डबवाली। डबवाली में फर्जी एनडीसी का मामला सामने आया है। इस मामले का खुलासा तहसील कार्यालय और जिला नगर योजनाकार विभाग(डीटीपी) ने किया है। इसमें नगर परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध पाई गई है और इस मामले में तहसीलदार ने 4 सदस्यीय कमेटी गठित कर जांच के आदेश दे दिए हैं। जानकारी के अनुसार 24 ऐसी रजिस्ट्री तहसील कार्यालय ने पकड़ी है, जो अवैध क्षेत्र की है।
नगर परिषद ने जिनको अनापत्ति प्रमाण पत्र देकर वैध दर्शाया हुआ है। छह माह में करवाई गई इन रजिस्ट्री में बड़े स्तर पर धांधली हुई है और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया है। सूत्रों के अनुसार इन कॉलोनियों में रजिस्ट्री मामले में बड़े-बड़े लोगों का नाम भी सामने आ सकता है।
बता दें कि जिला नगर योजनाकार विभाग में ऑडिट किया गया था। ऑडिट के दौरान बड़े स्तर पर अवैध कॉलोनियों में रजिस्ट्री होकर निर्माण कार्य होना सामने आए। ऑडिट में चौंकाने वाले तथ्य सामने के आने के बाद जिला नगर योजनाकार विभाग ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। इस संबंध में डबवाली, सिरसा, कालांवाली, ऐलनाबाद तहसील कार्यालय रिपोर्ट भेजी गई है और जांच आरंभ है। डबवाली में तहसीलदार सुनील कुमार एक-एक रजिस्ट्री की स्वयं गंभीरता से जांच कर रहे हैं। ताकि मामले में दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और तहसील कार्यालय के संलिप्त कर्मचारियों पर कार्रवाई अमल में लाई जा सके।
अवैध एरिया का अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी होना गंभीर मामला
जानकारी के अनुसार फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने मामले की गहनता से जांच हो रही है। स्वयं प्रथम अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के नगर परिषद के आधार को जांचा जा रहा है। उक्त अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ साथ कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए थे। तहसील कार्यालय में जब रजिस्ट्री करवाई गई थी, तब रजिस्ट्री करवाने के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज जमा करवाए गए थे। तहसीलदार कार्यालय में दस्तावेजों की जांच करने वाले कर्मचारी ने किस स्तर पर लापरवाही बरती है। नगर परिषद और तहसील कार्यालय दोनों स्तर पर हुई अनियमितताओं की जांच हो रही है। इसमें भ्रष्टाचार किस स्तर पर हुआ है। इसको लेकर भी टीम जांच कर रही है।
कार्यकारी अधिकारी से लेकर क्लर्क तक की होगी जांच
शहरी स्थानीय निकाय विभाग द्वारा ऑन लाइन पोर्टल पर वैध और अवैध सीमाओं को नक्शे पर दर्शाया हुआ है। इसके साथ साथ लाल डोरे की प्रॉपर्टी अलग से दर्शाई गई है। इतना ही नहीं, वैध हुई नई कॉलोनियों के खसरा नंबर, मिन आदि सभी की सूची जारी की गई है। हैरानी की बात है कि इन्हें वैध करवाने के लिए खसरा नंबर आदि की सूची भी नगर परिषद ने ही भेजी थी। जो टैक्स ब्रांच और तकनीकी ब्रांच सभी के पास है। इसके बाद भी अनापत्ति प्रमाण पत्र गलत जारी करने पर क्लर्क, तकनीकी अधिकारी, सचिव और कार्यकारी अधिकारी सभी की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आती है। हालांकि डबवाली से श्रवण कुमार नामक क्लर्क को ऐसे ही मामले में निलंबित कर दिया गया है।
दो सप्ताह में कमेटी करेगी जांच
अनापत्ति प्रमाण पत्र मामले में चार सदस्यीय कमेटी को दो सप्ताह में अपनी रिपोर्ट एसडीएम को सौंपनी है। जांच के दौरान फर्जी तरीके से दस्तावेजों व रजिस्ट्री आदि को भी एडिट करने का शक जताया जा रहा है। अनापत्ति प्रमाण पत्र ऑन लाइन होने के कारण उसी आधार पर टोकन उठता है। ऐसे में उस स्तर पर जांच अलग तरह से की जा रही है। वहीं, दस्तावेज फर्जी है या सही। इसकी जांच अलग से हो रही है। अब दो सप्ताह में जांच के बाद ही इस सारे मामले का खुलासा होगा और मामले में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है
डीटीपी की रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू की गई है। छह माह में अवैध काॅलोनियों में 24 रजिस्ट्री होने का मामला संज्ञान में आया है। हमारी चार सदस्यीय टीम जांच कर रही है। जांच के बाद एसडीएम को रिपोर्ट दी जाएगी।
-सुनील कुमार, तहसीलदार, डबवाली