संवाद न्यूज एजेंसी
रोहतक। दीपावली से पहले ही जिले की हवा बिगड़ने लगी है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रविवार शाम को 300 के करीब पहुंच गया। रविवार रात व सोमवार को लगातार आतिशबाजी से इसमें लगातार वृद्धि हो सकती है। यह स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीपावली के बाद एक्यूआई और भी बढ़ेगा। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने दीपावली पर ग्रीन पटाखे दो घंटे छोड़ने की अनुमति दे रखी है। आदेश दिए थे कि निर्धारित जगह पर ही ग्रीन पटाखों की बिक्री हो सकती है। इसके बावजूद शहर में किसी ने न तो पटाखों की बिक्री के लिए लाइसेंस लिया और न ही प्रशासन ने कोई कदम उठाया।
बिना लाइसेंस ही शहर में खुलेआम पटाखों की बिक्री हो रही है। न ही पटाखों की जांच करने के लिए कोई टीम गठित है। लगातार आतिशबाजी से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। 13 अक्तूबर को एक्यूआई 59 था, अब यह 300 के करीब पहुंच गया है।
रोहतक का एक्यूआई 290 दर्ज किया गया है, यह खराब श्रेणी में आता है। जिला में ग्रैप (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) की दूसरी स्टेज के करीब है। इसमें ग्रैप-2 के नियम भी लागू हो गए हैं। एक्यूआई बढ़ने से वायु प्रदूषण के कारण लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
नौ दिन में यूं बढ़ा वायु प्रदूषण
दिनांक एक्यूआई श्रेणी
10 अक्तूबर 200 अस्वस्थ
11 अक्तूबर 193 अस्वस्थ
12 अक्तूबर 116 अस्वस्थ
13 अक्तूबर 59 संतोषजनक
14 अक्तूबर 221 बहुत खराब
15 अक्तूबर 199 अस्वस्थ
16 अक्तूबर 214 बहुत खराब
17 अक्तूबर 287 बहुत खराब
18 अक्तूबर : उपलब्ध नहीं
19 अक्तूबर : 290 बहुत खराब
नोट : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार।
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यह लागू हो गए ग्रैप-2 के प्रतिबंध
डीजल जनरेटर पर रोक। कूड़ा जलाने पर रोक। निर्माण सामग्री को ढककर रखना। निमार्णाधीन साइटों पर एंटी स्माॅग गन लगाना अनिवार्य। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर जुर्माना। होटल और ढाबों में तंदूर पर रोक।
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शांत मौसम, कम हवा की गति और गिरता तापमान रोहतक सहित पूरे दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के उच्च स्तर का कारण बन रहे हैं। पराली जलाने का योगदान इस समय केवल 2-3 प्रतिशत है और दिवाली के दौरान इसमें भारी वृद्धि की उम्मीद नहीं है। यदि पटाखों से उच्च उत्सर्जन हुआ तो दिवाली की रात और उसके बाद की सुबह वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से खराब और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
- डाॅ. अरुण कुमार यादव, क्लीन एयर प्रोग्राम मैनेजर, एनवायरोकैटलिस्ट्स