सिरसा। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने शुक्रवार को जिले की रहने वाली 8वीं कक्षा की छात्रा से दुष्कर्म करने के दोषी युवक को 20 साल की कैद व 59 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश डॉ. नरेश कुमार सिंघल ने कहा कि दोषी भूषण ने घर पर अकेली नाबालिग को डरा-धमकाकर जबरदस्ती गलत काम किया। दोषी का व्यवहार बहुत शर्मनाक है। ऐसे अपराधियों को कम सजा देकर नहीं छोड़ा जा सकता। ऐसे अपराध इज्जत के साथ-साथ समाज के लिए भी नुकसानदायक हैं। इसलिए दोषी पर रहम दिखाना न्याय का मजाक उड़ाना होगा। दोषी भूषण ने न्यायालय से सजा में नरमी बरतने की गुहार लगाई थी।
बदनाम करने की धमकी दी, दो बार किया दुष्कर्म
अदालत में चले अभियोग के अनुसार 3 अगस्त 2022 को 16 वर्षीय नाबालिग ने सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई कि वह आठवीं कक्षा में पढ़ती है। पड़ोस में रहने वाला भूषण उसके घर आता-जाता है। 15 दिन पहले वह घर में अकेली थी, दोपहर तीन बजे भूषण घर आया। उसने कहा कि वह उससे प्यार करता है और शादी करना चाहता है। अगर उसने शादी नहीं की तो वह उसे बदनाम कर देगा। विरोध करने पर भूषण ने उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद दो अगस्त की रात दस बजे भूषण फिर उसके घर आया और उसे पास के एक प्लॉट में ले गया, जहां उसने फिर से गलत काम किया। इसके बाद छात्रा ने अपनी मां को आपबीती बताई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दो लाख का मुआवजा दे
न्यायाधीश डॉ. नरेश कुमार सिंघल ने फैसले में कहा कि जुर्माना राशि में से पीड़ित को 50 हजार रुपये मुआवजा दिया जााएगा। इसके अलावा हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना 2013 के तहत पीड़ित को मुआवजा पाने का हकदार माना जा सकता है। न्यायालय की राय में पीड़ित को दी जाने वाली जुर्माने की रकम उसके पुनर्वास के लिए काफी नहीं है। पेनिट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट की घटना पीड़ित और उसके परिवार वालों के शरीर, मन व इज्जत पर एक बड़ी चोट है, जिसकी भरपाई पैसे से नहीं की जा सकती लेकिन मुआवजे की रकम से पीड़ित और उसके परिवार वालों को कुछ हद तक तसल्ली मिल सकती है। न्यायालय इस केस को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-कम-सेक्रेटरी, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी सिरसा से सिफारिश करता है कि पीड़िता को दो लाख का मुआवजा दिया जाए।