Women observed Ahoi Ashtami fast for sons' long life
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अहोई अष्टमी का पर्व रविवार को धार्मिक रीति रिवाज के अनुसार धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने सुबह अहोई माता की कथा सुनकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया और बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। पुत्रवती महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और शाम के समय दीवार पर परंपरानुुसार आठ कोने वाली पुतली बनाई और पुतली के पास ही स्याह माता और उसके बच्चे बनाए गए। पर्व पर कलाकारी और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। संतान की दीर्घायु और खुशहाल जीवन के लिए अहोई अष्टमी का व्रत सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक मनाया गया। शाम को आकाश में महिलाओं ने तारों को देखकर व्रत का पारण किया और कुछ माताओं ने चंद्रमा दर्शन के बाद व्रत पारण किया। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 8 नवंबर को सुबह 7:29 बजे से हुआ और समापन 9 नवंबर को सुबह 6:50 मिनट पर किया। दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी मनोज मिश्र ने बताया कि अहोई व्रत का महत्व अधिक है। इसलिए करवा चौथ के बाद इस व्रत को खास तौर पर मनाया जाता है। यह व्रत पुत्रों की रक्षा, लंबी आयु और मंगल की कामना के लिए कार्तिक अष्टमी को रखा जाता है। दोपहर से ही महिलाओं की टोलियां विभिन्न स्थानों पर कथा सुनती नजर आई। अहोई व्रत कर रही महिला दीप्ति, नितिका, रजनी, नेहा, दीपांशी, डिंपल ने बताया कि अहोई माता को मीठा व फल अर्पित कर पुत्रों की लंबी आयु की कामना की। महिलाओं ने बताया कि प्रत्येक व्रत व त्योहार में सामाजिक भलाई, आपसी प्रेम, विश्वास सौहार्द बढ़ाने का गूढ़ महत्व छिपा होता है। इसलिए अपने त्योहारों व व्रतों को हम श्रद्धा व खुशी से परिवार के साथ मनाते हैं।