रोहतक। आर्थिक तंगी और अभाव के बीच जब हौसले बुलंद हों तो सफलता खुद पर खुद कदम चूमती है। यह कहानी है झारखंड के बड़गाईं की होनहार क्रिकेटर निशात अफजा की। ऑलराउंडर बेटी पिता के सीमित संसाधनों और गरीबी को पीछे छोड़ पिच पर नई इबारत लिख रही हैं। वह बल्लेबाजी बेहतर तरीके से करती हैं।
निशात रोहतक शहर में चल रही अंडर-17 राष्ट्रीय बालिका क्रिकेट चैंपियनशिप में झारखंड की टीम की ओर से पहली बार हिस्सा ले रही हैं। पिता अनवर आलम होमगार्ड के रूप में नौकरी करते हैं। घर की माली हालत ऐसी है कि कई बार दो वक्त की रोटी तक का इंतजाम नहीं हो पाता। इनकी दो बहनें और हैं। कोई भाई नहीं है।
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पिता बेटी के किराये के लिए पैसे तक नहीं जुटा पाते हैं लेकिन बेटी ने विपरीत स्थितियों से कभी हारना नहीं सीखा। वह घर से दो किलोमीटर पैदल ही क्रिकेट स्टेडियम में अभ्यास करने जाती हैं। पिता की हल्की जेब को बेटी ने कभी बाधा नहीं बनने दिया। फिलहाल, निशात अपनी नानी के साथ रांची के बड़गाईं में रहकर क्रिकेट के गुर सीख रही हैं और अब राष्ट्रीय स्तर पर अपने टैलेंट का लोहा मनवा रही हैं।
क्रिकेटर बनने के लिए सपने के लिए छोड़ दिया था टेनिस
निशात ने बताया कि 2025 में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। इससे पहले वह टेनिस खेलती थीं लेकिन क्रिकेटर बनने के सपने को साकार करते हुए क्रिकेट खेलना शुरू किया। वह जिलास्तर पर सीनियर और अंडर-19 में टीम के साथ दूसरे स्थान पर रही हैं।