अमर उजाला ब्यूरो
डबवाली (सिरसा)।
सिरसा रोड पर 132केवी सब स्टेशन के समीप स्थित डबवाली नंदीशाला केवल नाम की ही नंदीशाला बन कर रह गई है। अब यहां रखे गए नंदी और गायों को भरपेट खुराक भी नहीं मिलती, जिसके चलते भूख और ठंड से गोवंश दम तोड़ रहे हैं। पिछले तीन दिनों में दस से अधिक गोवंश की मौत हो चुकी है। नंदीशाला के प्रवक्ता का कहना है कि फंड की कमी के चलते ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं। उधर, हरियाणा गो सेवा आयोग के सदस्य गोभक्त रामलाल बागड़ी ने कहा कि नंदीशाला शुरू करने से पहले ही कहा था कि इस तरह जल्दी में कार्य शुरू करने का कोई फायदा नहीं है।
संवाददाता ने उक्त नंदीशाला का दौरा किया तो देखा कि चारों ओर गोवंश भूख और ठंड से तड़प रहा है और उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं। इस नंदीशाला में गोवंश की सेवा करने के लिए एक बाबा तैनात है जो अकेले ही गोवंश की सेवा कर रहे हैं शेष दो-तीन अन्य स्टाफ सदस्यों को नौकरी से हटा दिया गया है।
गौरतलब हो कि प्रशासनिक अधिकारियों एसडीएम और तहसीलदार के प्रयासों से शुरू की गई नंदीशाला के अस्तित्व में आने से गोवंश की जून सुधरने के साथ-साथ आमजन ने भी राहत की सांस ली थी कि चलो अब तो शहर कैटल फ्री हो जाएगा, लेकिन कुछ समय के बाद ही नंदीशाला का बुरा हाल है। शुरू में ही इस नंदीशाला में करीब एक हजार गोवंश रखा गया था, जिनकी संख्या अब घटकर आधी रह गई है और इनके रहने और खाने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। नंदीशाला के प्रांगण में पिछले दिनों भूख और प्यास से कुछ गोवंश ने दम तोड़ दिया। हैरानी की बात यह है कि अभी भी इनके शव वहां पड़े हैं और उनको उठवाने या यूं कहें कि मिट्टी देने की भी जहमत नहीं उठाई गई है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में बीमार गोवंश भी अपनी जान से जाएंगे। एक दिवस पूूर्व बछडे़ को जन्म देने वाली गाय भी भूख और प्यास से मर गई और नंदीशाला के कर्मचारियों ने उसका बछड़ा भी बेच दिया। इस संबंध में एसडीएम से बात करनी चाही तो संपर्क नहीं हो सका। तहसीलदार ने कहा कि वे अवकाश पर हैं उन्हें इस बारे में पता नहीं।
नंदीशाला के पास फंड नहीं
जब से नंदीशाला की शुरुआत हुई है, तब से ही आमजन के सहयोग से करीब साढ़े सात लाख रुपये एकत्रित किए गए थे, जो धीरे-धीरे नंदीशाला के रख-रखाव और गोवंश की संभाल पर खर्च हो गए और अब नंदीशाला के पास फंड नहीं है। रजिस्ट्रेशन के समय जिन सदस्यों को नामित किया गया था, अब उनका भी कोई सहयोग नहीं मिल रहा। आमजन से अपील है कि नंदीशाला को आर्थिक सहयोग मुहैया करवाएं, ताकि गोवंश की जान बचाई जा सके।
-प्रवक्ता पार्षद विनोद बांसल, डबवाली नंदीशाला।
मैंने तो पहले ही कहा था
मैंने तो नंदीशाला शुरू करने से पहले ही कहा था कि इस तरह जल्दी में शुरू करने का कोई फायदा नहीं है। छह सात माह में करीब 700 गोवंश की मौत हो चुकी है और जिस तरह से ठंड बढ़ रही है, उससे ऐसा लगता है कि अन्य गोवंश भी मर जाएगा। जो गोवंश मरे पड़े हैं उनको उठवाने के लिए पंजाब की संगत मंडी से गाड़ी आती है। गाड़ी मंगवाकर गोवंशों को उठवा दिया जाएगा।
-रामलाल बागड़ी, सदस्य हरियाणा गो सेवा आयोग
ऐसा हुआ है तो गलत है
प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयासों से नंदीशाला शुरू करवाई गई थी और प्रारंभ में 21 सदस्य कमेटी का गठन भी किया गया था। अब नंदीशाला में गोवंश के मरने की कोई बात मुझे मालूम नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो गलत है। सदस्यों से बात करके समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
-पार्षद टेक चंद छाबड़ा, पूर्व नपा अध्यक्ष एवं वरिष्ठ इनेलो नेता।
मैंने तहसीलदार से कहा था कि यदि पशुओं को संभालना है तो यहां एक शेड बनाया जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने सरकारी जमीन का हवाला देकर कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता। आज ही मैंने डबवाली गोशाला में पैसे भेजकर नंदीशाला में तूड़ी भिजवाई है। ठंड को देखते हुए वहां पर तिरपाल की व्यवस्था की जानी चाहिए अन्यथा इतनी ठंड में गोवंश को बचाना मुश्किल होगा।
-गोभक्त प्रकाश चंद बांसल, डबवाली।
यह राजनीतिक नहीं सामाजिक मुद्दा है
यह राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दा है। जिसे हम सभी को मिलजुल कर सुलझाना होगा। जनसहयोग से नंदीशाला शुरू की गई थी और अब भी यदि इसे संभालना है या चलाना है तो यह तभी संभव है जब पूरी तरह से जनसहयोग मिले। मैं अपनी ओर से आह्वान करता हूं कि सभी आगे आएं और समाज हित मुहिम में अपना सहयोग देकर पुण्य के भागी बनें।
- सतीश जग्गा, सदस्य कष्ट निवारण समिति एवं वरिष्ठ भाजपा नेता।