फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने गीत गाकर और ताली बजाकर सरकार को जगाया

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

सिरसा।
जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को ताला लगाकर अपनी विभिन्न मांगों को पूरा करवाने के लिए लघु सचिवालय के सामने आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर यूनियन का धरना बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। इस दौरान प्रदर्शनकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारे बाजी की। गीत गाकर व तालियां बजाकर सरकार को जागने का प्रयास किया।
पिछले तीन दिनों से आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर यूनियन द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के अंतर्गत जिले की सभी आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर केंद्रों को बंद करके लगातार धरने पर बैठी हुई हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों को सरकार मान नहीं लेती तब तक धरना लगातार इसी प्रकार चलता रहेगा। इस दौरान सभी ने सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने की अध्यक्षता यूनियन की जिला सचिव वीरो रानी ने की। राज्य की उप प्रधान कृष्णा जांगड़ा ने भी प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने कोमल है पर कमजोर नहीं है शक्ति का नाम नारी है... गीत गाकर व तालियां बजाकर सरकार को सचेत किया। सचिव वीरो रानी ने कहा कि आज हमें हमारे हको के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा है और हम हमारा हक लेकर ही रहेंगे। एक तरफ तो सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा लगा रही है लेकिन दूसरी ओर बेटी की आवाज भी नहीं सुन रही है।
विज्ञापन

कई दिनों से लगातार धरने पर बैठी हुईं हैं लेकिन सरकार गूंगी और बहरी बन कर केवल तमाशा देख रही है। सरकार एक ओर तो बेटी बचाने की बात कर रही है वहीं दूसरी ओर बेटी को उनके हकों से वंचित रखा जा रहा है। वीरो रानी ने कहा कि जब तक उनकी मांगे मान नहीं ली जातीं तब तक वे इसी प्रकार धरने पर बैठी रहेंगी और लगातार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार को उनकी मांगे माननी ही पड़ेगी नहीं तो सरकार को पता नहीं कि एक अबला नारी क्या कुछ कर सकती है। समय आने पर एक अबला नारी भयंकर रूप में आ सकती हैं। इसलिए जितना जल्दी हो सके सरकार उनकी मांगों को मान ले और तुरंत प्रभाव से उन्हें लागू भी करे। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को अपने देश की बेटियों के बारे में सोचना चाहिए जो कि वह नहीं कर रही है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि यह आर पार की लड़ाई है और इस लड़ाई में जीत हासिल करने के लिए सभी को मिलजुल कर आगे बढ़ना होगा। आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों के धरने पर सर्व कर्मचारी संघ के जिला प्रधान मदनलाल खोथ व राजेश कुमार, मैकेनिकल यूनियन के प्रधान कृपा शंकर त्रिपाठी, सीटू महासचिव विजय ढूकड़ा, किसान सभा से गुरदित्ता, आंगनबाड़ी यूनियन सिरसा ब्लॉक प्रधान शकुंतला, ऐलनाबाद से प्रमिला, चोपटा से माया रानी, रानियां से प्रेमा, डबवाली से महिंद्र कौर मटदादू, एसएफआई नेता विनोद कुमार गिल, सुरजीत, रेनु ठाकुर, निशा ने भी संबोधित किया।
ये हैं मुख्य मांगें
1. आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर को तीसरे और चौथे दर्जे का सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए ऐसा न करने तक 18000 रुपये मानदेय दिया जाए।
2. 14 जून 2017 को धरने पर पहुंचे कर्मियों पर रोक लगा कर मान सम्मान को ठेस पहुंचाने का कहा गया जिसे तुरंत प्रभाव से खारिज किया जाए।
3. शहरी केंद्रों का किराया बिना सर्वे के 6000 और गांवों का 3000 रुपये किया जाए।
4. गर्मी और सर्दी की छुट्टियां सरकारी स्कूलों के अनुसार की जाए और एसएनवी क्वालिटी के अनुसार केंद्रों तक पहुंचाई जाए।
5. एसएनपी केंद्रों में मदर ग्रुप से ही बनवाया जाए।
6. आंगनबाड़ी केंद्रों में सरकार द्वारा हाजिरी सुनिश्चित की जाए।
7. निजीकरण पर रोक लगे व विभाग की तरक्की के लिए बजट का प्रावधान किया जाए।
8. आंगनबाड़ी हेल्परों की वर्दी का रंग बदला जाए।
9. आईसीडीएम में डिब्बा बंद भोजन और प्रत्यक्ष-सशक्त कैश ट्रांसफर को लागू करने के तुरंत रोक लगाई जाए।
10. 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुसार वर्करस को न्यूनतम वेतन व सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
11. मिनी केंद्रों का वेतन बराबर हो काम व मानदेय बराबर किया जाए। आंगनबाड़ी वर्कर के पद का गांव व शहर को समायोजन लागू हो।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें