अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
जिले के सभी 1377 आंगनबाड़ी केंद्रों को ताला लगाकर 1064 वर्कर्स व 1274 हेल्पर का अपनी विभिन्न मांगों को पूरा करवाने के लिए लघु सचिवालय परिसर में आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर यूनियन का धरना वीरवार को चौथे दिन भी जारी रहा। इस दौरान प्रदर्शनकारी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारे बाजी की। सोमवार से आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर यूनियन द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के अंतर्गत जिले की सभी आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर केंद्रों को बंद करके लगातार धरने पर बैठी हुई हैं, जिसके चलते करीब 10858 गर्भवती महिलाएं और 42823 बच्चे जो कि छह महीने से छह साल की उम्र तक के हैं वे चार दिन से पोषाहार से वंचित हैं।
उधर आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर यूनियन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को सरकार मान नहीं लेती तब तक धरना लगातार इसी प्रकार चलता रहेगा। इस दौरान सभी ने सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त करते हुए सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरने की अध्यक्षता यूनियन की जिला सचिव वीरो रानी ने की। सचिव वीरो रानी ने कहा कि आज हमें हमारे हकों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा है और हम हमारा हक लेकर ही रहेंगे। आंगनबाड़ी यूनियन सिरसा ब्लॉक प्रधान शकुंतला, ऐलनाबाद से प्रमिला, चौपटा से माया रानी, रानियां से प्रेमा, डबवाली से महिंद्र कौर के साथ जिले की सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद रही।
जिले के ब्लॉकवाइज आंगनबाड़ी केंद्र और उनमें कार्यरत वर्कर्स और हेल्पर
ब्लॉक आंगनबाड़ी केंद्र वर्कर्स हेल्पर
बड़ागुढ़ा 148 105 137
डबवाली 227 182 213
ऐलनाबाद 174 147 166
रानियां 182 151 175
माधोसिंघाना 212 154 193
ओढ़ा 151 102 131
नाथुसरी चोपटा 205 147 183
सिरसा 78 76 76
इन 1377 केंद्रों पर 1064 वर्कर्स व 1274 हेल्पर कार्यरत हैं जो कि सोमवार से लघु सचिवालय परिसर में धरने पर बैठी हैं, जिसके चलते जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र चार दिनों से बंद पड़े हैं। जिले में 10858 गर्भवती महिलाएं और 42823 बच्चे जो कि छह माह से छह साल की उम्र तक के हैं वो चार दिन से पोषाहार से वंचित हैं।
किराये के पैसे मांगकर आ रहीं हैं धरना देने
35 किलोमीटर दूर गांव तरकांवाली से धरने में चार दिन से शामिल हो रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बिमला देवी और खजानी देवी ने बताया दो महीने से पैसे नहीं मिले। दो दिन का किराया तो उनके पास था लेकिन कल से किराया मांग कर सिरसा आई हैं। अब पता नहीं धरना कितने दिन चलेगा। घर का काम भी नहीं हो पा रहा। यहां सारा दिन भूखे प्यासे रहकर धरना देना पड़ता है। लेकिन इस बार मांग मनवाकर ही धरना खत्म करेंगी। चाहे कितना भी तंग होना पड़े।