फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

युवा नजरिया: असमानता-बेरोजगारी से जीते तभी बनेंगे विश्वगुरु.. भारत के विश्वगुरु बनने की राह पर युवाओं के विचार

Thu, 11 Jan 2024 12:13 AM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)

सार

अपना देश ज्ञान, संस्कृति और व्यापार का केंद्र है। सदियों से दुनिया को प्रेरणा दे रहे देश को विश्वगुरु बनना है। इस राह में कठिन चुनौतियां हैं। इन्हें दूर करते हुए सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी और राजनीति से संबंधित सभी समस्याओं और चुनौतियों पर विचार करने व इनका समाधान करने की जरूरत है। आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना होगा। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है, लेकिन गरीबी, असमानता और बेरोजगारी बड़ी समस्याएं हैं। इनका समाधान विश्वगुरु बनने की राह आसान बनाएगा।
विज्ञापन
अंशुल, एमए अंतिम वर्ष पत्रकारिता विभाग, एमडीयू। -डॉ. राजेश कुमार, अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, एमडीयू - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के विश्वगुरु बनने की राह में चुनौतियों पर एमडीयू के पत्रकारिता विभाग के एमए अंतिम वर्ष के छात्र अंशुल कहते हैं कि हमारा देश विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है। हमारा प्राचीन इतिहास विश्वगुरु के रूप में गौरवशाली रहा है। प्राचीन काल में देश को विश्वगुरु कहा जाता था क्योंकि शुरू से ही शिक्षा का केंद्र रहा है। ज्ञान, संस्कृति और व्यापार का केंद्र होने के नाते, भारत सदियों से दुनिया को प्रेरणा देता रहा है। हालांकि, 21वीं सदी के भारत के समक्ष विश्वगुरु बनने की राह में कई कठिन चुनौतियां हैं।

विज्ञापन


पहली प्रमुख चुनौती आर्थिक विकास की गति को बनाए रखना है। वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है, लेकिन गरीबी, असमानता और बेरोजगारी अभी बड़ी समस्याएं हैं। इन समस्याओं को सुलझाने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास, शिक्षा प्रणाली में सुधार और रोजगार के नए अवसर का सृजन करना आवश्यक है। केंद्र सरकार का कहना है कि वह लगभग 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन प्रदान कर रही है। इससे पता चलता देश में गरीबी एक मुख्य चुनौती है जो विश्वगुरु बनने में बाधा डाल रही है।

दूसरी चुनौती, सामाजिक विभाजन और असहिष्णुता को कम करना है। हमारा देश एक बहुसंस्कृति, बहुधार्मिक और बहुभाषी है। इस विविधता का सम्मान करना और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना विश्वगुरु बनने के लिए आवश्यक है। जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव को मिटाने के लिए कठोर कदम उठाए जाने चाहिए।
विज्ञापन


तीसरी चुनौती, शिक्षा प्रणाली में सुधार करना है। प्राचीन समय से ही देश में तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय जैसे शिक्षा के केंद्र रहे हैं, परंतु अब विश्वगुरु बनने के लिए भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मानव पूंजी तैयार करने की आवश्यकता है। इसके लिए शिक्षा प्रणाली में रचनात्मकता को बढ़ावा देने और व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।

चौथी चुनौती, राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है। विश्वगुरु बनने के लिए देश को मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार, सांप्रदायिकता और अलगाववादी ताकतों को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है। जनता के बीच राजनीतिक जागरूकता बढ़ाना और शासन में पारदर्शिता लाना भी आवश्यक है।

पांचवीं चुनौती, पर्यावरण की रक्षा करना है। जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण विश्व के लिए गंभीर खतरा हैं। देश को सतत विकास के सिद्धांतों को अपनाना चाहिए और पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को अपनाना चाहिए। हरित क्रांति का दूसरा चरण, जिसमें जल और मिट्टी के संरक्षण पर जोर दिया जाए, महत्वपूर्ण है। इन चुनौतियों के अलावा, देश को वैश्विक मामलों में नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करने की भी आवश्यकता है। वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार लाने, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का समाधान खोजने में देश सक्रिय भूमिका निभा सकता है।

