रोहतक की जनता कॉलोनी में मकान में रंग-रोगन कर रहे श्रमिक बिहार के मधेपुरा निवासी दशरथ (50) की पहली मंजिल से गिरकर मौत हो गई। सारी श्रमिकों ने 83 हजार रुपये चंदा जुटाकर वीरवार को शव अंतिम संस्कार के लिए बिहार भेजा। सीटू के जिला उप प्रधान संजीव सिंह का आरोप है कि श्रम विभाग का एक भी अधिकारी पीड़ित परिवार से मिलने नहीं आया। पीजीआई के डेड हाउस पहुंचे संजीव सिंह ने बताया कि बिहार निवासी दशरथ पिछले 30 साल से रोहतक में परिवार सहित रहते थे। उनका एक लड़का व एक लड़की है।
बुधवार को वह ठेकेदार प्रद्युम्न के पास एक मकान में रंग-रोगन कर रहे थे। संतुलन बिगड़ने से एक मंजिल से नीचे फर्श पर आ गिरे। सिर में चोट लगने से खून बहने लगा। उन्हें पीजीआई में दाखिल कराया गया जहां रात को मौत हो गई। मामले की सूचना पाकर शिवाजी कॉलोनी थाने से पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पोस्टमार्टम कराया।
53,200 रुपये श्रमिकों व 30 हजार रुपये ठेकेदार ने परिवार को दिए
पीजीआई डेड हाउस के बाहर एकत्रित श्रमिकों ने 50 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक चंदा जुटाया। 53,200 रुपये श्रमिकों ने तो 30 हजार रुपये ठेकेदार ने पीड़ित परिवार को दिए। जब जाकर शव अंतिम संस्कार के लिए बिहार ले जाया जा सका। इस मौके पर भवन निर्माण कामगार यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद, रोहतक ब्लॉक सचिव किशोर, जिला उप प्रधान संजीव सिंह, ब्लॉक उप प्रधान सुरेश यादव, सोनू, रमाकांत, कपिल, प्रद्युमन, मृतक दशरथ का बेटा बिट्टू, कांशी, राजेश व सुरेश भी मौजूद रहे।
सरकार मुआवजा दे नहीं तो होगा आंदोलन
भवन निर्माण कामगार यूनियन हरियाणा (सीटू) के जिला उप प्रधान संजीव सिंह ने बताया कि 10 साल से शहर में निर्माण कार्य में लगे 18 से ज्यादा श्रमिकों की मौत हो चुकी है। प्रवासी मजदूर का संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकरण नहीं था। पिछले ढाई साल से सरकार ने मजदूरों का बोर्ड में पंजीकरण ही बंद कर दिया है। अब तो कल्याण बोर्ड में पहले से पंजीकृत मजदूरों को फर्जी बताकर श्रमिकों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। सरकार परिवार को आर्थिक मुआवजा दे, नहीं तो आंदोलन होगा।