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टिकट मिलने के बाद तंवर बोले, सिरसा का पहले भी अहसान रहा

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सिरसा। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर तीसरी बार सिरसा लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। पार्टी की ओर से उनके नाम की घोषणा कर दी है। हालांकि अशोक तंवर की टिकट पहले से तय थी, क्योंकि हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद सिरसा में परिवर्तन यात्रा के दौरान उनकी टिकट की घोषणा कर चुके थे।
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टिकट मिलने की अधिकारिक घोषणा के बाद डॉ. अशोक तंवर शाम को सिरसा पहुंचे और कांग्रेस भवन में कार्यकर्ताओं की बैठक ली। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने टिकट मिलने पर आभार जताते हुए कहा कि सिरसा का अहसान मुझ पर है। पहले भी सिरसा ने मुझे एक बार सांसद बनाया और अब फिर से उसी इतिहास को दोहराएगा। टिकट मिलने की खुशी में कांग्रेसी नेताओं ने लड्डू बांटे। इस मौके पर कांग्रेस प्रवक्ता होशियारी लाल शर्मा, नवीन केडिया, अमित सोनी उपस्थित थे। इसके बाद वे शहर में कई जगहों पर कार्यक्रम में भाग लेने के लिए चले गए। डॉ. तंवर सिरसा सुरक्षित सीट से 2009 के चुनाव में जीत चुके हैं। तब उन्होंने इनेलो के विधायक डॉ. सीताराम को हराया। जबकि वर्ष 2014 के चुनाव में इनेलो के ही सरदार चरणजीत सिंह रोड़ी से हार का मुंह देखना पड़ा। अशोक तंवर दर्शन शास्त्र विषय में पीएचडी होल्डर हैं।

अभी तक तीन उम्मीदवारों के नामों ही हुई घोषणा
सिरसा सुरक्षित सीट पर सबसे पहले भाजपा ने सुनीता दुग्गल को टिकट दी। ऐसे में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को अबकी बार सुनीता दुग्गल से चुनौती मिलेगी। वहीं बसपा और लोकतंत्र सुरक्षा मंत्र ने पत्रकार जनकराज को अपना संयुक्त उम्मीदवार घोषित कर दिया। जजपा और आम आदमी पार्टी ने अभी अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया।
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तंवर और हुड्डा खेमों में बंटी कांग्रेस को साथ लेेकर चलने की चुनौती
सिरसा में कांग्रेस शुरू से ही दो गुटों में बंटी हुई है। एक गुट अशोक तंवर के समर्थकों का है। जबकि दूसरे गुट पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थकों का है। जिसमें उनके पूर्व ओएसडी डॉ. केवी सिंह, पूर्व विधायक भरत सिंह बैनीवाल प्रमुख हैं। पूर्व सांसद चौधरी रणजीत सिंह का भी खुद का अच्छा खासा वोट बैंक है।
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