कक्षा छह से दस तक संस्कृत को अनिवार्य भाषा के रूप में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा: शर्मा
सिरसा। हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने घोषणा की है कि प्रदेश में छठी कक्षा से दसवीं कक्षा तक संस्कृत भाषा को अनिवार्य भाषा के रुप में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने संस्कृत परीक्षा बोर्ड के गठन करने और मनसा देवी कांप्लेक्स पंचकूला में संस्कृत महाविद्यालय भी शुरू करने की घोषणा की। वे शनिवार को विवेकानंद वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत भारती हरियाणा के दो दिवसीय प्रांत सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ शिक्षा मंत्री ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने संस्कृत भाषा में लिखित आयुर्वेद भाषा और योगास्य भाषा पुस्तकों का विमोचन भी किया। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने संस्कृत को प्रोत्साहन देने के लिए कैथल के मुंदड़ी गांव में महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की है।
उन्होंने संस्कृत कहा कि इसमें वाक्य का भाव नहीं बदला जा सकता। हमारी परंपरा, हमारी धरोहर और हमारी संस्कृति संस्कृत भाषा से ही है। सम्मेलन में संस्कृत भारती के क्षेत्र संगठन मंत्री जयप्रकाश ने संस्कृत भारती के द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसकी स्थापना 1981 में हुई थी और पूरे विश्व के 18 देशों में संस्कृत भारती की टीम काम कर रही है। इसके अलावा 42 देशों के शिक्षार्थी संस्कृत भारती से शिक्षा ग्रहण कर चुके हैं। हरियाणा अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम की चेयरपर्सन सुनीता दुग्गल ने संस्कृत को प्यारी भाषा बताते हुए इसके प्रचार प्रसार करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृति का उद्गम संस्कृत भाषा से ही है। सूचना आयुक्त भूपेंद्र धर्माणी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए संस्कृत भाषा के स्वरूप के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद संस्कृत भाषा के साथ अन्याय हुआ है। विदेश के स्कूलों में प्रार्थना के समय गायत्री मंत्र का उच्चारण होता है और हम उससे आज विमुख होते रहे हैं। जो हमारे लिए सोचनीय है।
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