झज्जर। सिद्ध श्री बाबा प्रसाद गिरी मंदिर के पुजारी नरेंद्र कुमार ने बताया है कि 8 सोमवार को सुबह 3 बजकर 21 से रात्रि 11 बजकर 50 तक अमावस्या है। जो भी अमावस्या सोमवार के दिन आती है, वो सोमवती अमावस्या कहलाती है। शास्त्रों में सोमवती अमावस्या के दिन अमावस्या को पितरों के पूजन के लिए बहुत फलदायी माना गया है। इस शुभ तिथि पर स्नान आदि से निवृत्त होकर अपने पूर्वजों का पितरों के निमित्त, श्राद्ध, पिंडदान, पितृ तर्पण पूजा, जप, तप और दान करने का विधान है। जिनको अपने पूर्वजों का नाम याद ना हो, वह भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी को ही अपने पूर्वज मानकर उनकी पूजा कर सकते हैं। इस दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करने का विशेष फल प्राप्त होता है और पितृ प्रसन्न होते हैं। सोमवती अमावस्या पर लहसुन, प्याज आदि तामसिक चीजों का इस्तेमाल भोजन, प्रसाद में नहीं करना चाहिए अन्यथा पितृ रुष्ट हो जाते हैं। यह इस्तेमाल करने से मनुष्य को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।