गांव भराण के जयदेव राठी के अनुसार एमएसपी को लेकर फिर बवाल मचा है। दिल्ली कूच को बेताब पंजाब के किसान हरियाणा की सीमा पर डेरा डाले हुए हैं। सरकार से अपनी फसलों का उचित मूल्य पाने व अन्य मांगों को लेकर किसान संघर्षरत हैं। हरियाणा में भी किसान जगह-जगह धरना देकर बैठे हैं। ऐसे में यह मुद्दा अहम बन जाता है। पिछले आंदाेलन में सरकार ने किसानों से एमएसपी देने का वादा किया था। यह वादा पूरा नहीं होने से आहत किसान फिर सड़क पर उतर आया है। फिलहाल हालात नाजुक हैं। प्रदेश की सीमा पर तनाव बना हुआ है। हालात बिगड़े तो आंदोलन बढ़ सकता है।
फसल की लागत, बाजार में मांग, कीमत देखकर तय होता है एमएसपी
सबसे पहले तो हमें यह समझने की जरूरत है कि एमएसपी क्या होता है। केंद्र सरकार ने किसानों की फसलों को उचित मूल्य दिए जाने के उद्देश्य से साल 1965 में कृषि लागत और मूल्य आयोग का गठन किया था। यह हर साल रबी और खरीफ फसलों के लिए एमएसपी तय करती है। पहली बार एमएसपी दर 1966-67 में लागू की गई थी। एमएसपी वह न्यूनतम समर्थन मूल्य होता है, जिस पर सरकार किसानों की फसल खरीदती है। केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से फसलों का मूल्य एक तरह से निर्धारित किया जाता है। जिस भी फसल का एमएसपी घोषित हो चुका होता है, वह फसल बाजार में भले ही कम मूल्य पर बिक रही है, लेकिन सरकार को उसे निर्धारित मूल्य पर ही खरीदना पड़ेगा। सरकार फसल का एमएसपी बहुत से कारकों को ध्यान में रखकर तय करती है। एमएसपी तय करने के लिए सरकार फसल की लागत, बाजार में उसकी मांग, कीमत सब तरह की परिस्थितियां देखकर तय करती है।
23 फसलों पर एमएसपी लागू
इस समय 23 फसलों पर एमएसपी लागू है। किसानों से 23 फसलें खरीदी जाती हैं। इनमें सात अनाज, जिसमें ज्वार, बाजरा, धान, मक्का, गेहूं, जौ और रागी शामिल हैं। पांच दालें, जिसमें मूंग, चना, उड़द, अरहर और मसूर शामिल हैं। इसके अलावा सात तिलहन फसलें होती हैं। चार फसलें व्यावसायिक फसलें हैं, जो कपास, खोपरा, गन्ना और कच्चा जूट होता है। एमएसपी केंद्र सरकार के साथ ही राज्य सरकारें भी लागू करती हैं।
सरकार की एमएसपी पर नीति और क्या अड़चन आ रही
यह गंभीर विषय है और इस पर सभी को सोचने-समझने की जरूरत है। सरकार किसानों को एमएसपी की गारंटी क्यों नहीं देना चाहती। यह हमें समझना होगा। किसानों का कहना है कि सरकार हमें एमएसपी की गारंटी दे और इन 23 फसलों के अलावा अन्य फसलों को भी सरकार खरीदे। सरकार का कहना है कि अगर एमएसपी लागू किया गया तो देश की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा जाएगी, जिससे देश के विकास में बाधा उत्पन्न होगी। सरकार का अपना तर्क है कि एमएसपी को कानूनी बनाना मुनासिब नहीं है। देश में आर्थिक तंगी आ जाएगी।यह सरकार द्वारा तर्क दिए जा रहे हैं।
किसान संगठनों की मांग, सभी फसलों पर एमएसपी लागू हो
किसान संगठनों का कहना है कि 23 फसलों पर ही नहीं, बल्कि सभी फसलों पर एमएसपी लागू हो। अब सरकार का अपना तर्क है कि जो देश के सभी नागरिकों और बुद्धिजीवियों को समझना भी जरूरी है। कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा के अनुसार, इस कानून को अमलीजामा पहनाना मुश्किल है। एमएसपी किसी भी देश में नहीं दिया जा रहा है। अब सरकार का कहना है कि एमएसपी का लाभ सिर्फ छह फीसदी किसानों को मिल पाता है, जिसका सीधा मतलब 94 फीसदी किसान इसके दायरे से बाहर हैं। देश में 15 करोड़ किसान हैं, जिसमें छह फीसदी किसानों की संख्या 90 लाख है। सिर्फ इन्हें ही इसका फायदा पहुंच पाता है। अब बात समझने की है कि केंद्र सरकार पर इसका क्या बोझ पड़ने वाला है।
