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दुकानदारों को जीएसटी के बारे में नहीं जानकारी

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दुकानदारों को जीएसटी के बारे में नहीं जानकारी
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
शहर के बाजारों में जीएसटी लागू होने के दूसरे दिन रविवार को भी इसका कोई असर नहीं दिखा। लगभग दुकानदार पुरानी प्रणाली के तहत सामान बेच रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार अभी उन्हें मालूम नहीं है कि जीएसटी के तहत किस प्रकार सामान बेचना है और किस प्रकार बिल बनाना है। अभी तक ग्राहक भी संशय में दिखाई दे रहे हैं। जीएसटी लागू होने के बाद दो अवकाश आ जाने के कारण विभागीय तौर भी कोई खास कदम नहीं उठाए जा सके हैं। रोज की भांति आज भी दुकानों पर ज्यों की त्यों बिक्री हुई। दुकानदारों का कहना है कि उनके पास अब तक लिखित रूप से ऐसी कोई सूचना नहीं है जिस के अनुसार वे अपनी वस्तुओं की बिक्री कर सकें।

आधिकारिक रूप से जानकारी नहीं मिली
जीएसटी के बारे में अब तक आधिकारिक रूप से जानकारी नहीं मिली है। हर वस्तु को टैक्स के दायरे में लिया गया है जिस कारण हर आदमी पर इसका असर पड़ेगा। जो पहले तीन-चार टैक्स मिलाकर लगते थे अब अकेला जीएसटी उससे अधिक कर दिया है तो महंगाई बढ़ेगी। इसके अलावा इंस्पेक्टरी राज बढ़ेगा।
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-संदीप सिंवर, इलेक्ट्रोनिक्स दुकानदार।

ग्राहक के साथ भेदभाव नहीं होगा
जीएसटी को देश की आर्थिक आजादी कहा जा सकता है। इससे देश तेजी से प्रगति करेगा। जीएसटी कोई दुविधा नहीं है। इससे हर आदमी को अपना लेखा-जोखा तैयार करने की आदत भी बनेगी जो जरूरी है। जीएसटी से ग्राहक के साथ भेदभाव नहीं होगा। एक वस्तु के सभी राज्यों में एक ही दाम होंगे और तरह-तरह के टैक्सों से भी छुटकारा मिलेगा। सरकार का बहुत अच्छा कदम है ये।
-कमल रेलन, एडवोकेट।

काम पर असर पड़ेगा
ट्रैक्टरों के रेट बढे़ंगे, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होना स्वाभाविक है। यहां तक कि ट्रैक्टरों के कलपुर्जों पर भी जीएसटी लागू हो गई है इससे खेती पर होने वाले खर्च में बढ़ोतरी होगी। जरूरत की वस्तुओं और खेती में प्रयोग होने वाली वस्तुओं को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए था। काम पर असर पड़ेगा।
-अमन सहारण, ट्रैक्टर विक्रेता।

अकाउंट का काम बढे़गा
जीएसटी नई प्रणाली है तो स्वाभाविक है कि शुरुआती दौर में व्यापारियों को कठिनाइयां आएंगी। बाद में इसके क्या परिणाम आते हैं ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। हर माह रिटर्न भरना व्यापारियों के लिए परेशानी होगी। अकाउंट का काम बढे़गा। अभी तक अधिकतर व्यापारियों को जीएसटी के बारे में विस्तार से जानकारी भी नहीं है।
-उपनेश अरोड़ा, कृषि उत्पाद व्यापारी।

किसान को मारने का कदम उठाया है सरकार ने
कृषि में प्रयोग होने वाली वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में लेकर सरकार ने किसानों को मारने का कदम उठाया है। किसान तो पहले ही कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं और अब जीएसटी के बाद कृषि का खर्च बढे़गा, जिससे किसानों की आर्थिक हालत और ज्यादा मंदी होगी। जीएसटी के बाद तो ऐसा लगता है कि सरकार ने किसान को मारने का कदम उठाया है। कम से कम किसान और गरीब तबके का इसमें जरूर ध्यान रखा जाना चाहिए था।
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-विकल पचार, किसान नेता।

केंद्रीय विभाग के अधिकारी रखेंगे नजरें
जीएसटी को लेकर देश के हर जिले में केंद्र का एक कार्यालय भी खुलेगा। सिरसा में आईआरएस (भारतीय राजस्व सेवा) अधिकारी बैठेगा इसके अलावा छह से आठ इंस्पेक्टर व कार्यालय स्टाफ बैठेगा। इस विभाग के अधिकारियों को किसी भी दुकान पर बिना बताए छापा मारने की पॉॅवर होगी, जबकि राज्य के आबकारी एवं कराधान विभाग को छापा मारने के लिए मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। केंद्रीय कार्यालय के अधिकारी राज्य सरकार के कार्यालय में भी जांच कर सकेंगे। केंद्रीय टीम सर्च, सीजल और इंस्पेक्शन अभियान चलाएगी। सरकार के निर्देश के अनुसार एक जुलाई से केंद्रीय विभाग की पूरी टीम जिला कार्यालय में बैठेगी और व्यापारियों पर पैनी नजरें रखेगी। आबकारी एवं कराधान विभाग के डिप्टी टैक्सेसन कमिश्नर रविंद्र सिंह ने कहा कि जीएसटी को लेकर पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। उन्होंने कहा कि कुल पंजीकरण फर्मों में से 80 प्रतिशत फर्मों का जीएसटी में पंजीकरण 30 जून से पूर्व ही कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि जिला कार्यालय में जीएसटी हेल्प डेस्क की स्थापना भी की गई है।
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