सिरसा। फर्जी सरकारी कार्यालय के मामले में जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है, नए-नए खुलासे हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी राममेहर ने सिरसा के अलावा चंडीगढ़ में भी फर्जी सरकारी कार्यालय खोला था, जहां उसने करीब डेढ़ करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया। इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने 2015 में एफआईआर दर्ज की थी और आरोपी राममेहर इस मामले में जमानत पर बाहर है।
जांच अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि आरोपी राममेहर ने हिसार में 2022 में फर्जी सरकारी कार्यालय खोला, जहां उसने लोगों से लाखों रुपये की ठगी की। आरोप है कि उसने अपने कार्यालय में रखे स्टाफ को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे पैसे लिए थे। 2025 में राममेहर ने फिर से सिरसा के हिसार रोड पर एक नया फर्जी सरकारी कार्यालय खोला, जिसे सिविल लाइन थाना पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया।
पक्की नौकरी के नाम पर ठगी
पुलिस के अनुसार राममेहर ने अपने कार्यालय में स्टाफ से डेढ़ लाख रुपये तक लिए थे। उसने महिला स्टाफ से पहले इंटरव्यू के बहाने संपर्क किया और फिर उन्हें पक्की नौकरी का झांसा देकर उनसे पैसे वसूले। सभी ने उसे रुपये दिए और फिर वह नियमित ड्यूटी पर आने लगे। पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि बोलेरो गाड़ी, जिस पर नीली बत्ती लगी हुई थी, वह राममेहर ने रोहतक के एक युवक से लीज पर ली थी, और इसकी अनुमति भी उसने अवैध तरीके से ली थी।
गेट पर चस्पा किया था फर्जी नोटिस
राममेहर ने कार्यालय के गेट पर एक नोटिस चस्पा किया था, जिसमें लिखा था कि यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी से 10 मिनट लेट आता है, तो उसे उस दिन अवकाश माना जाएगा और उसका वेतन काट लिया जाएगा। यह नोटिस कार्यालय के मेन गेट पर ही चस्पा था, जिससे यह दिखाया गया कि कार्यालय असली था।
योजना का लाभ दिलाने का झांसा
फर्जी कार्यालय हिसार रोड पर स्थित एक तीन मंजिला बिल्डिंग के ऊपर बनाया गया था, जिसे पुलिस ने फर्जी पाया। मौके पर पुलिस को राममेहर का कोई भी पता नहीं चला, केवल महिला स्टाफ मिली। महिलाओं ने पुलिस को बताया कि इस फर्जी कार्यालय में आने वाले लोगों से सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरवाने के नाम पर पैसे लिए जाते थे। जांच अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि आरोपी राममेहर अभी तक पुलिस के सामने पेश नहीं हुआ है, उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस का कहना है कि इस मामले में जांच लगातार जारी है।