सीडीएलयू के रेडियो स्टेशन के अंदर चलता सांस्कृतिक कार्यक्रम।
सिरसा। चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में सालों पहले रेडियो स्टेशन शुरू किया गया था, जो मौजूदा समय में विवि परिसर के दायरे में ही चल रहा है। इस दायरे को बढ़ाने और युवाओं को प्रेक्टिकल नॉलेज प्रदान करने की दिशा में विवि प्रशासन व्यापक कदम उठाने जा रहा है। विवि प्रशासन की ओर से रेडियो स्टेशन को अपग्रेड करने का काम किया जा रहा है।
इसकी ऑन एयर क्षमता भी पूरे शहर के दायरे में की जाएगी। इससे शहर के लोगों को भी इसका फायदा होगा। सरकारी योजनाएं, शिक्षा, समाज और विभिन्न एक्सपर्ट के विचार रेडियो स्टेशन के माध्यम से सांझा किए गए जाएंगे। इसके लिए विवि प्रबंधन ने पांच लाख रुपये का बजट पहले चरण में पास किया है।
दरअसल, विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं प्रबंधन विभाग के अंदर विशेष रूप से मीडिया सेंटर का निर्माण किया गया है। इसी में रेडियो स्टेशन को विकसित किया गया था और इसका क्रेज युवाओं में पैदा किया जाता था। समय की मांग के साथ-साथ धीरे धीरे इस दिशा में युवाओं का रुझान कम हो गया। मौजूदा वक्त में सोशल मीडिया पर पोडकास्ट यानी साक्षात्कार का तरीका बदलने के बाद रेडियो के साक्षात्कार लोगों को याद आने लगे हैं। इसलिए एक बार फिर विवि प्रशासन ने इस दिशा में कदम उठाया और मीडिया सेंटर व उसके संसाधनों को अपडेट करने का कार्य किया है।
वर्ष 2010 में शुरू हुआ था रेडियो स्टेशन
रेडियो स्टेशन वर्ष 2010 में शुरू किया गया था। 90.4 पर यह ऑन एयर होता है। इसे पिछले 15 सालों से सुबह 9 से 12 बजे तक तीन घंटे के लिए चलाया जाता है। इसमें मुख्य तौर पर स्वास्थ्य, शिक्षा, सरकारी योजनाएं और मोटिवेशनल कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। मौजूदा समय में नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड के एमओयू है।
यह होगा बदलाव
रेडियो स्टेशन का समय बढ़ाया जाएगा। रेडियो स्टेशन को सुबह 9 से 5 बजे तक शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। विश्वविद्यालय के समय तक नियमित रूप से रेडियो स्टेशन चलेगा और सभी को उसका लाभ होगा। इसके साथ-साथ इस समय में अलग-अलग कार्यक्रमों को प्रमुखता के साथ चलाया जाएगा। इससे रेडियो के प्रति युवाओं ओर शहरवासियों को रुझान बढ़ेगा। विवि के बच्चों की कार्यकुशलता का भी पता चलेगा।
रेडियो स्टेशन को अपग्रेड किया जाएगा। जनसंचार के बच्चों के लिए यह बेहतर विकल्प है। इसका सही दिशा में प्रयोग होगा तो सामाजिक बदलाव में विवि का योगदान बढ़ेगा।
- प्रो. विजय कुमार, कुलपति, सीडीएलयू