परिवारजनों ने टीवी पर मैच देखा। शुरुआत में पिता संजीव वर्मा चाहते थे कि श्रीलंका टीम की सलामी बल्लेबाज जल्द आउट हो जाए, ताकि शुरू से ही भारत हावी हो सके। जब तीसरे ओवर में शेफाली ने श्रीलंका की सलामी जोड़ी को तोड़ा तो परिवारजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
भारत की महिला क्रिकेट टीम ने श्रीलंका को जापान के नागोया में चल रहे एशियन गेम्स में 147 रनों से हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया। यह 2026 एशियन गेम्स में भारत का पहला स्वर्ण पदक है। रोहतक की शेफाली वर्मा ने बल्ले और गेंद से कमाल कर इस सफलता में योगदान दिया।
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भारत ने पहले खेलते हुए स्मृति मंधाना के 79, ऋचा घोष के 49 और शेफाली के 48 रन की पारी की बदौलत 20 ओवर में 3 विकेट खोकर 216 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका ने दो ओवर में बिना किसी नुकसान के 13 रन बना लिए। तब कप्तान हरमनप्रीत ने रोहतक की बेटी शेफाली को गेंद थमाई।
शेफाली ने अपने पहले ही ओवर की पांचवीं गेंद पर दुलानी को आगे निकलने पर मजबूर कर दिया। विकेट कीपर ऋचा घोष ने स्टंपिंग में कोई गलती नहीं की। इस तरह भारत को पहली सफलता मिली। अपने अगले ओवर की दूसरी गेंद पर शेफाली ने स्लोअर गेंद फेंक फरेरा को भारती के हाथ कैच करा भारत को दूसरी सफलता दिलाई। शेफाली ने दो ओवर में तीन रन देकर दो विकेट लिए।
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परिजनों ने टीवी पर देखा मैच, मनाई खुशी
परिवारजनों ने टीवी पर मैच देखा। शुरुआत में पिता संजीव वर्मा चाहते थे कि श्रीलंका टीम की सलामी बल्लेबाज जल्द आउट हो जाए, ताकि शुरू से ही भारत हावी हो सके। जब तीसरे ओवर में शेफाली ने श्रीलंका की सलामी जोड़ी को तोड़ा तो परिवारजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैच खत्म होने के पिता संजीव, मां प्रवीण बाला, बहन नैंसी ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई। मैच के दौरान परिचितों और रिश्तेदारों के फोन घनघनाते रहे।