सुबह के दस बजे शहर के जेजे कॉलोनी स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल स्कूल में करीब 23 विद्यार्थी अलग-अलग कक्षाओं में बैठे थे। बच्चे स्कूल की वर्दी में थे। स्कूल में आठ अध्यापक मौके पर मौजूद थे। पांच अध्यापक अलग-अलग कक्षाओं में विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। इस दौरान न तो बच्चों में सामाजिक दूरी दिखी और न ही अध्यापकों और विद्यार्थियों ने मास्क लगा रखे थे।
कोरोना संक्रमण के चलते शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को बंद कर विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाने के निर्देश जारी किए हुए हैं, लेकिन शहर का राजकीय प्राइमरी स्कूल सरकार के इन आदेशों को ठेंगा दिखा रहा है। यहां बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल में बुलाया गया था। अध्यापक बच्चों को होमवर्क दे रहे थे। जबकि 21 जून के बाद जेजे कॉलोनी से ही दो कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए थे। जिसमें एक 14 वर्षीय बच्चा भी संक्रमित पाया गया था। इसके बावजूद लापरवाही सामने आई है।
बहरहाल, राजकीय प्राथमिक पाठशाला में विद्यार्थियों को पढ़ाए जाने की सूचना पाकर जब अमर उजाला की टीम स्कूल पहुंची तो देखा कि स्कूल में पांच कमरों में कक्षाएं लगाई जा रही हैं। स्कूल में आठ अध्यापक मौके पर मौजूद थे। पांच अध्यापक अलग-अलग कक्षाओं में करीब 23 विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। विद्यार्थियों की कॉपी पर 11 जून से लेकर 24 जून तक की तारीख डाली हुई थी। इस दौरान न ही कक्षाओं में पढ़ा रहे अध्यापकों ने मास्क पहन रखा था और न ही विद्यार्थियों ने। टीम ने जब कक्षा अध्यापिका से बच्चों के मास्क न पहनने का कारण पूछा तो उनका जवाब गैर जिम्मेदाराना था। अध्यापिका ने कहा कि बच्चे गरीब परिवारों से हैं। इतना ही नहीं कक्षाओं में बैठे विद्यार्थियों में सामाजिक दूरी भी नहीं थी, जिससे उनमें संक्रमण की आशंका बनी थी।
स्कूल हेड बोले- बच्चों को किताबें देने के लिए बुलाया था
टीम ने स्कूल में कक्षा लगाने को लेकर जब स्कूल हेड सुखबीर सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को किताबें देेने के लिए स्कूल बुलाया था। बच्चों को पढ़ाया नहीं जा रहा, जो काम विद्यार्थियों को ऑनलाइन भेजा जाता है उसे चेक करने के लिए विद्यार्थियों को कुछ समय के लिए स्कूल में ही बैठा लिया जाता है। मुख्याध्यापक का कहना था कि किसी भी विद्यार्थी को रोजाना नहीं बुलाया जाता। वहीं टीम द्वारा मौके पर जब विद्यार्थियों की कॉपी जांची गई तो कॉपी पर तारीख क्रम अनुसार पेजों पर लिखी हुई थी। दूसरी कक्षा के विद्यार्थियों से बातचीत की तो बच्चों ने बताया कि वह पिछले तीन दिन से लगातार स्कूल आ रहे हैं।
शिक्षा निदेशालय ने यह दिए थे निर्देश
बता दें शिक्षा निदेशालय की ओर से विद्यार्थियों को इस सत्र का पाठ्यक्रम करवाने के लिए ई-लर्निंग के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। एक जून को अनलॉक-1 के बाद शिक्षा निदेशालय ने सरकारी स्कूल के अध्यापकों को विद्यार्थियों को किताबें बांटने व ई-लर्निंग के माध्यम से पाठ्यक्रम को अच्छे ढंग से करवाने को लेकर अनुमति दी थी। शिक्षा निदेशालय ने जारी पत्र में यह भी कहा था कि विद्यार्थियों को स्कूल न बुलाया जाए। शिक्षकों द्वारा ही मिड-डे-मील व किताबों का आवंटन किया जाएगा।
जेजे कॉलोनी स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल खुलने की जानकारी मिली थी। स्कूल को नोटिस जारी कर स्कूल में बच्चे बुलाने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। शिक्षा निदेशालय का आदेश है कि किसी भी कारण से बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जाएगा।
- आत्म प्रकाश मेहरा, जिला शिक्षा अधिकारी सिरसा।
विद्यार्थियों को किताबें देने के लिए स्कूल बुलाया गया था। जिन विद्यार्थियों को बुलाया था उनकी कॉपी चेक करने के लिए कुछ समय के लिए स्कूल में बैठाया गया था। बच्चों को रोज स्कूल में नहीं बुलाया जाता। बच्चे गरीब परिवारों से संबंधित हैं, इसलिए इनके पास मास्क नहीं है।
- सुखबीर सिंह, मुख्याध्यापक, राजकीय प्राथमिक स्कूल, जेजे कॉलोनी।