फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिरसा के किसानों ने भी शुरू किया धरना

विज्ञापन
विज्ञापन
सिरसा के किसानों ने भी शुरू किया धरना
विज्ञापन

मांग पूरी होने तक धरना जारी रहेगा
सिरसा।
स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने तथा किसानों के कर्जे माफ करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की तर्ज पर सोमवार से स्वामीनाथन संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। आंदोलन के प्रथम चरण में किसानों ने सोमवार को लघु सचिवालय में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। लघु सचिवालय में विभिन्न गांवों के किसान धरने पर आ डटे हैं।
धरने पर बैठे स्वामीनाथन संघर्ष समिति के अध्यक्ष विकल पचार, जसकरण सिंह, नेकीराम, पृथ्वी सिंह, यश भांभू, कृष्ण ढाका, प्रकाश सिहाग, हरफूल सिंह, सुरजीत सिंह, राजकुमार, राजेंद्र, गुरदित्ता, रणधीर जोधकां, भूप सिंह, गुरटेक सिंह, सोहन सिंह, महेंद्र शर्मा आदि ने कहा कि केंद्र व प्रदेश की सरकार ने चुनाव दौरान किसानों के कर्जे माफ करने, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने, फसल की लागत पर लाभकारी समर्थन मूल्य देने के वादे किए थे, लेकिन तीन साल के कार्यकाल में अभी तक किसान हित में कोई निर्णय लागू नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि किसान हित के बजाय सरकार लगातार किसान विरोधी निर्णय ले रही है, जिसके तहत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की है। इस योजना में पूरे गांव को एक इकाई माना गया है, जिसका मतलब है कि यदि पूरे गांव की फसल प्रकृति की मार से नष्ट होगी तभी उसका मुआवजा मिलेगा। अर्थात यदि गांव के कुछ किसानों की फसलें ही खराब होती हैं और अन्य किसानों की फसलों को कोई नुकसान नहीं होता तो उन पीड़ितों किसानों को नष्ट हुई फसल का कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि ऐसी बीमा योजना से किसानों को क्या फायदा होगा, इसका स्पष्टीकरण सरकार को देना चाहिए। उन्होंने बताया कि देश भर के किसान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने व कर्ज माफी के लिए लगातार धरने-प्रदर्शन व आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। इसी वजह से महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में किसानों ने आंदोलन शुरू किया। अब हरियाणा में भी किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। यदि सरकार ने उनकी मांगों की ओर जल्द ही ध्यान नहीं दिया तो हरियाणा के किसान भी आंदोलन को उग्र रूप देने को मजबूर हो जाएंगे। धरने में भारतीय किसान यूनियन, किसान सभा, किसान जागृति मंच ने भी शामिल होकर किसानों की मांगों का समर्थन किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें