भले ही सरकार ने पंपों, अस्पतालों और अन्य जरूरी जगहों पर 500 और 1000 के नोट चलाने की इजाजत दी है, लेकिन यहां पर आम लोगों के साथ धक्काशाही हो रही है। आप 200 का तेल डलवाना चाहते हैं तो आपको दो सौ रुपये खुले देने होंगे और पांच सौ का नोट देने पर आपको पांच सौ का ही तेल डलवाने के लिए बाध्य किया जाता है। ऐेसे में पंप संचालकों के पास आने वाले 10, 20, 50, 100 और दो हजार के नोट तो ग्राहकों के पास वापस जा ही नहीं रहे। यही स्थिति अस्पतालों में है।
डॉक्टर अपनी इनकम कम दिखाने के लिए 500 के नोट लेकर आफत मोल लेेने से कतरा रहे हैं। आम लोगों की तकलीफ कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है। दिन-प्रतिदिन 500 और 1000 के नोटों को लेने से हर स्थान पर इन्कार किया जाने लगा है।
मेडिकल स्टोर वाले भी नोट लेने से मना करते देखे गए हैं। वो खुली राशि न होने की बात कहकर ग्राहक को टाल रहे हैं। एक मेडिकल स्टोर पर सौ-सौ के सौ ग्राहक भुगतने के बाद भी एक पांच सौ नोट वाले ग्राहक को दवाई देने से मना किया जा रहा है।
आज कई पेट्रोल पंपों पर यही स्थिति देखने को मिली। सभी को 500 या 1000 का तेल ही दिया जा रहा था। ग्राहक के आग्रह करने पर भी उसके वाहन में कम राशि का तेल नहीं डाला गया। ऐसे में पंप संचालक तेल की बिक्री के केवल 500 और 1000 वाले नोट ही बैंकों में जमा कर रहे हैं। उनके पास रोजाना दो हजार, 100, 50, 20 और 10 के नोटों की जो सेल हो रही है, वो राशि कहां जा रही, यह भी प्रश्नचिह्न है। कुछ अस्पतालों में अब भी पुराने नोट लिए जा रहे हैं।
हरबंस सिंह ने बताया कि उसकी पत्नी को चिकनगुनिया हो गया था और बरनाला रोड स्थित एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाया था। जब सोमवार को छुट्टी मिली तो मेरे पास सभी नोट पांच-पांच सौ के थे और डॉक्टर ने तुरंत इसे अस्वीकार किया था।
ऐसे ही एक मामला एक निजी अस्पताल में मरीज का ऑपरेशन हुआ था और डॉक्टर ने बंद हो चुकी करेंसी नहीं ली, जिस कारण उन्हें मरीज को एक दिन अस्पताल में छुट्टी मिलने के बाद तक रखा और जब नोटों का प्रबंध हुआ, तब जाकर वे अस्पताल से जा सके।
लोगों की परेशानियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने सोमवार को सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए फिर निर्देश जारी किए थे कि कहीं भी सरकारी निर्देशों की अवहेलना की गई तो कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामले की सूचना कोई भी व्यक्ति प्रशासन को दे सकता है।
मेडिकल स्टोर संचालकों ने किए हाथ खड़े
मेडिसन के हॉलसेलर ने बताया कि अधिकतर छोटे मेडिकल स्टोर संचालक बडेे़ नोट लेने से इंकार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिनके करंट खाते खुले हुए हैं, उन्हें कोई परेशानी नहीं है। नर्सिंग होम के भीतर स्थिति मेडिकल स्टोर संचालक बडे़ नोट ले रहे है, पर मरीजों की पर्ची और उसकी आईडी लेने को कहा गया है।
अधिकतर स्टोर पर 1000 और 500 के नोट लेने में आनाकानी की जा रही है। दूसरे विकल्प के रूप में कुछ स्टोर संचालक हजार रुपये से ऊपर चेक भी ले रहे हैं।
करेंसी के लिए मारामारी बरकरार
करंसी के लिए लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। बैंकों में लगी लंबी लाइनों में कोई कमी नहीं आ रही है। मंगलवार को एक दिन की छुट्टी के बाद जैसे ही बैंक खुले तो लोग नोट जमा करवाने और राशि बदलने के लिए टूट पड़े।
बैंकों में और एटीएम में लंबी लाइनें शाम तक जारी रही। मंगलवार को लोग बैंक खुलने से पहले ही बैंकों के समक्ष कतारों में खड़े हो गए और अपनी बारी का इंतजार करने लगे। बैंकों में नोट जमा करने और करेंसी बदलने की प्रक्रिया पूरी तरह से शांतिपूर्वक रही।
पुलिस बल हर बैंक और एटीएम के पास तैनात है। रोजाना लगने वाली लाइनों को देखकर हर किसी के जहन में सवाल उठता है कि जब आम लोगों के पास इतने नोट हैं कि जमा होने वाली लाइन कम ही नहीं हो रही तो धनी लोगों के पास कितनी राशि होगी।
लोग अपने जरूरी कामकाज छोड़कर बैंकों में नोट जमा करने और नोट बदलने में लगे हुए हैं। बैंक अधिकारियों का मानना है कि अगले सप्ताह तक स्थिति सामान्य हो जाएगी। हर रोज करोड़ों रुपये जमा हो रहे हैं। जिले के 31 बैंक और 232 शाखाओं सभी में स्थिति एक जैसी बनी हुई है। इसके अलावा जिले में 150 एटीएम हैं, जहां से लोग राशि निकलवा सकते हैं।
आज भी कुछ एटीएम रहे बंद
बैंकों द्वारा एटीएम सेवा शुरू करने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन शहर के बंद पड़े कई एटीएम इन दावों की पोल खोल रहे हैं। काफी एटीएम दिन में शुरू तो हुए, लेकिन जैसे ही उनमें राशि समाप्त हुई तो फिर से वही स्थिति बन गई। ऐसे में तुरंत राशि दोबारा से डालने की कोई त्वरित कार्रवाई व्यवस्था दिखाई नहीं दी।
मंगलवार को अधिकतर एटीएम शुरू तो हुए, लेकिन यहां से राशि निकालने वालों की लंबी लाइनें लग गईं। कुछ एटीएम में दोपहर होने तक राशि खत्म हो गई, जिसके बाद राशि नहीं डाली गई।
ये भी है समस्या
बैंकों में भीड़ को कम करने के लिए लाइनें अलग-अलग नहीं होना भी समस्या को बढ़ा रहा है। जिन लोगों ने पांच सौ और एक हजार के नोट जमा करने हैं, उनकी लाइन अलग नहीं है, बल्कि उसी लाइन में उन्हें लगना पड़ रहा है, जिसमें लोग नोट बदलवाने के लिए खड़े हैं। ऐसी स्थिति में उन लोगों को भारी परेशानी हो रही है, जिन्होंने अपने काम-काज के लिए रुटीन में बैंकिंग करवानी है।
जिन लोगों के पास न तो बंद होने वाले नोट हैं और न ही उन्हें नोट बदलवाने हैं, उनको बेवजह परेशानी हो रही है। अब तक रुटीन में बैंकिंग करवाने वालों के लिए अलग से लाइनों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। बताया जा रहा है कि शीघ्र ही पांच के नए नोट बैंकों मेें आ जाएंगे, जिसके बाद स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।
बेटियों की शादियों के लिए नहीं मिल रहे नए नोट
बेटियों की शादियों के लिए बंद हो चुकी करेंसी आफत बनी हुई हैं। लोग शादियों के लिए जगह-जगह पर खर्च होने वाली राशि के लिए भटक रहे हैं। हिसार रोड निवासी महेंद्र पाल ने बताया कि उसकी बेटी की शादी 25 नवंबर को है और अब तक करेंसी हाथ में नहीं है, ऐसे में खरीदारी नहीं कर पाया हूं।
सिरसा निवासी अमर सिंह ने बताया कि उसकी बेटी की शादी 11 दिसंबर को, लेकिन करेंसी बंद होने के बाद उसकी चिंता बढ़ गई है। भूप सिंह बैनीवाल ने बताया कि उसके बेटे की शादी 16 नवंबर को है और बड़ी मुश्किल से व्यवस्था की है। सभी सामान लेने वालों को उधार से मनाया है।
24 तक पुराने नोटों से अदा करें पानी के बिल
जन स्वास्थ्य विभाग ने भी उपभोक्ताओं को 500 व 1000 रुपये के नोट से पानी और सीवरेज के बिल अदायगी की ऑफर दी है। जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग उपमंडल नंबर 3 के एसडीई लीलाधर बांसल ने बताया कि सरकार की हिदायत अनुसार उपभोक्ता 500 और 1000 रुपये के नोटों से पानी के बिल अदा कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि उपभोक्ता 24 नवंबर तक पुराने नोटों से बिल की अदायगी कर सकते हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं से इस स्कीम का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि विभाग द्वारा इस अवधि के बाद पानी के बिलों के बकायेदारों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा और बिल अदायगी न करने वालों के कनेक्शन काटे जाएंगे।