विविधता बनाती सशक्त 
अंशुल के अनुसार भारत का विश्वगुरु बनने का सफर चुनौतीपूर्ण है, लेकिन असंभव नहीं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए दृढ़ संकल्प, रचनात्मकता और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। यदि भारत अपनी विविधता को अपनी ताकत बना लेता है, अपने युवाओं को शिक्षित और सशक्त बनाता है और सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ता है तो वह निश्चित रूप से विश्वगुरु के रूप में उभर सकता है।  

विशेषज्ञ की राय
प्रतिभागी अंशुल के तर्क उचित हैं। इन्हें आंकड़ों के साथ दर्शाया गया है। सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी और राजनीति से संबंधित सभी समस्याओं और चुनौतियों पर विचार किया गया है। लेखक ने सुझाव दिए हैं। मुद्दे पर कायम रहना और उन पर विचार करना इस प्रस्तुति की अन्य खूबियां रहीं। सुझावों पर विचार करना व समस्याओं का समाधान करना बेहद जरूरी है। -डॉ. राजेश कुमार, अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, एमडीयू।

यह भी जानें 
ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में आगे रहने के कारण भारत को विश्वगुरु कहा जाता था। भगवान राम और कृष्ण की भूमि भारत में बाद में बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध और जैन धर्म के संस्थापक महावीर का जन्म हुआ। उनके अनुयायी पूरी दुनिया में फैले हुए हैं और ज्ञान का प्रसार कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के आंकड़ों के मुताबिक भारत की आबादी 142.86 करोड़ हो गई है। यह चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राष्ट्र बन गया है। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था दुनिया को राह दिखाती है। दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान भारत के पास ही है। वेद, गीता, रामायण आदि धर्मग्रंथों का दुनिया ने अनुकरण किया।  

सुमेधा चौहान, छात्रा एमएजेएमसी, एमडीयू। - फोटो : स्वंय
विश्वगुरु बनने की दिशा में कई चुनौतियां: सुमेधा चौहान 
अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के साथ-साथ, आज भारत के विश्वगुरु बनने की दिशा में कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस रास्ते में हमें कई संजीवनी बूटियों की जरूरत है जो भारत को विश्व मंच पर आगे ले जाएंगी।

शिक्षा के स्तर को बढ़ाना
विश्वगुरु बनने के लिए हमें शिक्षा के स्तर को बढ़ाना होगा। हमे ये सुनिश्चित करना होगा की शिक्षा को सामूहिक रूप से  सभी तक पहुंचा सके साथ ही गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा आज के समय में तकनीकी और वैज्ञानिक शिक्षा में विशेषज्ञता प्राप्त करना बहुत जरूरी है।

सुरक्षा और स्वास्थ्य
भारत को विश्वगुरु बनाने में सुरक्षा और स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण योगदान होना चाहिए। नागरिकों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के लिए सबसे उच्च मानकों को अपनाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

संस्कृति का संरक्षण
हम भारत देश के वासी हैं, भारतीय संस्कृति और समृद्धि हमारी पहचान है। अपनी संस्कृति को बचाए रखना हमारी जिम्मेदारी है। भारत के विश्वगुरु बनने की राह में संस्कृति एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हमें अपनी मूल्यों और इतिहास को समर्थन करने का अवसर देता है।

अनुसंधान और नवाचार
अनुसंधान और नवाचार भी एक जरूरी हिस्सा है और भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए हमें अनुसंधान और नवाचार में आगे बढ़ना होगा। नए विचारों को प्रोत्साहित करने और उनपर अमल करने के लिए योजनाएं बनानी चाहिए ताकि हम अपनी सोच को सच कर सकें।

सामाजिक और आर्थिक स्तिथि
विश्वगुरु की दौड़ में आगे निकलने के लिए लिए हमें सामाजिक और आर्थिक स्तर पर उत्थान करना होगा। हमें ये समझने की जरूरत है कि समृद्धि का सबसे बड़ा स्रोत लोगों की सोच, उनकी ऊर्जा और सामाजिक संबंध हैं। भारत को विश्वगुरु बनाने में ये चुनौतियां तो बहुत हैं, लेकिन ये भी एक अद्वितीय अवसर है, जिसे हमें दिशा देनी होगी जो भारत के विश्वगुरु बनने के सपने को सच करने में जरूरी है। 
विज्ञापन

