बहादुरगढ़। कोरोना महामारी के बाद युवा निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। कोविड से पहले निमोनिया 60 साल से अधिक उम्र के मरीज को गंभीर करता था। बदले ट्रेंड के बाद 25 से 35 साल के युवा इससे गंभीर हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण ने फेफड़ों को कमजोर बना दिया। ऐसे में निमोनिया आसानी से मरीजों पर हावी हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निमोनिया फेफड़ों का संक्रमण है, जो किसी भी उम्र में हो सकता है। इस रोग में फेफड़ों के टिशू में मवाद भर जाता है। इस कारण सांस लेने में दिक्कत होती है। इसका खतरा सबसे ज्यादा दो साल से कम उम्र के बच्चों और 60 साल से अधिक उम्र के लोगों को रहता है, लेकिन कोरोना महामारी के बाद 25 से 35 साल के युवा भी इसकी चपेट में आकर गंभीर हो रहे हैं, जबकि आमतौर पर यह माना जाता था कि इस उम्र के युवा कभी निमोनिया की चपेट में नहीं आ सकते। कम उम्र में लोगों को गंंभीर कर रहा निमोनिया का बदला ट्रेंड विशेषज्ञों के लिए चुनौती बना हुआ है।
नागरिक अस्पताल के फिजिशियन डॉ. सुंदरम ने बताया कि कोरोना महामारी ने लोगों के फेफड़ों को कमजोर कर दिया। जो लोग कोविड से गंभीर हुए थे वह आसानी से निमोनिया की चपेट में आ सकते हैं। उनका कहना है कि यदि यह ट्रेंड इसी तरह बना रहा तो आने वाले दिनों में निमोनिया के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। पहले 60 साल से अधिक उम्र के मरीज गंभीर होकर अस्पताल आते थे, लेकिन पिछले एक-दो साल से 25 से 35 साल के युवा भी गंभीर हालत में आ रहे हैं।
इससे बढ़ता है संक्रमण
सिगरेट पीना और बहुत अधिक शराब पीना भी निमोनिया होने की आशंका को बढ़ा सकता है।
बीमारी के लक्षण
-खांसने से हरा, पीला या लाल रंग का बलगम आना।
-बुखार, पसीना और ठंड लगना।
-सांस लेने में तकलीफ।
-चुभने वाला दर्द, जो गहरी सांस लेने या खांसने पर बढ़ जाता है।
-भूख में कमी, कम ऊर्जा और थकान।
-मतली और उल्टी, खासकर छोटे बच्चों में