अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
ग्राम सचिव और सरपंचों की संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर जिले के सरपंचों और ग्राम सचिवों ने सरकारी मीटिंगों के बहिष्कार का एलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन को सहयोग न करने का भी निर्णय लिया है, जिसके कारण ग्रामीण एरिया में कामकाज ठप होने की आशंका प्रबल हो गई है। ग्रामीण अंचल में तमाम कामकाज ग्राम सचिवों और सरपंचों के मार्फत ही पूरे करवाए जाते हैं, ऐसे में स्थिति विकट बन गई है।
सरपंच और ग्राम सचिवों ने सोमवार को अतिरिक्त उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा और संघर्ष से अवगत करवाया। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार ग्राम सचिवों और सरपंचों की लंबित मांग पूरी नहीं करती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
उल्लेखनीय है कि ग्राम सचिव और सरपंच ई-पंचायत प्रणाली का विरोध कर रहे हैं। उनके अनुसार सरकार द्वारा आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए गए हैं और तुगलकी फरमान जारी कर दिया है, जिसके कारण उन्हें संघर्ष का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
ठहर जाएगा ग्राम विकास
ग्राम सचिवों और सरपंचों के आंदोलन का रास्ता अपनाए जाने से ग्राम विकास का मार्ग अवरुद्ध हो जाएगा। चूंकि इनके माध्यम से ही ग्राम पंचायत के तमाम कार्य संभव हो पाते हैं। ऐसे में पंचायत की हर गतिविधि ठहर जाएगी और गांवों में होने वाले तमाम कामकाज ठप हो जाएंगे। गांवों के विकास के लिए बनने वाली योजनाओं, प्रस्ताव और अन्य प्रकार के कामकाज आंदोलन की वजह से नहीं हो पाएंगे, जिसका सीधा असर ग्राम विकास पर पड़ेगा।
ये हैं मांगें
ग्राम सचिव और सरपंचों की ओर से ई-पंचायत प्रणाली को ग्राम विकास में बाधक बताते हुए इसे खारिज किए जाने की मांग की है। इसके साथ ही हरियाणा पंचायतीराज एक्ट 1994 को लागू किए जाने, ग्राम सचिवों की शैक्षणिक योग्यता ग्रेजुएट तथा वेतनमान पटवारी के समान करने, सांसदों-विधायकों के समान पंचों और सरपंचों का मानदेय बढ़ाए जाने, ग्राम सचिवों का वाहन भत्ता 20 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किए जाने, गांवों में बीपीएल सर्वे करवाकर गरीबों के बीपीएल कार्ड बनाने, प्रधानमंत्री आवास योजना का दायरा बढ़ाकर ग्रामीण एरिया के गरीबों को मकान दिए जाने, प्रत्येक गांव में ग्राम सचिवालय का निर्माण किए जाने की मांग शामिल है।