रोहतक। रोहतक और झज्जर जिला स्वास्थ्य विभाग व ड्रग ऐंड कास्मेटिक विभाग ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को पीजीआईएमएस के जच्चा-बच्चा वार्ड के बाहर आउट सोर्स पर लगी सुपरवाइजर रेखा बलहारा को अवैध तरीके से एमटीपी किट बेचते पकड़ लिया। महिला पर एमटीपी एक्ट, आईएमएस एक्ट, ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट के अलावा आईपीसी की धारा 420 के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला को पीजीआईएमएस थाना पुलिस के हवाले कर दिया। उधर, महिला के समर्थन में कुछ लोगों ने टीम का विरोध किया, लेकिन टीम ने मौके पर पुलिस को बुला लिया और विभागीय कार्रवाई पूरी की। महिला यह किट कहां से लाई थी इसकी पूछताछ पुलिस कर रही है।
झज्जर सिविल सर्जन को मिली गुप्त सूचना के आधार पर दोनों जिलों की स्वास्थ्य विभाग व ड्रग ऐंड कास्मेटिक विभाग की टीम शुक्रवार दोपहर करीब ढाई बजे पीजीआईएमएस पहुंची। रोहतक से ड्रग कंट्रोलर मंदीप मान ने बताया कि कार्रवाई में झज्जर स्वास्थ्य विभाग की टीम से डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. आंचल त्रिपाठी, डीसीओ संदीप हुड्डा, रोहतक स्वास्थ्य विभाग की डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमनजीत कौर शामिल थे। डिप्टी सीएमओ एवं पीएनडीटी प्रभारी झज्जर डॉ. आंचल त्रिपाठी ने बताया कि डॉ. ममता वर्मा व अन्य सदस्यों की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। डॉ. ममता को फर्जी ग्राहक बनाकर उसे किट खरीदने के लिए 500 के दो नोट दिए गए थे। इसके बाद डॉ. ममता ने योजना अनुसार कमला नगर निवासी आउटसोर्सिंग सुपरवाइजर रेखा बलहारा से संपर्क किया। 1000 रुपये लेकर जब रेखा ने एमटीपी किट दी तो उसे स्वास्थ्य विभाग की टीम ने धर दबोचा। टीम को महिला के बैग से डॉ. ममता वर्मा की ओर से दिए गए 500-500 के दो नोट भी बरामद किए। वहीं, महिला के खिलाफ कार्रवाई होते देख कुछ लोग आरोपी के समर्थन में आए और हंगामा करने लगे। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर टीम ने पुलिस बल बुला कर महिला को पुलिस के हवाले कर दिया।
विशेषज्ञों ने बताया कि जिन एक्ट में महिला पर मामला दर्ज हुआ है उसे पांच साल तक की सजा हो सकती है। एमटीपी किट लाइसेंस होल्डर के पास ही मिल सकती है। इसका प्रयोग करने की अनुमति केवल महिला रोग विशेषज्ञ को ही होती है।