- आतंकी हमले के बाद दो दिन से काम पर नहीं जा सके कश्मीरी
अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ पर हुए हमले के बाद सिरसा में रह रहे कश्मीरी युवा भी चिंतित हैं। जम्मू में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद कश्मीर में रहने वाले उनके परिजनों को सिरसा में आए हुए अपने चिंता सता रही है। सिरसा में कश्मीर से आए आकिम, शब्बीर, नवाज अहमद, अली मोहम्मद, मेघराज अहमद, अब्दुल रशीद कुलगांव जिले के हैं। वे पिछले करीब 15 सालों से सर्दियों में कश्मीरी शाल और अन्य गर्म कपड़े बेचने के लिए सिरसा आते हैं।
इन युवाओं ने बताया कि वे दो दिन से काम पर नहीं जा सके। इसलिए कपड़ा नहीं बेच पाए। क्योंकि आतंकी हमले के बाद कश्मीर में रहने वाले उनके परिजन भी उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इन युवाओं का कहना है कि सिरसा में वे उधार पर कपड़ा बेचते हैं। इसलिए काफी पैसा लेना अभी शेष है। वे फरवरी में पैसा कमाकर वापस जाते हैं। लेकिन अभी वे वापस जाने की तैयारी कर रहे थे कि जम्मू में हिंसक प्रदर्शन हो गए। ऐसे में जम्मू से ज्यादा हम सिरसा में ही सुरक्षित हैं। क्योंकि यहां के लोग बहुत ही मेल जोल रखने और शांति प्रिय हैं। दो दिनों से हर एक घंटे बाद उनके पास घर से परिजनों के फोन आ रहे हैं। वे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। लेकिन हमने उनसे कहा कि सिरसा में हम सुरक्षित हैं और जहां के लोग बड़े ही शांति प्रिय है।
नवंबर से लेकर फरवरी तक रहते हैं सिरसा
सिरसा में करीब 400 कश्मीरी युवक हर साल गांव और कस्बों में जाकर कपड़ा और ड्राई फ्रूट बेचते हैं। आकिम, शब्बीर, नवाज अहमद, अली मोहम्मद, मेघराज अहमदन, अब्दुल रशीद ने बताया कि उनमें से कोई कार पेंटर है, कोई राजगिरी का काम करता है। लेकिन सर्दियों में वे अपना काम धंधा छोड़ कर पंजाब, हरियाणा में आकर गर्म कपड़े और ड्राई फ्रूट बेचते हैं। फरवरी के अंत या मार्च के पहले सप्ताह में वे वापस कश्मीर चले जाते हैं। शहर में आकर वे अपने पूरे कागजात पुलिस थाने में जमा करवाते हैं। वहीं आतंकी हमले के बाद खूफिया विभाग ने भी सुरक्षा की दृष्टि से दिन भर सिरसा में रहने वाले कश्मीरी युवाओं का डाटा जुटाना शुरू कर दिया।
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