आशीष कुमार, छात्र, एमएजेएमसी, एमडीयू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विश्वगुरु बनने की यात्रा में एक बहुपक्षीय दृष्टिकोण की आवश्यकता: आशीष कुमार
भारत को विश्व गुरु बनने की दिशा में कई कठिनाइयां हैं, जिन्हें रणनीतिक समाधानों की आवश्यकता है। एक प्रमुख रुकावट यह है कि समग्र शिक्षा सुधार की आवश्यकता है। शिक्षा प्रणाली कृतिक विचार, रचनात्मकता और कौशल को बढ़ावा देने के लिए होनी चाहिए। आधुनिक शिक्षा विधियों का परिचय करना, उभरती हुई तकनीकों को शामिल करना और व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना, इस चुनौती का समाधान कर सकता है।

एक और महत्वपूर्ण बाधा भाषा की है, जो वैश्विक संवाद को रोक रही है। स्वदेशी भाषाओं को संरक्षित रखना और प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय भाषाओं के सीखने पर जोर देने की आवश्यकता है। इंग्लिश की व्यापक अध्ययन को बढ़ावा देने के साथ, अन्य प्रमुख वैश्विक भाषाओं की सीखने की भी आवश्यकता है, जो भारत की वैश्विक पहुंच को बढ़ावा देगी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर सहयोग को सरल बनाए रखेगी।

गरीबी, असमानता, और मौलिक सुविधाओं की पहुंच की कमी जैसे सामाजिक मुद्दे भी चुनौतियां पैदा करते हैं। इन रुकावटों को पार करने के लिए, समृद्धि पर ध्यान केंद्रित रहना चाहिए। लक्षित सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को लागू करना, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को सुधारना और आर्थिक असमानताओं का समाधान करना एक समृद्धि युक्त समाज बनाने में मदद कर सकता है।

इसके अलावा, नवाचार और अनुसंधान को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। भारत को विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन और विकास में अधिक निवेश की आवश्यकता है। दुनिया भर में प्रमुख अनुसंधान संस्थान स्थापित करना, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करना और नवाचार के लिए प्रोत्साहन प्रदान करना तकनीकी प्रगति में योगदान करेगा, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति में सुधार होगा।

राजनीतिक संबंधों और वैश्विक सहयोग को मजबूत करना एक और महत्वपूर्ण पहलु है। भारत को अंतरराष्ट्रीय सहयोग में सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए, विशेषज्ञता साझा करना चाहिए और वैश्विक समस्या-समाधान पहलुओं में योगदान करना चाहिए। दूतावासिक संबंधों को मजबूत करना न केवल भारत की वैश्विक छवि को बढ़ावा देगा, बल्कि ज्ञान आदान-प्रदान और साझा विकास को भी सुगम बनाए रखेगा।

भारत को विश्वगुरु बनने की यात्रा में एक बहुपक्षीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है। शिक्षा सुधार, भाषा कुशलता, सामाजिक विकास, नवाचार, और राजनीतिक संबंध सभी ऐसे पहलु हैं जिन्हें ध्यानपूर्वक और सतत प्रयास की आवश्यकता है। इन कठिनाइयों का व्यवस्थित रूप से समाधान करना भारत के लिए 21वीं सदी में एक नेतृत्वीय वैश्विक बल की राह बनाएगा।

प्रविष्टि के लिए आलेख भेजें प्रतियोगी
प्रतियोगी विद्यार्थियों के लिए अमर उजाला लेखन प्रतियोगिता का उद्देश्य यूपीएससी, एचपीएससी, नेट/जेआरएफ और अन्य परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सामयिक विषयों के प्रति युवाओं की सोच को मंच देना है। दिए गए विषय पर युवा अधिकतम 300 शब्दों में अपना आलेख 14 जनवरी तक पासपोर्ट साइज की तस्वीर, नाम-पते और फोन नंबर के साथ ई-मेल आईडी roh-dakincharge@roh.amarujala.com पर भेज सकते हैं। निर्धारित तिथि तक प्राप्त आलेखों का मूल्यांकन विशेषज्ञों से कराया जाएगा। सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टि अमर उजाला में प्रकाशित होगी। लेख मौलिक होना चाहिए। जिसका विषय इस बार 'राम मंदिर - सियासी मंच या आस्था का समारोह' है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें