भारत के विश्वगुरु बनने की राह में चुनौतियों पर एमडीयू के पत्रकारिता विभाग के एमए अंतिम वर्ष के छात्र अंशुल कहते हैं कि हमारा देश विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है। हमारा प्राचीन इतिहास विश्वगुरु के रूप में गौरवशाली रहा है। प्राचीन काल में देश को विश्वगुरु कहा जाता था क्योंकि शुरू से ही शिक्षा का केंद्र रहा है। ज्ञान, संस्कृति और व्यापार का केंद्र होने के नाते, भारत सदियों से दुनिया को प्रेरणा देता रहा है। हालांकि, 21वीं सदी के भारत के समक्ष विश्वगुरु बनने की राह में कई कठिन चुनौतियां हैं।
पहली प्रमुख चुनौती आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना है। वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है, लेकिन गरीबी, असमानता और बेरोजगारी अभी बड़ी समस्याएं हैं। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास, शिक्षा प्रणाली में सुधार और रोजगार के नए अवसर का सृजन करना आवश्यक है। केंद्र सरकार का कहना है कि वह लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन प्रदान कर रही है। इससे पता चलता देश में गरीबी एक मुख्य चुनौती है जो विश्वगुरु बनने में बाधा डाल रही है।
दूसरी चुनौती, सामाजिक विभाजन और असहिष्णुता को कम करना है। हमारा देश एक बहुसंस्कृति, बहुधार्मिक और बहुभाषी है। इस विविधता का सम्मान करना और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना विश्वगुरु बनने के लिए आवश्यक है। जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव को मिटाने के लिए कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।
तीसरी चुनौती, शिक्षा प्रणाली में सुधार करना है। प्राचीन समय से ही देश में तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय जैसे शिक्षा के केंद्र रहे हैं, परंतु अब विश्वगुरु बनने के लिए भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मानव पूंजी तैयार करने की आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षा प्रणाली में रचनात्मकता को बढ़ावा देने और व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
चौथी चुनौती, राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है। विश्वगुरु बनने के लिए देश को मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और अलगाववादी ताकतों को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है। जनता के बीच राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना और शासन में पारदर्शिता लाना भी आवश्यक है।
पांचवीं चुनौती, पर्यावरण की रक्षा करना है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण विश्व के लिए गंभीर खतरा हैं। देश को सतत विकास के सिद्धांतों को अपनाना चाहिए और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाना चाहिए। हरित क्रांति का दूसरा चरण, जिसमें जल और मिट्टी के संरक्षण पर जोर दिया जाए, महत्वपूर्ण है। इन चुनौतियों के अलावा, देश को वैश्विक मामलों में नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करने की भी आवश्यकता है। वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार लाने, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का समाधान खोजने में देश सक्रिय भूमिका निभा सकता है।
विविधता बनाती सशक्त
अंशुल के अनुसार भारत का विश्वगुरु बनने का सफर चुनौतीपूर्ण है, लेकिन असंभव नहीं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए दृढ़ संकल्प, रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। यदि भारत अपनी विविधता को अपनी ताकत बना लेता है, अपने युवाओं को शिक्षित और सशक्त बनाता है और सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ता है तो वह निश्चित रूप से विश्वगुरु के रूप में उभर सकता है।
विशेषज्ञ की राय
प्रतिभागी अंशुल के तर्क उचित हैं। इन्हें आंकड़ों के साथ दर्शाया गया है। सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी और राजनीति से संबंधित सभी समस्याओं और चुनौतियों पर विचार किया गया है। लेखक ने सुझाव दिए हैं। मुद्दे पर कायम रहना और उन पर विचार करना इस प्रस्तुति की अन्य खूबियां रहीं। सुझावों पर विचार करना व समस्याओं का समाधान करना बेहद जरूरी है।
-डॉ. राजेश कुमार, अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, एमडीयू।
यह भी जानें
ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में आगे रहने के कारण भारत को विश्वगुरु कहा जाता था। भगवान राम और कृष्ण की भूमि भारत में बाद में बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध और जैन धर्म के संस्थापक महावीर का जन्म हुआ। उनके अनुयायी पूरी दुनिया में फैले हुए हैं और ज्ञान का प्रसार कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के आंकड़ों के मुताबिक भारत की आबादी 142.86 करोड़ हो गई है। यह चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राष्ट्र बन गया है। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था दुनिया को राह दिखाती है। दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत के पास ही है। वेद, गीता, रामायण आदि धर्मग्रंथों का दुनिया ने अनुकरण किया।