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उद्घाटन के इंतजार में जर्जर हुआ स्लाटर हाऊस

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अमर उजाला ब्यूरो
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ऐलनाबाद (सिरसा)।
आम जनता की सुविधाओं हेतु सरकार चाहे लाख प्रयत्न कर ले परंतु उन सुविधाओं का लाभ जनता को तब तक नहीं मिल सकता जब तक कि संबंधित विभागों के अधिकारी सरकार के प्रयत्नों को अमलीजामा पहनाने में रुचि न लें। ऐलनाबाद में 11 वर्ष पूर्व लाखों रुपयों की लागत से बने स्लाटर हाउस (पशुवध गृह) की दुर्दशा देखकर लोग प्रशासन और शासन को कोस रहे है। नवनिर्मित भवन उद्घाटन की बाट जोहते-जोहते शरारती तत्वों की गतिविधियों का शिकार होकर रह गया है।
प्रशासन की उदासीनता के चलते इसका उपयोग अभी तक शुरू नहीं हो पाया है वहीं मांस बिक्री के लिए भेड़, बकरियों आदि को अभी भी कसाइयाें द्वारा सरेआम गलियों और सड़कों पर स्थित कमरानुमा दुकानों या खोखों में काटा जा रहा है, जिससे आमजन बुरी तरह परेशान हैं। सुनसान इलाके में बने इस स्लाटर हाउस का भव्य भवन का लंबे अर्से तक कोई उपयोग न होने का लुत्फ शरारती तत्वों ने उठाया तथा स्लाटर हाउस के रोशनदानों में लगे शीशे, दरवाजे चौखटे आदि भी उखाड़कर ले गए। इसके अलावा दीमक ने भी कई दरवाजों को चटकर बुरी तरह से खोखला कर दिया है और वध गृह के परिसर में कंटीली झाड़ियां उग आई हैं।
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मीट विक्रेताओं के लिए ये हैं नियम
इस प्रकार के पशु वध गृह का निर्माण इसलिए करवाया जाता है, ताकि मांस विक्रेता गला-सड़ा मांस न बेच सकें तथा गली-मोहल्लों में पशुओं को न काटा जाए। कायदे के मुताबिक स्लाटर हाउस में एक पशु चिकित्सक की नियुक्ति की जाती है जो यहां लाए जाने वाले पशुओं का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद स्वस्थ पाए जाने पर ही उसे काटे जाने की अनुमति प्रदान करता है। इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित कर लिया जाता है कि पशु किसी भी बीमारी से ग्रस्त नहीं है तथा इसका मांस खाना हानिकारक नहीं हो सकता परंतु ऐलनाबाद में काटे जाने वाले पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्सक होने की बात तो दूर पशु वध गृह का उपयोग ही नहीं हो रहा है।

ऐलनाबाद में है मीट की 9 दुकानें
नगर में रेलवे रोड, डबवाली रोड, ममेरां रोड के अलावा वार्ड नंबर एक और दो में कुल नौ मीट की दुकानें हैं इन में से कई दुकानें या खोखे तो धार्मिक स्थल एवं स्कूल से सटे हुए हैं। स्कूल जाने वाले नन्हे बच्चों और धार्मिक स्थल में आने वाले श्रद्धालुओं पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। प्रशासन की अनदेखी के चलते ऐलनाबाद में बड़ी उम्र के पशुओं के अलावा बीमार तथा विभिन्न दुर्घटनाओं में घंटो पहले मरे पशुओं का मांस भी मांस विक्रेताओं द्वारा बेचे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। स्लाटर हाउस का उपयोग न होने के कारण पशुओं के पेट से निकली गंदगी को गलियों में ही फेंक दिया जाता है जिससे वातावरण में बदबू के साथ-साथ संक्रमण फैलता है।
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क्या कहते हैं पालिका सचिव
नगर पालिका सचिव सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि इस स्लाटर हाउस में संक्रमण और प्रदूषण को रोकने के लिए पहले एक प्लांट स्थापित किया जाना है, जिसके लिए विभागीय उच्चाधिकारियों को लिखा हुआ है जब यह प्लांट यहां लग जाएगा तब ही स्लाटर हाउस चालू किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि उस से प्लांट से यहां फैलने वाले खून और मांस के टुकड़ों से गंदगी आदि से संक्रमण नहीं होगा तथा वायु प्रदूषण भी नहीं होगा।
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