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ब जट: शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर दिया जाए ध्यान

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अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले बजट को लेकर हर वर्ग के लोग आस लगाए बैठे हैं। शिक्षाविद और स्वास्थ्य अधिकारियों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च की जाने वाली राशि बढ़ाने की काफी उम्मीदें हैं। लगातार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के गिरते स्तर को ऊंचा उठाने की कोई जुगत निकल आए तो ठीक ही होगा। महंगी दवाइयों की मार से त्रस्त लोग बजट पर निगाहें गड़ाए हुए हैं। शिक्षाविदों की मांग है कि आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर पांच लाख की जाए और हर स्कूल में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं। पर यह तो बजट ही बताएगा कि सरकार किस को क्या-क्या देती है।

सभी वर्गों के लिए लाभकारी हो बजट
बजट में हर वर्ग के लिए स्वास्थ्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो ऐसा प्रावधान होना चाहिए। इसके साथ-साथ सरकार ने जो जन औषधि केंद्र खोले हैं उसी तर्ज पर आयुर्वेदिक दवाइयों के केंद्र भी खोले जाएं, ताकि लोगों को आयुर्वेदिक दवाइयां भी उचित दाम और आसानी से मिल सके। ग्रामीण क्षेत्रों में अनुभवी चिकित्सकों के साथ-साथ जरूरत की दवाइयां मिलने का प्रावधान करना जरूरी है। गांवों में आबादी के अनुसार स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था होना भी जरूरी है। बजट सभी वर्गों के लिए लाभकारी होना ही चाहिए।
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-डॉ. पवन शर्मा आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी।


आयकर छूट की सीमा बढ़ाई जाए
बजट में आयकर छूट की सीमा 2.50 लाख से बढ़ाकर पांच लाख से ऊपर की जाए, क्योंकि एक अध्यापक साल में डेढ़ माह का वेतन टेक्स के रूप में दे देता है। नए स्कूल और कॉलेज खोलने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रावधान कराना जरूरी है। स्कूलों कॉलेजों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता में होना जरूरी है। सरकार को सेविंग की सीमा भी बढ़ानी चाहिए। बजट में सभी के लिए आवश्यक सुविधाओं पर खर्च की राशी बढ़ानी चाहिए।
-गुरदीप सैनी, प्रदेश मीडिया प्रभारी स्कूल लक्चरार एसोशिएशन हरियाणा।


सेविंग की सीमा बढ़ाकर दो लाख की जाए
बजट में आयकर स्लैब प्रणाली में परिवर्तन करना चाहिए। स्कूलों की ग्रांट बढ़ाई जानी चाहिए। सेविंग की सीमा डेढ़ लाख से बढ़ाकर दो लाख करनी चाहिए। स्कूलों कॉलेजों में शिक्षा के ग्रांट बढ़ाकर आवश्यक सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा पर जोर देना जरूरी है।
-भूप सिंह सिहाग, शिक्षाविद।


हर पांच किमी पर हो बारहवीं का स्कूल
बजट में निजी स्कूलों की समस्याओं के समाधान का प्रावधान भी होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में पांच किलोमीटर पर 10+2 के स्कूल होने चाहिए, जिनमें सभी संकाय की पढ़ाई की सुविधाएं होनी चाहिए। अनुभवी शिक्षक स्टाफ के साथ-साथ स्थायी अध्यापक लगाने का प्रावधान होना चाहिए। शिक्षा के अधिकार और धारा 134 के तहत निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के खर्च की राशि निजी स्कूलों में हर वर्ष देनी चाहिए। स्कूलों में पूरा स्टाफ, पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री और खेलों की पूरी व्यवस्था करनी चाहिए।
-शिक्षाविद संजीव पूनिया, प्राचार्य एनसीएएम स्कूल कागदाना।


शिक्षा के लिए बजट राशि बढ़ाई जाए
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आबादी के अनुसार स्कूलों की व्यवस्था करने का प्रावधान होना चाहिए। सरकार शिक्षा पर पहले ही काफी राशि खर्च कर रही है फिर भी शिक्षा के लिए खर्च की राशि बढ़ाकर मूल्यवान शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। बजट में मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर शिक्षा प्रणाली में सुधार करना चाहिए। स्कूलों में दूर दराज के बच्चों के रहने की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। स्कूलों में शिक्षा के साथ साथ खेलों पर ध्यान में रखकर बजट में प्रावधान करने चाहिए।
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-रमेश कुमार, प्राचार्य आरोही मॉडल स्कूल नाथूसरी कलां।


आयकर सीमा में छूट की सीमा हो पांच लाख
मौजूदा समय में आयकर छूट की सीमा में बढ़ोतरी की जरूरत है। सरकारी कर्मचारी टैक्स देता है और सेविंग भी नहीं कर पाता ऐसे में सेविंग सीमा को दो लाख रुपये किया जाए, स्कूलों को अपग्रेड किया जाए कॉलेजों की संख्या बढ़ाई जाए, क्योंकि हर साल हजारों छात्र प्रवेश पाने से वंचित रह जाते हैं। स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का प्रबंध किया जाए।
-शमशेर शर्मा, प्राध्यापक।
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