फ्री स्टाइल कुश्ती की दुनिया में अकहरी दाव एक बड़ा दाव माना जाता है। आमतौर पर पहलवान के दिमाग में होता है कि यह दाव अकेले दाएं पैर पर बेहतर तरीके से लगाया जा सकता है। वर्ष 2004 के ओलंपिक के फ्री स्टाइल 60 किलोभार वर्ग के गोल्ड मेडलिस्ट यांद्रो क्विंटाना का मानना है कि अकहरी लेग दाव दोनों पैरों पर लगाया जा सकता है। वे रविवार को शही की देव कॉलोनी स्थित मेहर सिंह अखाड़े में पहलवानों को नए दाव पेंच सिखाने पहुंचे थे।
कुश्ती की दुनिया में रोहतक की ख्याति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 13764 किलोमीटर की दूरी से एक ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट पहलवान रोहतक आकर यहां के पहलवानों को कुश्ती की बारीकियां सिखाने के साथ-साथ अपना अनुभव भी साझा कर रहा है। उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप के देश क्यूबा से यांद्रो क्विंटाना दो दिन के लिए रोहतक आए थे। उन्होंने मेहर सिंह अखाड़े में फ्री स्टाइल के पहलवानों को स्टैंडिंग व ग्राउंड मैट पोजीशन के दाव पेंच सिखाए। यहां उन्होंने स्टेडिंंग में डबल लैग, डबल डूबी, वन लैग, अकहरी दाव तो ग्राउंड पोजीशन में भारंदाज, शीतले जैसे दाव पेंच की बारीकियां सिखाई।
रोहतक के पहलवानों से है दोस्ती
अखाड़े के कोच रणबीर ढाका ने बताया कि क्यूबाई पहलवान यहां के पहलवानों के रहन-सहन व खान-पान के बारे में जानना चाहते थे। उन्होंने बताया कि अखाडे़ के संचालक मेहर सिंह के दामाद व अंतरराष्ट्रीय पहलवान हरदीप के क्यूबाई पहलवान के साथ अच्छे संबंध हैं।इनके चलते ही वे रोहतक पहुंचे थे। वहीं अखाड़े के अन्य कोच अमरजीत ने बताया कि अखाड़े के पहलवान सोनू व रमन राठी बंगलूरू स्थित जिंदल स्पोर्ट्स वेलफेयर (जेएसड्ब्ल्यू) में चयनित होकर वहां पर अभ्यास करते हैं। वहीं पर उनकी पहचान यांद्रो के साथ हुुई थी।
ये है यांद्रो क्विंटाना की पहचान
कुश्ती की दुनिया में क्यूबाई पहलवान येनड्रो क्विनटाना को वर्ष 2004 में एथेंस (ग्रीक) में हुए ओलंपिक खेलों से अलग पहचान मिली। उन्होंने फ्री स्टाइल के 60 किलो भारवर्ग में खेलते हुए पूरे टूर्नामेंट में विरोधी पहलवान को महज एक प्वाइंट दिया था। उन्होंने फाइनल में इरानी पहलवान को मात देकर गोल्ड मेडल पहना था। भारतीय कुश्ती प्रेमी यांद्रो को इसलिए भी नहीं भूल पाएंगे क्योंकि उन्होंने टूर्नामेंट के पूल मैच में भारतीय पहलवान सुशील कुमार को 3-0 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर किया था।
राहुल आवारे व उत्कर्ष काले को सीखा चुके हैं दाव पेंच
अखाड़े के कोच रणबीर ढाका ने बताया कि यांद्रो क्विंटाना इससे पहले भी भारतीय पहलवानों को दाव पेंच सीखा चुके हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के दो पहलवानों को कुश्ती की बारीकियां सीखाई हैं। जिनमें 57 किलो भारवर्ग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले राहुल अवारे व प्रो रेसलिंग लीग फेम 57 व 61 किलो भारवर्ग में खेलने वाले उत्कर्ष काले का नाम शामिल है।