अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
सरस्वती नदी की खोज में गांव फरवाईकलां में जारी खोज कार्य के चौथे दिन चौंकाने वाली बात सामने आई। शनिवार को ड्रिलिंग मशीन जमीन के 960 फुट नीचे पहुंची तो पत्थर की एक काफी बड़ी चट्टान मिली। ड्रिलिंग मशीन से पत्थर के कण बाहर आए तो खोज कार्य में जुटी टीम हैरान रह गई। पत्थर के कण कीमती पत्थरों में शुमार संगमरमर से मिलते जुलते हैं। 960 फुट से दस फुट नीचे तक ड्रिलिंग मशीन से केवल इस कीमती पत्थर के छोटे-छोटे कण बाहर निकल रहे हैं। ड्रिलिंग कार्य में जुटी टीम के इंचार्ज विरेंद्र कुमार ने कणों के सैंपल लिए हैं। उनका कहना है कि वे सरस्वती नदी की खोज में अब तक तीन जगहों पर कार्य कर चुके हैं, लेकिन इन जगहों पर फरवाईकलां जैसी पत्थर की चट्टान जमींन में नहीं मिली। यह कोई साधारण पत्थर की चट्टान नहीं है। कणों की शुरुआती जांच से पता चलता है कि ये पत्थर संगमरमर या उससे मिलती जुलती कीमती पत्थर की चट्टान है। सफेद और लाल रंग के कण निकलकर बाहर आ रहे हैं। इन्हें जांच के लिए महाराष्ट्र में भेजा जाएगा और सात दिनों बाद इसकी रिपोर्ट आएगी। इसके अलावा खोज के दौरान 640 फुट की गहराई में पानी बेहद मीठा है, टीडीएस की मात्र भी न्यूनतम स्तर पर है। पानी की मिठास और टीडीएस की न्यूनतम मात्रा को देखकर खोज टीम को लगता है कि यह पानी सरस्वती नदी का पानी ही है।
640 फुट गहराई में मिले नदी से सबूत
फरवाईकलां में जमीन के 960 फुट नीचे पत्थर की काफी मोटी चट्टान आने के कारण ड्रिलिंग मशीन की रफ्तार बहुत धीमी हो गई है। बड़ी चट्टान तोड़कर गहराई में जाने के लिए स्पेशल बड़ी मशीन मंगवाई जाएगी। ड्रिलिंग की जो मशीन अभी खोज कार्य में लगाई गई है वह केवल 1700 फुट तक जा सकती है। बड़ी मशीन से 2500 फुट गहराई तक पहुुंचा जा सकता है। चट्टान टूटने के बाद अगर 1700 फुट की गहराई पर भी 640 फुट पर मौजूद जैसा पानी मिला तो इससे साफ हो जाएगा की ये पानी सरस्वती नदी का है।
नदियों में मिलने वाली मिट्टी बाहर आईं
सरस्वती की खोज कार्य में जुटी टीम को 600 फुट की गहराई के बाद जमीन से निकली मिट्टी में काफी फर्क देखने को मिला है। खोज टीम के इंचार्ज वीरेंद्र कुमार का कहना है कि हर दस फुट गहराई पर मिट्टी के सैंपल लिए जा रहे हैं। 600 फट की गहराई के बाद से जो मिट्टी निकलकर बाहर आ रही है वैसी मिट्टी केवल नदी की तलहटी पर मिलती है। पेहोवा, पीपली और यमुनानगर में सरस्वती नदी की खोज के दौरान गहराई में ऐसी ही मिट्टी बाहर निकली थी।
सुबह से शाम लोगों का लगा रहता है तांता
फरवाईकलां में सरस्वती की खोेज को लेकर चल रहे कार्य को देखने के लिए सुबह से शाम तक लोगों का तांता लगा रहता है। दूर दराज क्षेत्रों से लोग सरस्वती नदी धारा निकलने की आस में यहां आ रहे हैं। फरवाईकलां के ग्रामीणों का कहना है कि ये उनके लिए सौभाग्य की बात है कि सरस्वती नदी उनके गांव से होकर कभी बहती थी। अब जमीन के नीचे से उसकी धारा बाहर निकलेगी तो उनका गांव पवित्र स्थल के रूप में पहचाना जाएगा। सरपंच विनोद कुमार का कहना है कि सरस्वती नदी की धारा से उनके गांव को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
कीमती पत्थर निकलना असाधारण
960 फुट की गहराई में पत्थर की मोटी चट्टान है। ये चट्टान काफी बड़ी है। ड्रिलिंग मशीन से पत्थर के जो कण निकल रहे हैं वह संगमरमर या उसे मिलते जुलते कीमती पत्थर के हैं। अब तक जहां भी खोज कार्य हुआ वहां ऐसी चट्टान और पत्थर के कण नहीं निकले। यह बिलकुल असाधारण घटना है। पत्थर को तोड़ने के लिए बड़ी मशीन मंगवाई जाएगी। कणों के सैंपल जांच के लिए महाराष्ट्र लैब में भेजे जाएंगे। 600 फुट गहराई के बाद से शुरुआती तौर पर सरस्वती नदी होने सबूत मिले है। बस लैब में मिट्टी की जांच होने के बाद इसकी पुष्टि होना शेष है। ठोस पुष्टि के लिए दो हजार फुट गहराई तक खोज कार्य किया जाएगा।
-विरेंद्र कुमार, इंचार्ज सरस्वती नदी खोज टीम।