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हॉकी स्टार सविता पुनियां ने कहा अभी शादी का विचार नहीं

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सिरसा।
वैसे तो हॉकी खेल में जिले का नाम पहले से स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जा चुका है। अब भारतीय महिला हॉकी टीम की गोलकीपर ओलंपियन सविता पूनियां ने एशिया कप मेें देश को गोल्ड मेडल दिलाने में एक बार फिर अपना नाम जोड़ दिया है। सविता के शानदार प्रदर्शन के बाद परिजन और जोधकां के ग्रामीण बल्कि पूरे जिले के लोगों का सीना चौड़ा हो गया। आज इस बेटी पर सभी नाज कर रहे हैं। अब सविता आने वाले वर्ल्ड कप के लिए व्यस्त हो गईं हैं।
हाल में जापान में हुई एशिया कप प्रतियोगिता में गोल्ड लेकर अपने गांव लौटी ओलंपियन सविता पूनियां ने बातचीत के दौरान कहा कि 2018 में कॉमनवेल्थ, एशियन गेम और वर्ल्ड कप होने जा रहे हैं। तीनों प्रतियोगिताएं ही अति प्रतिष्ठित हैं इस लिए इनमें देश को गोल्ड दिलाने के लिए अभी से रात-दिन एक करना होगा। सविता से जब शादी के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि इन प्रतियोगिताओं से पूर्व शादी का सोचना बेमानी होगी। देश के लिए मेडल लाने के बाद जैसे उनके माता पिता चाहेंगे फिर शादी पर विचार किया जाएगा।
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देश के लिए 154 इंटरनेशनल मैच खेल चुकी सविता पूनियां ने कई बार अपने प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया और अनेक मेडल अपने नाम किए। यहां तक कि ओलंपिक के लिए क्वालीफाइंग दौर में भी फाइनल मैच में अनेक गोल रोककर देश की टीम को ओलंपिक की टिकट कंफर्म करवाने में सविता ने जो प्रदर्शन किया उसको कभी भुलाया नहीं जा सकता। दो बार एशिया की बेस्ट गोल कीपर बनना का सौभाग्य भी सविता को हासिल हुआ है। एशियन में एक बार ब्रांज और एक बार सिल्वर मेडल हासिल कर चुकी है। उसने वर्ष 2014 में 2017 में एशिया की बेस्ट गोल कीपर होने की खिताब भी हासिल किया है। उन्होंने बताया कि उक्त तीनों अहम प्रतियोगिताओं के लिए अभी से कैंप शुरू हो जाएगा। सबसे पहले फिटनेस कैंप का दौर चलेगा उसके बाद तकनीकी कैंप शुरू हो जाएगा। उसने बताया कि अप्रैल 2018 में कॉमनवेल्थ, जुलाई में वर्ल्ड कप और अगस्त में एशियन गेम होने जा रहे हैं, जिनमें देश को मेडल दिलाने के लिए अभी से कमर कसनी होगी।

पंजाब सरकार से भी करेगी नौकरी की मांग
सविता ने बताया कि पंजाब सरकार से नौकरी की मांग करेगी। उसने कहा कि मुझे इस बात का मलाल है कि सरकार एक तरफ तो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के नारे को बुलंद करने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रही है वहीं दूसरी और जो बेटियां देश का नाम दुनिया भर में रोशन कर रही हैं उनको नौकरी देना तो दूर की बात फोन के माध्यम से बधाई तक नहीं दी गई। हरियाणा सरकार से नौकरी पाने वाली खिलाड़ियों में सविता सीनियर हैं फिर भी अब तक इन्हें नौकरी से वंचित रखा गया है इस लिए अब सविता ने पंजाब सरकार से नौकरी की मांग करने का मन बनाया है। उनके पिता महेंद्र सिंह ने कहा कि इतने वर्ष हॉकी को देने और देश के लिए गोल्ड लाने तक का सफर तय करने वाली उनकी बेटी के लिए हरियाणा सरकार ने ध्यान ही नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश सरकार उन्हें नौकरी नहीं दे सकती तो वे पंजाब सरकार से डिमांड करेंगे।

केवल कंबोज ने थमाई थी हाथों में हॉकी
सविता पूनिया का जन्म 11 जुलाई 1990 को सिरसा के गांव जोधकां में डॉ. महेंद्र पुनिया के घर हुआ। स्कूली समय में वर्ष 2004 में शिक्षक केवल कंबोज ने हॉकी थमाई। उसके बाद वह अपने खेतों में अभ्यास करने लगी। कुछ ही महिनों पर उसका चयन सिरसा स्थित हॉकी नर्सरी में हो गया। उसके बाद वे हिसार में भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) केंद्र में शामिल हो गई। वहां पर मेहनत और टेलेंट के बल पर सविता ने दो वर्ष में नेशनल स्तर पर अपनी पहचान बना ली और वर्ष 2008 में उसका इंटरनेशनल सफर शुरू हो गया। सविता ने मुश्किलों से अपना सफर शुरू किया और आज एशिया की बेस्ट गोलकीपर के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है।
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हॉकी में चार ओलंपियन सिरसा से
इससे पूर्व पुरुष हॉकी टीम में 1992 में बार्सिलोना ओलंपिक में दीदार सिंह, 2004 के एथेंस ओलंपिक में हरपाल सिंह व 2012 लंदन ओलंपिक में सरदार सिंह खेल चुके हैं व उसके बाद सविता पूनियां ने ओलपिंक खेलकर ओलपिंयन बनी। गौरतलब हो कि जिले के अनेक पुरुष हॉकी खिलाड़ी इंटरनेशनल खेलों का सफर कर चुके हैं। सभी खिलाड़ी रानियां क्षेत्र के संतनगर गांव व आसपास के रहे हैं।
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