2024-25 का कुल बजट 45 लाख करोड़ रुपये
केंद्र सरकार का साल 2024-25 का कुल बजट 45 लाख करोड़ रुपये है, जो देश के विकास कार्यों में अलग-अलग जगह पर लगाया जाता है। अभी सरकार 23 फसलों पर एसपी पर सरकार 2.5 लाख हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। बजट का पांच फीसदी हिस्सा खर्च कर रही है। एमएसपी पर कानून बनता है तो इन 23 फसलों पर ही 17 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। अगर सरकार सभी खाद्यान्न फसलों को न्यूनतम मूल्य पर खरीद करेगी तो 40 लाख करोड़ खर्च आएगा।
सरकार का कहना है कि पांच लाख करोड़ में पूरे देश का विकास कैसे संभव हो पाएगा। सरकार का कहना है कि कई फसलों का एमएसपी 10 वर्षों में दोगुना कर दिया है, लेकिन सरकार लिखित गारंटी देने में ही हिचक रही है। एमएसपी फसल की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। जिन फसलों की गुणवत्ता कमजोर है, उस फसल का क्या मूल्य होगा। उस फसल को कैसे खरीदा जाएगा? एमएसपी बनने पर सरकार के सामने मजबूरी हो जाएगी खराब गुणवत्ता वाली फसल को खरीदने की। एमएसपी गांरटी कानून बनाने पर सरकार के सामने निजी कंपनियों की मुसीबत खड़ी हो जाएगी। खराब गुणवत्ता की फसल को निजी कंपनियां नहीं खरीद करेंगी, जिससे कंपनी और किसानों में कानूनी लड़ाई और मुकदमे बढ़ेंगे। सरकार के सामने सबसे बड़ी अडचन यह है कि सभी फसलों को खरीदकर भंडारण कहां करेगी।
नौकरीपेशा, मध्यम वर्ग और गरीबों पर पड़ सकता है एमएसपी का बोझ
सरकार के पास फसल भंडारण करने के लिए भंडार व्यवस्था नहीं है। सभी फसलों को खरीदकर सरकार को फसलों को खुले में रखने पर मजबूर होना पड़ेगा, जिससे अनाज खराब होगा। उसकी कीमत बाजार में गिर जाएगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में फसलों को ऊंची कीमतों पर खरीदकर कम कीमत होने पर निर्यात करना मुश्किल हो जाएगा। सरकार का कहना है कि एमएसपी का बोझ नौकरीपेशा, मध्यम वर्ग और गरीबों पर पड़ सकता है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि सरकार 17 लाख करोड रुपये कहां से जुटाएगी।
क्या रक्षा बजट में कटौती करेगी या फिर इंफ्रास्ट्रक्चर में कटौती करेगी। सरकार का कहना है कि यह फैसला देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने वाला होगा। जिस रफ्तार से अर्थव्यवस्था चल रही है, वह पटरी से उतर जाएगी। सरकार का एक तर्क यह सही भी है कि आज कई देशों की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। गरीबों को दी जाने वाली सुविधाओं पर असर पड़ेगा।
एक्सपर्ट की राय
लेख का विषय ज्वलंत है। यह बेहद अहम भी है। प्रतिभागियों ने इस पर खुलकर विचार रखे हैं। सभी ने हर पहलू का स्पष्ट उल्लेख किया है। एमएसपी क्या है? यह क्यों जरूरी है व किसान की पीड़ा दर्शाने का बेहतर प्रयास किया गया है। एमएसपी किसानों के लिए अहम है। इसके लिए उठाया जा रहा आंदोलन का कदम सरकार के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण है। इसे शांति व सौहार्दपूर्ण माहौल में कैसे सुलझाते हुए समाधान हो, इस पर सभी को सोचना होगा।
- डॉ. राजेश कुमार, अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, एमडीयू।