फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ओटू वीयर हेड की क्षमता करीब 41 हजार क्यूसिक की, 2010 में बांध के किनारे टूटने पर आई थी रानियां क्षेत्र में बाढ़

विज्ञापन
विज्ञापन
घग्घर का जलस्तर बढ़ा, 1700 क्यूसेक पहुंचा
विज्ञापन

रानियां। मानसून की शुरूआत के बाद पड़ोसी राज्यों हिमाचल प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में हुई बारिश से घग्घर का जलस्तर बढ़ने लगा है। जलस्तर बढ़ने से आसपास के क्षेत्र में लोगों का ओटू हैड पर जमावडा लग गया। हालांकि जलस्तर बढ़ने से लोगों को बाढ़ का भय सताने लगता है लेकिन घग्घर अभी तक खतरे के निशान से बहुत नीचे है। पिछले कुछ दिनों से ओटू हैड पर जलस्तर का उतार-चढ़ाव जारी है। घग्घर में मौजूदा समय में जलस्तर 1700 क्यूसेक तक पहुंच गया है। जबकि दो दिन पहले पानी 250 क्यूसेक था। शनिवार शाम 650 क्यूसेक और इसके बाद रविवार को पानी 1700 क्यूसेक तक पहुंच गया। पिछले इलाकों में बरसात होने से अब ओटू हैड पर ओर जलस्तर बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। मौजूदा समय में खन्नौरी हैड पर 3650 क्यूसेक के करीब जलस्तर दर्ज किया गया है।
नहरों में पानी फुल
ओटू हैड पर जलस्तर ज्यादा होने के कारण दक्षिणी घग्घर कैनाल व उत्तरी घग्घर कैनाल भी पानी से भरी हुई है। दोनों नहरों में पानी होने से धान उत्पादक किसानों को सिंचाई की कोई परेशानी नहीं आ रही। टेल के अंतिम छोर पर पानी भी पहुंचा है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों के लिए अबकी बार सूखे की समस्या झेलनी नहीं पड़ेगी। जबकि पिछले काफी समय से क्षेत्र में बरसात न होने की वजह से फसलों में सूखा पड़ता जा रहा था। बिजली की किल्लत के चलते ट्यूबवेलों से पानी पूरा नहीं हो रहा था। घग्घर व नहरों के आसपास के किसानों ने राहत की सांस ली हैं।
विज्ञापन

2010 में आई थी बाढ़
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के बाद ओटू हैड से आगे घग्घर गांव फिरोजाबाद के पास से टूट गई थी। तब करीब 35 किलोमीटर दूर तक गांव बणी तक पानी पहुंच गया था। रानियां क्षेत्र के कई गांव बाढ़ में डूब गए थे। हजारों एकड़ फसल खराब हो गई थी। तब घग्घर में पानी 24 हजार क्यूसेक था।
विज्ञापन

बाढ प्रबंधन के कार्य अधूरे
प्रशासन की ओर से हर बार बाढ़ रोकने के लिए प्रबंधन का कार्य किया जाता है, लेकिन समय रहते यह पूरा नहीं किया जाता। जिसकी वजह से तटबंधों के टूटने का खतरा बना रहता है। प्रशासन की ओर से तटबंधों को मजबूत बनाने व तटबंधों का कटाव रोकने के लिए मिट्टी के गट्टों का इंतजाम नहीं किया गया है। प्रशासन की ओर से तटबंधों पर दरार या चूहों के बिलों के कारण तटबंधों में आए कटाव को रोकने के कदम भी नहीं उठाए गए हैं।
इन क्षेत्रों में ये है पानी की मात्रा
गुहलाचीका 14350
चांदपुर 2350
खन्नौरी 3650
ओटू हैड 1700
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें