संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। जिले में विजयदशमी का त्योहार 12 अक्टूबर धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए शहर की संस्थाओं और ट्रस्ट ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार दशहरा ग्राउंड में 70-70 फुट के रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। बठिंडा से पहुंचे कारीगर इन पुतले को बनाने में जुटे हुए हैं। पुतला में आतिशबाजी को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है, जो आकर्षण का केंद्र रहेगी।
श्री रामा क्लब चैरिटेलब ट्रस्ट के प्रधान अश्वनी बठला एवं महासचिव गुलशन वधवा ने बताया कि रामलीला महोत्सव तैयारियां जारी हैं। 11 अक्टूबर की शाम तक पुतलों को दशहरा ग्राउंड में खड़ा किया जाएगा। इसके बाद उनमें आतिशबाजी लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि पुतलों में इस चीज का ध्यान रखा गया है कि अग्निभेंट करने के बाद इनमें धीरे धीरे आग लगे और शानदार आतिशबाजी हो। तीनों ही पुतलों में पहले मुकुट की मणि जलेगी, उसके बाद कंठी और बाद में पूरा पुतला जलेगा। रावण व कुंभकर्ण के चेहरे घूमेंगे। उन्होंने कहा कि रामलीला का सात्विक व पवित्र भाव से मंचन किया जा रहा है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। रामलीला का फेसबुक व यू ट्यूब चैनल पर लाइव प्रसारण किया जा रहा है।
शहर में निकाली जाएगी भव्य शोभायात्रा
प्रधान अश्वनी बठला एवं महासचिव गुलशन वधवा ने बताया कि दशहरा महोत्सव के अवसर पर 12 अक्टूबर को प्रात: 11 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो जनता भवन रोड स्थित दशहरा ग्राउंड से रवाना होगी। यह शोभायात्रा अनाजमंडी से होती हुई शिव चौक, सुरतगढ़िया बाजार, घंटाघर चौक, भगत सिंह चौक, रोड़ी बाजार, आर्य समाज रोड से होते हुए परशुराम चौक, बेगू रोड होते हुए कंगनपुर पहुंचेगी। वहां से दशहरा ग्राउंड जाएगी। दशहरा ग्राउंड में राम व रावण की सेना के बीच युद्ध होगा। इसके बाद बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों को अग्निभेंट किया जाएगा।
दादा-परदादा भी करते थे पुतले बनाने का काम, इस हुनर को बनाया रोजगार का साधन : कारीगर गुलशन
बठिंडा निवासी कारीगर गुलशन कुमार ने बताया कि वे पीढ़ी दर पीढ़ी से पुतले बनाने का काम कर रहे हैं। उनके दादा-परदादा यही काम करते थे। इसी हुनर को उन्होंने अपने रोजगार का साधन बनाया। उन्होंने बताया कि रामा क्लब द्वारा तैयार करवाए जा रहे रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों के निर्माण में वे 15 दिनों से लगे हुए हैं तथा अब इन्हें अंतिम रूप दिया जा रहा है। कारीगर गुलशन ने बताया कि रामलीला के सीजन में उनका पूरा परिवार पुतले बनाने में लग जाता है। पुतले तैयार होने के बाद इन्हें अलग-अलग हिस्सों में दशहरा ग्राउंड तक ले जाया जाता है और इन्हें खड़ा किया जाता है। कारीगर गुलशन कुमार ने बताया कि रावण, कुंभकर्ण, मेघनाद के पुतले जलते देखकर उन्हें खुशी होती है कि उनकी कला को देखने के लिए हजारों लोग आते हैं।