संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। सर्द मौसम सभी जीवों पर कहर बरपा रहा है। मनुष्य से ज्यादा पशुओं पर इसका बुरा असर हो रहा है। अधिक ठंड और कचरा खाने के कारण रोजाना शहर में लगभग 15 पशुओं की मौत हो रही है। ठंड के कारण गोशालाओं, डेयरियों और बेसहारा पशुओं की मौत का आंकड़ा निरंतर बढ़ता जा रहा है।
मृत पशु उठाने वाले कर्मचारियों ने बुधवार को इसका खुलासा किया। शहर के हर कोने से मृत पशुओं को उठाने के लिए उनके पास कॉल आ रही है। सर्दी में उनका काम बढ़ने के कारण उन्हें खाना खाने तक का समय नहीं मिल पा रहा है। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि तापमान में आ रही गिरावट आैर कचरा खाने का पशुओं पर कितना बुरा असर पड़ रहा है। ठंड के कारण नगर परिषद ने पशुओं को पकड़ने का अभियान बंद किया है। ऐसे में प्लास्टिक आदि अखाद्य वस्तुएं खाने वाले पशुओं के लिए सर्द मौसम काल बना है। आजकल जहां एक ओर सारा जिला राममय बना हुआ है वहीं, गोमाता को ठंड से बचाने वालों की कमी नजर आ रही है। हैरानी की बात यह है कि ठेकेदार की मर्जी के आगे प्रशासन भी मौन है।
भैंसों की मौत भी हो रही रोजाना ः मृत पशु उठाने वाले अरुण कुमार ने बताया कि शहर में बेसहारा घूमने वाले पशुओं की मौत प्लास्टिक और कपड़ा खाने से हो रही है। मृत पशुओं के पेट से 50 से 70 किलो तक प्लास्टिक और कपड़ा निकल रहा है। शहर से मृत पशुओं को उठाने के लिए रोजाना करीब छह फोन कॉल आ रहीं हैं। इनमें से अधिकतर पशुओं की मौत प्लास्टिक आदि अखाद्य पदार्थ खाने से हो रही है। एक माह से डेयरियाें से कई फोन आ रहे हैं। भैंसों की मौत भी ज्यादा हुई है। एक-दो भैंसों की मौत रोजाना हो रही है। पशुओं के मालिक उन्हें बता रहे हैं कि इन पशुओं की मौत बीमारी और सर्द मौसम है।
कई जगह गंदगी में चारा खोज रहे पशु
बस स्टैंड पर करीब पांच पशु मिले।
अग्रवाल कॉलोनी में करीब 15 के पशु दिखे।
डबवाली रोड पर लगे कूड़े के ढेर में करीब 15 पशु खाना खोजते मिले।
नागरिक अस्पताल के मुख्य कूड़ा घर में 20 से ज्यादा पशु गंदगी फैला रहे थे।
पशु चिकित्सक की सलाह
पशुपालन विभाग के निदेशक विद्यासागर की सलाह
पशुबाड़ों में नमी और धुआं नहीं होना चाहिए।
सर्दियों में पशुओं को ठंडा आहार और ठंडा पानी नहीं पिलाना चाहिए।
सर्दियों में जहां तक संभव हो, पशु मेलों का आयोजन नहीं करना चाहिए।
सर्दियों में पशुओं को रात के समय और अत्यधिक ठंड में बाहर नहीं रखना चाहिए।
पशुओं के मृत शरीर को पशुओं की चारागाह के आसपास दफन नहीं करना चाहिए।
सर्दियों में पशुओं को न तो खुले स्थान पर बांधें और न ही घूमने के लिए खुला छोड़ें।
पशु ठेकेदार और गोशाला संचालकों से बातचीत की जाएगी। हमारा प्रयास रहेगा कि बेसहारा पशुओं को गोशाला पहुंचाया जाए। सर्द मौसम के कारण डेयरी मालिकों भी निर्देश दिए जाएंगे कि वह अपने पशुओं को खुले में न छोड़ें।
- जयवीर सिंह, सीएसआई, नगर परिषद, सिरसा।