निजी लैब की गलती रविवार को दो जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी। सरकारी अस्पताल अगर गलती नहीं पकड़ता तो गर्भवती की जान पर बन सकती थी। रविवार को डिलीवरी के लिए आई भावना को रक्त की जरूरत थी। चिकित्सक के कहने पर उसने अपने ब्लड ग्रुप की जांच करवाई। लैब की रिपोर्ट में उसका ब्लड ग्रुप बी पॉजीटिव आया। रिपोर्ट लेकर ब्लड के लिए वह सरकारी अस्पताल में चली गई और बी पॉजीटिव रक्त की मांग की।
अस्पताल के लैब टेक्नीशियन ने रक्त चढ़ाने से पहले उसके ब्लड के नमूने लिए, पता चला कि उसका ब्लड ग्रुप बी पॉजीटिव नहीं, बल्कि एबी पॉजीटिव है। शहर की एक अन्य लैब से उसकी ब्लड जांच करवाई गई। रिपोर्ट देखकर भावना के परिजनों के होश उड़ गए। रिपोर्ट सरकारी अस्पताल की ब्लड जांच से मेल खाई। 24 घंटे के भीतर शहर की दो निजी लैब की रिपोर्ट ने भावना के परिजनों को सांसत में डाल दिया।
अगर एबी पॉजीटिव की जगह बी पॉजीटिव रक्त चढ़ जाता तो महिला और उसके बच्चे की जिंदगी को खतरा पैदा हो सकता था। एकता नगरी की गली आर्य विद्या मंदिर (ब्रांच) के निवासी राकेश कुमार ने बताया वह गांव पथराला में व्यवसाय करता है। उसकी पत्नी भावना गर्भवती है। उसको रक्त की कमी है। 30 मई को उसने कॉलोनी रोड स्थित एक डायग्नोस्टिक लैब से भावना के ब्लड ग्रुप की जांच करवाई थी।
लैब ने अपनी रिपोर्ट में उसकी पत्नी का ब्लड ग्रुप बी पॉजीटिव बताते हुए ब्लड की मात्रा 5.8 ग्राम बताई। राकेश के अनुसार 31 मई को रिपोर्ट के साथ वे सरकारी अस्पताल में बी पॉजीटिव रक्त चढ़वाने के लिए आ गए। अस्पताल के लैब टेक्नीशियन सुरेंद्र कुमार ने पुन: रक्त की जांच की। रिपोर्ट में ब्लड ग्रुप एबी पॉजीटिव आया। शहर की एक अन्य निजी लैब ने भी अस्पताल जैसी रिपोर्ट प्रस्तुत की लेकिन डबवाली के सरकारी अस्पताल में एबी पॉजीटिव रक्त नहीं होने के कारण वे सिरसा चले गए। सिरसा के सरकारी अस्पताल में दोबारा ब्लड ग्रुप जांचा गया। वहां भी एबी पॉजीटिव की रिपोर्ट आई।
राकेश कुमार ने बताया कि लैब की गलत रिपोर्ट की वजह से उसकी बीवी और कोख में पल रहे बच्चे की जिंदगी खतरे में पड़ सकती थी। अगर सरकारी अस्पताल में ब्लड ग्रुप की जांच नहीं होती तो अनहोनी हो सकती थी। राकेश कुमार ने लैब संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जा सकती थी महिला की जान
एबी पॉजीटिव ब्लड की जगह अगर बी पॉजीटिव रक्त चढ़ जाता तो रिएक्शन होने की वजह से महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की जान को खतरा पैदा हो सकता था। लैब संचालक ने लापरवाही बरती है। इस संबंध में शिकायत आने पर कार्रवाई की जाएगी। ब्लड स्टोरेज सेंटर में एबी पॉजीटिव रक्त की कमी को पूरा किया जाएगा।
-एमके भादू, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, डबवाली
किट टेस्ट करना भूल गया था
ब्लड ग्रुप जांच की किट खराब थी। जांच से पहले वह किट टेस्ट करना भूल गया, जिसकी वजह से रिपोर्ट गलत आई। इस संबंध में उसने किट मुहैया करवाने वाली कंपनी को अपनी शिकायत दर्ज करवाई है।
-सुखमंदर सिंह, संचालक, शिवम डायनोस्टिक लैब, डबवाली