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सीडीएलयू को विक सित किया जाएगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में:कुलपति

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अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
चौ. देवी लाल विश्वविद्यालय सिरसा को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। वर्तमान वित्त वर्ष के लिए प्रदेश सरकार ने सीडीएलयू को 45 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। विश्वविद्यालय का कार्य केवल ज्ञान बांटना नहीं होता, बल्कि ज्ञान का सर्जन भी यहां पर होता है। किसी भी विश्वविद्यालय कि पहचान वहां पर चल रही शोध गतिविधियों से होती है इसलिए प्रत्येक विभाग को अपने शैक्षणिक उद्देश्य निर्धारित करके कार्य करना चाहिए।
यह बात सीडीएलयू के कुलपति प्रो. विजय कायत ने शुक्रवार को देर साय: अपने कैंप ऑफिस के क मेटी रूम में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाताओं एवं विभागाध्यक्षों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अप्रैल माह से नए वित्त वर्ष कि शुरूआत होती है और विश्वविद्यालय के विकास के लिए एवं गुणवत्तापरक शोध कार्यों के लिए धन कि कमी को आडे़ नहीं आने दिया जाएगा।
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कुलपति ने कहा कि वर्तमान युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है और विद्यार्थियों को उद्योग जगत कि मांग के अनुसार विद्यार्थियों को तैयार करना शैक्षणिक संस्थानों की नैतिक जिम्मेदारी बनती है। आने वाले समय में सरकारी शिक्षण संस्थानों को निजी व कारपोरेट सेक्टर के संस्थान चुनौती देंगे इसलिए सरकारी संस्थानों को शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ आय के अन्य साधन जुटाने होंगे। प्राध्यापकों कोे शोध प्रोजेक्ट्स के लिए आवेदन करने कि सलाह भी कुलपति ने दी।
कुलपति ने कहा कि प्रत्येक विभाग प्रत्येक शिक्षक को आत्ममंथन करके विभाग के विकास के लिए योजना तैयार करनी चाहिए और विद्यार्थी हित के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। प्रत्येक शिक्षक की अपनी प्रतिभा है और उसकी प्रतिभा एवं रुचि अनुसार विभागाध्यक्ष द्वारा यदि कार्य का आवंटन होता है तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के कौशल को विकसित करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी विश्वविद्यालय स्तर पर किया जाएगा। कुलपति ने कहा कि अच्छा वैज्ञानिक व सामाजिक शोध कार्य करके भी विश्वविद्यालय समाज उत्थान में अपना योगदान दे सकते हैं।
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बैठक के दौरान अनेक वरिष्ठ प्रोफेसरों ने विश्वविद्यालय के विकास के लिए सुझाव दिए और कहा कि शिक्षकों कि भर्ती की जानी चाहिए और विश्वविद्यालय का सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन होना चाहिए। विद्यार्थियों के ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए समय-समय पर व्यक्तित्व विकास से संबंधित कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए। विश्वविद्यालय के अंदर रोजगार मेले लगाए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को रोजगार प्रदान किए जा सकें। शिक्षा पद्धति में भी बदलाव के सुझाव प्रोफेसरों द्वारा दिए गए। इस बैठक में प्रो. अनु शुक्ला, प्रो विक्रम सिंह, प्रो. सुलतान सिंह, प्रो. सुरेश गहलावत, प्रो. दीप्ति धर्माणी, प्रो. दिलबाग सिंह, प्रो. विष्णु भगवान, प्रो. पंकज शर्मा, प्रो. राजकुमार, प्रो. रविंद्र अहलावत, प्रो. मोनिका वर्मा, डॉ. मनोज सिवाच, डॉ. सेवा सिंह बाजवा, डॉ. हरिश, डॉ. अमित सांगवान, डॉ मंजू नेहरा, होरीलाल शर्मा आदि उपस्थित रहे।
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