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World Theatre Day: विश्वदीपक ने थिएटर से लोगों के दिलों से निकाला कोरोना का डर, रोहतक से की थी सफर की शुरुआत

Thu, 27 Mar 2025 07:48 AM IST
नवीन दलाल देवेन्द्र दीक्षित, रोहतक (हरियाणा)

सार

विश्वदीपक त्रिखा (71) करीब 50 साल से थिएटर कर रहे हैं। उन्होंने 1970 में गुरुग्राम में अपने पहले नाटक का मंचन किया था। वे अब तक 500 से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुके हैं।
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विश्व थियेटर दिवस - फोटो : संवाद
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विस्तार
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वैश्विक महामारी कोविड-19 के बाद जब देश-दुनिया में लाखों लोगों की माैतों से हर तरफ निराशा का अंधेरा फैला हुआ था, तब रोहतक के विश्वदीपक त्रिखा थिएटर (रंगमंच) से लोगों में उम्मीदों की रोशनी पैदा कर रहे थे। लोगों में फैला कोरोना का डर दूर करने के लिए विश्वदीपक ने अपनी सप्तक कल्चरल सोसायटी के सहयोग से 'घर फूंक थिएटर' शुरू किया। दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, बंगाल और राजस्थान से टीमें बुलाकर शो कराए। यह सिलसिला आज भी जारी है। सप्तक सोसायटी अब तक 100 से अधिक शो कर चुकी है।

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हरियाणा कला परिषद के पूर्व निदेशक, रंंगकर्मी व अभिनेता रोहतक निवासी विश्वदीपक त्रिखा बताते हैं कोविड-19 में लाॅकडाउन से सब काम बंद हो गए थे। ऐसे में लोगों को कोराना से निराश होते देख उन्होंने 15-20 कलाकारों संग सप्तक कल्चरल सोसायटी बनाई। 2021 में आईएमए हाॅल में पहला शाे किया। इसमें बंगाल से आईं कलाकार मोनालिसा ने भोरेर आसेस नाम से सोलो प्ले किया। इस प्ले के बाद साथी कलाकारों ने रोहतक व आस पास के शहरों में शो शुरू किए, जो आज तक जारी हैं।

50 साल से थिएटर कर रहे हैं विश्वदीपक
विश्वदीपक त्रिखा (71) करीब 50 साल से थिएटर कर रहे हैं। उन्होंने 1970 में गुरुग्राम में अपने पहले नाटक का मंचन किया था। वे अब तक 500 से अधिक नाटकों में अभिनय कर चुके हैं। वे दिवंगत अभिनेता सतीश काैशिक की फिल्म छोरियां छोरों से कम नहीं होती, प्रेमी रामफल हरियाणवी, जुर्म की दास्तान व न्यूज चैनल के लिए मुख्यमंत्री जैसे पाॅपुलर शो कर चुके हैं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर फिल्माए गए मुख्यमंत्री शो में उन्होंने योगी के पिता की भूमिका निभाई थी। विश्वदीपक इंटरनेशनल थिएटर फेस्टिवल में भी प्ले कर चुके हैं। एनएसडी के लिए दिल्ली में दो और नाॅर्थ ईस्ट में 5 शो किए हैं। वे एनएसडी के भारत रंग महोत्सव के 3 साल तक चयन समिति के सदस्य रहे हैं। हरियाणा कला परिषद में 2008 से 2014 तक निदेशक भी रह चुके हैं।
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गधे की बरात के देशभर में कर चुके 350 से अधिक शो
विश्वदीपक बताते हैं कि उनका लोकप्रिय नाटक गधे की बरात है। यह इतना पाॅपुलर है कि देशभर में वे इसके 350 से अधिक शो कर चुके हैं। इसके अलावा सप्तक कल्चरल सोसायटी के साथ वे बेचारा भगवान, कुकुरमुत्ते, तीन सुकरात, अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, इतिहास चक्र, त्रिशंकु, सिंहासन खाली है, जुलूस, रस गंधर्व, अंधों का हाथी, आगत की प्रतिक्षा, एक तमाशा अच्छा खासा, बकरी, बीवियों का मदरसा, सैयां भए कोतवाल, एक था गधा उर्फ अलादाद खान, अंधेर नगरी, एक गधे की आत्मकथा, किस्सागोई, दयाशंकर की डायरी, डेढ़ इंच ऊपर और वर्दी का मंचन किया है।

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