ओढां। सरकार के तमाम दावों के बावजूद भी किसानों को सरसों बेचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओढां की अनाज मंडी में शुक्रवार को सरसों बेचने आए किसानों की ट्रैक्टर-ट्रालियों कई किलोमीटर तक लंबी लाइनें लग गई। सूचना के बाद अखिल भारतीय स्वामीनाथन संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकल पचार किसानों के बीच पहुंचे। इस अवसर पर किसानों ने कहा कि सरकार एक तरफ तो किसान हितैषी होने का दम भर रही है तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए झिल्लत झेलनी पड़ रही है। किसान शुक्रवार देर सांय तक मंडी के बाहर हाईवे व घुंकावाली-नुहियांवाली रोड पर बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रालियां लेकर बैठे रहे।
दरअसल सरकार के निर्देशानुसार 9 से 11 मई तक उन किसानों को 3 दिन दिए गए थे जो सरसों बेचने से वंचित रह गए थे। जिसके चलते नुहियांवाली, बनवाला, ओढां, मलिकपुरा, जंडवाला जटान, चोरमार, घुंकावाली सहित अनेक गांवों के किसान वीरवार मध्य रात्रि व शुक्रवार अलसुबह ट्रैक्टर-ट्रालियों में सरसों भरकर मंडी के गेट पर पहुंच गए। किसानों की भीड़ करीब 9 बजे तक बदल गई। मंडी का गेट न खुलने के कारण सालमखेड़ा नहर पुल से लेकर मंडी के गेट तो वहीं घुंकावाली नुहियांवाली रोड पर करीब डेढ़ किलोमीटर तक लंबी ट्रैक्टर-ट्रालियों की लाइन लग गई। जिसके चलते यातायात व्यवस्था भी बाधित हुई। सूचना के बाद ओढां पुलिस ने मौके पर पहुंचकर यातायात व्यवस्था सुचारु करवाई। पुलिस के कर्मचारी दिनभर इस व्यवस्था में लगे रहे। नुहियांवाली के किसान रमेश कुमार, बंसीलाल, जीतराम, पुसाराम, मलिकपुरा के जगदेव सिंह, मंजीत सिंह, जंडवाला के बलवीर सिंह व सुरजीत सिंह एवं बनवाला के सुखविंद्र जाखड़ ने बताया कि वे रात्रि व अलसुबह ही सरसों लेकर यहां आ गए थे। ताकि समय रहते उनकी फसल का तोल हो सके। लेकिन मंडी में तोल की व्यवस्था तो दूर मंडी का गेट खोलने भी कोई कर्मचारी नहीं आया। उन्होंने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि देश का पेट पालने वाले किसान को मंडियों में अपनी खून-पसीने की कमाई बेचने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ बेइंसाफी हो रही है। सूचना के बाद किसान नेता विकल पचार मौके पर पहुुंचे। उन्होंने किसानों की बात सुनकर उच्चाधिकारियों से फोन पर बातचीत की। उन्होंने फसल खरीद मामले में सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार ने सरसों की ऑनलाइन खरीद व रोस्टर प्लान तो बना दिया। लेकिन मंडियों में व्यवस्था नहीं बन पाई। पचार ने खरीद एजेंसी के अधिकारियों से बातचीत करने उपरांत किसानों को आश्वस्त किया कि उनके साथ किसी तरह की ज्यादती नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जो किसान 9 मई को सरसों लेकर आए थे सबसे पहले उनका तोल करवाया जाए।
मंडी में न तो बारदाना है और न ही उठान आदि की उचित व्यवस्था।
जब से खरीद शुरू हुई है तब से लेकर महज दो बार ही राशि आई है। मंडी में न ही तो खरीद हो रही और न ही तोल की व्यवस्था। हम इस व्यवस्था से बेहद परेशानी है।
-महेंद्र जैन, प्रधान (आढ़ती एसोसिएशन कालांवाली)
बॉक्स :- मंडी में तीन जगह सरकारी व तीन जगह निजी तोल चल रहा है। लेकिन किसान सरसों काफी संख्या में लेकर आए हुए हैं। हमनें वीरवार को 61 ट्रालियां पास की थी। जिनमेें से अभी तक 31 ही तुल पाई हैं। अव्यवस्था का कारण ये है कि आढ़ती गेहूं तोल में लगे हुए हैं और दूसरा सरकारी तोल काफी कम है।
-ओमप्रकाश नेहरा, परचेजर।