रोहतक। नाबालिग ने अदालत में कहा कि उससे थाने में पुलिस ने कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाए थे। वह तो अपनी मर्जी से मामा के घर गई थी। एएसजे संदीप दुग्गल की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोपी भिवानी निवासी राहुल को बरी कर दिया।
पुलिस रिकाॅर्ड के मुताबिक, आईएमटी थाने में करीब एक साल पहले एक व्यक्ति ने शिकायत दी थी कि उसकी नाबालिग बेटी रात को बिना किसी को बताए घर से लापता हो गई थी। उन्हें संदेह था कि कोई युवक उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया है।
पुलिस ने अज्ञात युवक के खिलाफ बहला-फुसलाकर ले जाने का केस दर्ज कर जांच की। इसके बाद नाबालिग को आरोपी युवक राहुल के पास से बरामद किया था। कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज करवाए गए।
पिता बोले- बेटी का किसी ने नहीं किया अपहरण
कोर्ट में आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। पिता ने गवाही के दौरान कहा कि उसकी बेटी परिवार के किसी सदस्य को बताए बगैर अपनी मर्जी से मामा के घर गई थी। तलाश की तो नहीं मिली। उसने पुलिस को कोई शिकायत नहीं की और न ही उसकी बेटी का किसी ने अपहरण किया।
इसके बाद युवती की अदालत में गवाही हुई। उसने कहा कि वह अपने घर से अकेली निकली थी इसलिए मामा के घर चली गई। कुछ समय बाद लौट आई। पिता उसे पुलिस स्टेशन ले गए जहां पुलिस ने कोरे कागज पर उसके हस्ताक्षर करा लिए थे। वह अदालत में उपस्थित आरोपी को नहीं जानती।