गुरविक्रम जीत सिंह
सिरसा। शिक्षा विभाग की ओर से जिले के बोर्ड परिणामों को बेहतर बनाने के लक्ष्य रखा जाता है , लेकिन अधिकांश स्कूलों में तो प्रिंसिपल ही नहीं हैं और ना ही पर्याप्त अध्यापक। जिले के अधिकतर स्कूलों में वरिष्ठ अध्यापक ही वहां कार्यवाहक मुखिया की भूमिका निभाते हैं। इस कारण न केवल प्रशासनिक बल्कि शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है। जिले के सीनियर सेकेंडरी स्कूल के 54 और हाई स्कूल के 49 प्रिंसिपल के पद खाली पड़े हैं और खंड शिक्षा अधिकारी के पांच पद खाली पड़े हैं।
जिले में शिक्षा के स्तर को ओर बेहतर बनाने के लिए हर वर्ष एक लक्ष्य रखा जाता है। इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए योजना बनाकर कार्य भी किया जाता है, लेकिन जिले के पास पर्याप्त अध्यापक व खंड शिक्षा अधिकारी ना होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सात खंडों में खंड शिक्षा अधिकारी के पांच पद खाली है, केवल चोपटा व डबवाली के पास ही खंड शिक्षा अधिकारी तैनात हैं। पद खाली होने के कारण खंड के वरिष्ठ प्रिंसिपल ही खंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे ही कुछ हाल राजकीय स्कूल के प्रिंसिपल पदों का है, जिले में 109 सीनियर सेकेंडरी और 79 हाई स्कूल हैं जिसमें से सिर्फ 85 स्कूलों में ही प्रिंसिपल व मुख्याध्यापकों के पद भरे हैं। 54 सीनियर सेकेंडरी और 49 हाई स्कूल में वरिष्ठ अध्यापक ही कार्यवाहक की भूमिका अदा कर रहे हैं। खंड शिक्षा अधिकारी, प्रिंसिपल व मुख्याध्यापक का अतिरिक्त चार्ज होने के कारण उन्हें दोहरा काम करना पड़ रहा है। वहीं स्कूल अध्यापकों की बात की जाएं तो नौंवी से 12वीं कक्षा तक के 2254 अध्यापकों के पद है, जिसमें से 1105 पद रिक्त पड़े हैं। वहीं, पहली से 5वीं कक्षा तक के 2770 जेबीटी अध्यापकों के पद हैं जिसमें से 317 पद खाली हैं। संवाद
जिले में प्रिंसिपल, मुख्याध्यापकों और अध्यापकों के खाली पदों की संख्या पोर्टल पर अपलोड है। इसकी जानकारी मुख्यालय के पास भी है। पदों को नियुक्ति के लिए मुख्यालय ही निर्णय लेता है। - संत कुमार जिला शिक्षा अधिकारी, सिरसा