रात साढे़ नौ बजे नेशनल हाईवे नौ पर गांव खैरका के पास घग्गर पुल में आईं दरारें, प्रशासन ने किया रूट डाइवर्ट
सिरसा। रात साढे़ नौ बजे गांव खैरकां के पास नेशनल हाईवे नौ के पुल में दरारें आ गई। सूचना मिलते ही सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता और उनकी टीमें मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद प्रशासन ने पुल से रूट डाइवर्ट कराया।
घग्गर में वीरवार को जलस्तर 15 हजार क्यूसिक तक पहुंच गया है। बुधवार रात साढ़े नौ बजे तक यह दस हजार क्यूसिक था। शाम पांच बजे सिंचाई विभाग ने ओटू डैम से राजस्थान साइफन की तरफ दो ओर गेट खोल दिए, जिससे उतना ही पानी आगे निकल रहा है। राजस्थान साइफन में भी जलस्तर 13 हजार 600 क्यूसिक होने पर किसान धान ही हरी फसल को काटने पर मजबूर हो रहे हैं। किसान घग्गर में पानी की ट्यूब डालकर धान की मुंजर काट रहे हैं और बांध पर थ्रेशर से निकाल रहे हैं। पनिहारी गांव के पास घग्गर में लीकेज होने के कारण फसलें डूब रही है। दूसरी ओर संभावित बाढ़ की आशंका के चलते सिंचाई विभाग को ओटू डैम की मरम्मत की अब याद आई है। गांव पनिहारी, मुसाहिबवाला, फरवाई कलां, बुर्जकर्मगढ़ के पास ठीकरी पहरा शुरू कर दिया है। वहीं डीएसपी हैडक्वार्टर रविंद्र सिंवर ने सदर थाना क्षेत्रों में जाकर ग्रामीणों से मुलाकात की और तटबंधों पर ठीकरी पहरा लगाने के निर्देश दिए। शाम को गुहला चीका के पास करीब 1500 क्यूसिक पानी में कमी आई है। गुहला चीका में रात आठ बजे तक 45 हजार क्यूसिक से ज्यादा पानी दर्ज किया गया। हालांकि सिंचाई विभाग का कहना है कि पीछे से जलस्तर कम होने का असर अभी इतना जल्दी दिखाई नहीं देगा।
25 सितंबर को गेट नंबर आठ की टूटी आयरन सीलिंग वायर नहीं डाल सका सिंचाई विभाग
घग्गर के बढ़ते जलस्तर से किसान और लोग चिंतित है। लेकिन सिंचाई विभाग ओटू डैम पर लोहे के गेटों पर आयरन सीलिंग वायर ही नहीं डाल सका। गुरुवार को सिंचाई विभाग के कर्मचारी गेट नंबर दस पर आयरन सीलिंग वायर को डाल रहे थे। लेकिन आठ नंबर गेट और नौ नंबर गेट की अभी भी आयरन सीलिंग वायर नहीं डाली जा सकी। 25 सितंबर को जब जलस्तर बढ़ा तो सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने पानी राजस्थान साइफन में छोडने के लिए गेट खोलने का प्रयास किया आयरन सीलिंग वायर टूट गई। गेट एक ओर से टेढ़ा हो गया। जो कि अभी भी टेढ़ा है। सिंचाई विभाग 26 सितंबर से इनकी मरम्मत करने में लगा है। जबकि पहले सिंचाई विभाग ने बाढ़ को ध्यान में रखकर इसकी मरम्मत ही नहीं की थी। ऐसे में सिंचाई विभाग की लापरवाही का खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। सिंचाई विभाग ओटू डैम के किनारे लगी सात स्ट्रीट लाइट्स को भी ठीक नहीं करवा पाया। ये स्ट्रीट लाइट्स आज तक जली ही नहीं। 26 सितंबर की रात को बिजली विभाग ने लोहे के गेट पर रोशनी का अस्थाई प्रबंध करके दिया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिंचाई विभाग घग्गर में संभावित बाढ़ को लेकर सचेत नहीं है।
अब 300 रुपये मजदूरी देकर निकलवा रहा है जलकुंभी
पानी के बहाव में जलकुंभी रूकावट डाल रही है। यह जलकुंभी काफी समय से ओटू वियर में है। लेकिन सिंचाई विभाग ने पहले कभी निकलवाने का प्रयास नहीं किया। अब सिंचाई विभाग मजूदरों की सहायता से निकलवा रहा है। सिंचाई विभाग ने प्रति मजदूर 300 रुपये दिहाड़ी का वायदा किया है। मजदूरों की कमी के चलते ही राजस्थान से एक ओर जेसीबी मशीन मंगवाई गई है। गुरुवार को राजस्थान साइफन के दो ओर गेट खोलने से इस जलकुंभी के जीवननगर ऐलनाबाद मार्ग पर बने पुल पर फंसने के आसार है। राजस्थान साइफन से पानी हनुमानगढ़ के भद्र काली पुल के ऊपर से बह रहा है।
टायर की ट्यूब में हवा भरकर, उसके सहारे धान की फसल काट रहे हैं किसान
राजस्थान साइफन के साथ लगते किसान महला सिंह ने बताया कि नदी में उनकी 20 एकड़ 1509 धान एक सप्ताह में तैयार हो जानी थी। लेकिन जलस्तर बढ़ने पर धान की फसल डूब रही है। वीरवार को उन्होंने टयूब में हवा भरकर, उसके सहारे तीन एकड़ धान काटी है। अगर पानी का स्तर ओर बढ़ता है तो बाकी धान नहीं काटी जा सकेगी। मजबूरी में सात दिन पहले धान काटनी पड़ी है। किसान अमरीक सिंह, मनदीप सिंह राडिया मलकीत सिंह, पूर्ण सिंह, बिल्लू सिंह ने बताया कि उन लोगों का भी धान पक गया है। अब पानी भर जाने के कारण खराब होने की चिंता है, ऐसे में उन्हें भी ट्यूब के सहाने ही पानी में खड़ी हरे धान की कटाई करनी पड़ेगी। धान पूरी तरह से सूखा न होने के कारण थ्रेसर के माध्यम से साथ के साथ ही निकाला जा रहा है। अगर इसे सूखने के लिए रखेंगे तो खराब होकर काला हो जाएगा।
कोट्स
लोहे के गेट को मरम्मत का काम चल रहा है। तटबंधों की मरम्मत के लिए पहले कोई बजट नहीं आता। स्थिति कंट्रोल में है। गुहला चीका में जलस्तर में थोड़ी कमी आई है। अभी वहां पर 45 हजार क्यूसिक जलस्तर है।
एनके भोला, कार्यकारी अभियंता, घग्गर कैनाल, सिंचाई विभाग।
जलस्तर की ताजा स्थिति
गुहलाचीका हेड : 45000 क्यूसिक
खनौरी हेड : 12732 क्यूसिक
चांदपुर हेड : 11500 क्यूसिक
ओटू हैड : 15000 क्यूसिक
राजस्थान साईफन : 13600 क्यूसिक
पानी दर्ज किया गया है।
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