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राम रहीम की पैरोल का विरोध, डीसी को सौंपा ज्ञापन

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सिरसा। गुरमीत राम रहीम को पैरोल न देने के मामले में सोमवार को सिरसा के आमजन ने एडवोकेट रणजीत सिंह भांबू की अध्यक्षता में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि डेरा मुखी को पैरोल नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दो साल पहले राम रहीम की गिरफ्तारी के समय सिरसा का आर्थिक नुकसान हुआ था। पूरे शहर में आतंक का माहौल बन गया था।
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पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के भतीजे रूप कुमार छत्रपति ने कहा कि अगर डेरा मुखी को पैरोल मिलती है तो हमारे परिवार को भी जान का खतरा है। अगर वह एक बार बाहर आ गया तो कभी वापस जेल नहीं जाएगा। राजनेताओं के बयानों से ऐसा लग रहा है कि उसे पैरोल दी जाएगी। उपायुक्त ने कहा कि यह मामला अभी विचाराधीन है।
उन्होंने ज्ञापन में कहा कि गुरमीत सिंह के जेल जाने से पहले ऐसी अनेकों घटनाएं हैं जो साफ बताती हैं कि गुरमीत सिंह स्वयं को कानून से बड़ा मानता है। कोर्ट के आदेश के विरोध मेें तीन राज्यों में सुनियोजित तरीके से उसने बसें जलवाईं, जिसके चलते पंजाब में 36 अनुयायियों को अदालत ने दोषी करार दिया और सजा सुनाई। डेरा मुखी के प्रभाव के कारण हरियाणा और राजस्थान की सरकारों ने दंगाई अनुयायियों पर किए हुए केस वापस ले लिए। जिससे सिद्ध होता है कि वोट की फसल पैदा करने वाला गुरमीत सिंह राजनीतिज्ञों के लिए बड़ा लालच है।
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उन्होंने कहा अदालत में पहली पेशी के वक्त भी डेरामुखी ने 40 हजार अनुयायियों की भीड़ इकट्ठा कर ली। सिरसा में भी अदालत परिसर के बाहर धारा 144 लगी होने के बावजूद डेरा अनुयायी हजारों की संख्या में लाठी, जेली, डंडे, हथियार और पत्थरों से भरी गाड़ियां लेकर मौजूद रहते थे। डेरा मुखी को यदि जमानत मिल जाती है तो सिरसा व पड़ोसी राज्यों की शांति को बड़ा खतरा होगा। साथ ही अगर गुरमीत सिंह यदि अनुयायियों की आड़ में छिप गया तो उसे दोबारा जेल भेजना मुश्किल होगा। उन्होंने कहा कि गुरमीत सिंह जैसे अपराधी की पैरोल अर्जी पर कोई सहानुभूति ना दिखाई जाए और इसे अस्वीकृत किया जाए। इस मौके पर मोहन लाल, रामकुमार बिश्नोई, राम सिंह, जयचंद, शंकर, सुखदेवराज, जगसीर, मुखा राम, बख्शीश सिंह व रणधीर सिंह मौजूद थे।
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