सड़कों पर घूमने वाले लावारिस पशु जनता के लिए आफत बन चुके हैं। शहर की सड़कें हो या नेशनल हाईवे, कहीं
से भी निकलना जानलेवा साबित हो रहा है।
वर्ष 2015 में 42 लोगों की जान यमदूत बने लावारिस पशुओं के कारण चली गई। आलम यह हो गया है कि लोग सड़क पर पैदल चलना भी जोखिम भरा मानने लगे हैं।
शुक्रवार रात को एक बाइक सवार युवक लावारिस पशु के कारण दुर्घटना का शिकार हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना की सूचना मिलने पर सदर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सामान्य अस्पताल पहुंचाया।
जानकारी के अनुसार माधो सिंघाना निवासी रमेश कुमार प्लंबर का काम करता था। शुक्रवार को वह अपने बाइक पर सवार होकर सिरसा आया हुआ था। रात नौ बजे वापस गांव जाते समय रास्ते में लावारिस सांड ने बाइक को टक्कर मार दी जिससे बाइक पलट गया।
शरीर पर गहरी चोट लगने के कारण रमेश की मौके पर ही मौत हो गई। राहगीरों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। शनिवार सुबह पुलिस ने परिजनों का बयान दर्ज करके इस मामले में इत्तेफाकिया मौत की कार्रवाई की है। पोस्टमार्टम के उरांत शव परिजनों को सौंप दिया गया।
43 लोगों की जा चुकी है जान
लावारिस पशुओं के कारण हुए हादसों पर नजर डाले तो अब तक जिले में 43 लोगों की मौत हो चुकी है। सिरसा पुलिस के दबंग इंस्पेक्टर अनिल कुंडू को लावारिस पशु के चलते अकाल मौत का ग्रास बनना पड़ा। जून 2015 मेें इंस्पेक्टर अनलि डबवाली शहर थाने के प्रभारी थे।
रात को वह अपनी कार में सवार होकर फतेहाबाद की तरफ जा रहे थे कि मोरीवाला के पास नेशनल हाईवे पर लावारिस सांड सीधा कार से आ टकराया। मौके पर ही इंस्पेक्टर अनिल कुंडू की मौत हो गई।
इसके कुछ दिन बाद हिसार से इनेलो नेता जोगेंद्र सिंह की डबवाली से सिरसा की तरफ आते समय लावारिस सांड के कारण हो गई। एक सांड सीधा उनकी इनेवो से टकराया जिससे गाड़ी कई पलटे खा गई।
22 नवंबर को गांव नेजिया खेड़ा के पास लावारिस पशु की टक्कर से एक गाड़ी अनियंत्रित होकर पलट गई जिससे गाड़ी में सवार एक पुलिस कर्मी सहित दो लोगों की मौत हो गई थी। अब 2016 नववर्ष में रमेश की मौत के साथ लावारिस पशुओं के चलते होने वाली मौत का आंकड़ा 43 हो गया है।
बॉर्डर से दाखिल हो रहे पशु
सिरसा में लावारिस पाशुओं की संख्या इसलिए कम नहीं हो रही क्योंकि सिरसा राजस्थान और पंजाब के बॉर्डर से लगता है। बॉर्डर होने के कारण रोजाना 50 से 100 की संख्या में पशुओं के झुंड को सिरसा की तरफ खदेड़ दिया जाता है। यही आवारा पशु सिरसा के गांवों में घुसकर किसानों की फसलों को खराब करते हैं।
तंग आकर ग्रामीण इन पशुओं को शहर की ओर खदेड़ देते हैं। सड़कों पर घूमते ये पशु एकदम से वाहनों के आगे आ जाते हैं जिससे लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।