तक घम्मू सिंह को न्याय और 9 गांव के किसान मजदूरों को मुआवजा जारी नहीं होगा, तब तक किसी भी सूरत में अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
मामले को लेकर किसानों के साथ बातचीत की जा रही है। समस्या का हल निकालने का प्रयास किया जा रहा है। -भुवनेश कुमार, तहसीलदार, डबवाली।