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पिछले कई महीनों का स्ट्रीट लाइट्स और हुडा सेक्टर का बिल पेंडिंग

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57 लाख की बिल की वसूली के लिए नगरपरिषद पहुंचे बिजली निगम के तीन एसडीओ
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अमर उजाला ब्यूरो सिरसा।
शहर की स्ट्रीट लाइटों और हुडा सेक्टर के स्ट्रीट लाइटों के बिल की रिकवरी के लिए सोमवार को नगरपरिषद में ईओ वीरेंद्र सहारण से मिलने के लिए बिजली निगम के सिटी एसडीओ एसके रेडू, इंडस्ट्रीयल एसडीओ रविंद्र कालीरमण और एसडीओ माधोसिंघाना विपिन कुमार पहुंचे। हालांकि ईओ छुट्टी पर थे। ऐसे में तीनों एसडीओ पार्षदों से मिलने के लिए आ गए।
पार्षदों से बातचीत में एसडीओ विपिन कुमार ने बताया कि बकरियां वाली प्लांट का करीब दो लाख रुपये का बिल दो महीने से पेंडिंग है। नगर परिषद ने इसे अदा नहीं किया। ऐसे में उन्हें कनेक्शन काटना पड़ सकता है। इंडस्ट्रियल एसडीओ रविंद्र कालीरमण ने बताया कि कि नप की ओर स्ट्रीट लाइटस का करीब 13 लाख रुपये का बिल पेंडिंग है। इसी प्रकार से यदि हुडा सेक्टरों का भी बिल भी जोड़ दिया जाए तो यह राशि 57 लाख रुपये बनती है। यह राशि नगर परिषद द्वारा बिजली निगम से प्रति यूनिट चार्ज की रकम को एडजस्ट करने के बाद भी बनती है। नगर परिषद पहले पांच पैसा प्रति यूनिट बिजली निगम से टेक्स वसूलती थी। पिछले कुछ समय से यह रकम दो प्रतिशत प्रति यूनिट हो गई है। लेकिन नगर परिषद को अदा किए जाने वाले टेक्स को बिलों में एडजस्ट करने के बाद भी नगर परिषद की ओर स्ट्रीट लाइटों और हुडा की करीब 57 लाख रुपये की राशि बनती है। ईओ की अनुपस्थिति में कर्मचारी गोपाल ने बिल संबंधी सूचना ईओ वीरेंद्र सहारण को बताने की हामी भरी।
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दूसरी ओर पार्षद स्ट्रीट लाइटस के टेंडर माइनस में आने पर ऐतराज जताने पहुंचे
सोमवार को नगरपरिषद में पार्षदों ने स्ट्रीट लाइट्स के टेंडर के माइनस में फर्म द्वारा लिए जाने पर ऐतराज जताया। अपना ऐतराज जताने के लिए वाइस चेयरमैन, रणधीर सिंह धीरा, पार्षद नीतू सोनी, रीना सेठी, सुमन लता, सुमन शर्मा, पार्षद प्रतिनिधि प्रधान कार्यालय में पहुंचे। पार्षद ईओ से मिलकर अपनी आपत्ति दर्ज करवाना चाहते थे, लेकिन ईओ नहीं मिले। ऐसे में पार्षदों ने अगले दिन आने का फैसला लिया। लेकिन इससे पहले पार्षदों ने बताया कि पिछली बार में फर्म ने स्ट्रीट लाइटस का टेंडर 20 प्रतिशत माइनस में लिया था। माइनस में ठेका लेने के कारण शहर की लाइट व्यवस्था चरमरा गई। अबकी बार भी माइनस में ही फॅर्म ने रेट भरे है। ठेकेदार यदि माइनस में काम लेता है तो वह सही ढंग से काम नहीं करेगा। क्योंकि टेंडर अनुसार 16 कर्मचारियों का होना जरूरी है। प्रति व्यक्ति 14 से 15 हजार रुपये वेतन देना होगा। ऐसे में ठेकेदार कर्मचारियों की संख्या में कटौती करेगा। पार्षदों ने कहा कि वे नगरपरिषद के ईओ से मिलकर दोबारा से टेंडर लगवाने का अनुरोध करेंगे।
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